भारत के आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह सबसे पहले सुकना भूमि घोटाला मामले से सुर्खियों में आए। सुकना घोटाला भारतीय सेना के इतिहास में एक ऐसा मामला था जिसने पूरे सैन्य ढांचे को हिला कर रख दिया। पहली बार सेना के इतिहास में तीन लेफ्टिनेंट रैंक के ऑफिसर्स के कोर्ट मार्शल की सिफारिश की गई। इसमें मिलिट्री सेक्रेट्री अवधेश प्रकाश, लेफ्टिनेंट जनरल रमेश हलगली और लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ के कोर्ट मार्शल की सिफारिश की गई। दरअसल, इस सुकना भूमि घोटाले का खुलासा ईस्टर्न कमांड में हुआ, उस वक्त इसके जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ जनरल वीके सिंह थे। हालांकि उसके पहले से ही जनरल वीके सिंह को सेना प्रमुख का दावेदार माना जा रहा था, क्योंकि उनकी छवि एक बेहद इमानदार अफसर की रही थी। साथ ही भारतीय सेना के इतिहास में सिंह पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं जिन्हें सुपर कमांडो की ट्रेनिंग भी हासिल है।
वीके सिंह उस वक्त तक किसी भी तरह के विवादों में नहीं थे और शायद यही वजह थी कि रक्षा मंत्री एके एंटनी वीके सिंह को देश की सेना का सुप्रीम बनाने की सोच रहे थे। अंततः वीके सिंह ने देश के आर्मी चीफ के रूप में पदभार संभाला। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना लगातार तरक्की के रास्ते पर आगे जाएगी लेकिन बीच में एक ऐसा विवाद आया जिसने सरकार और सेना प्रमुख के बीच दूरियां बढ़ाने का काम किया। उम्र विवाद ने सरकार और सेना प्रमुख के बीच एक दूरी पैदा कर दी। वीके सिंह अपनी बात पर अड़े हुए थे। सेना प्रमुख के मुताबिक उनकी जन्मतिथि 1951 में थी जबकि सरकार और रक्षा मंत्रालय का कहना था कि आर्मी चीफ के रूप में पदभार संभालते वक्त वीके सिंह ने अपनी जन्मतिथि मई 1950 मान ली थी। जाहिर तौर से यह मामला बाद में बेहद तूल पकड़ गया।
विवादों के बीच मामला यहां तक पहुंच गया कि वीके सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रवैये के बाद जहां सिंह ने अपने कदम पीछे किए वहीं सरकार का रवैया भी नरम पड़ा। इसी बीच देश के अति संवेदनशील साउथ ब्लॉक में एक और घटना हुई जिसने इस ठंडे पड़ रहे विवाद के बीच एक और विवाद को जन्म दे दिया। देश के अति संवेदनशील माने जाने वाले साउथ ब्लॉक इलाके में रक्षा मंत्री की बगिंग की खबर से हड़कंप मच गया। खबर आई कि ऑफ एयर इंटरसेप्टर जिसका इस्तेमाल सीमावर्ती इलाकों में किया जाता है, बगिंग के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। साउथ ब्लॉक में न सिर्फ डिफेंस मिनिस्ट्री का ऑफिस है बल्कि पीएमओ भी साउथ ब्लॉक में ही स्थित है।
हालांकि रक्षा मंत्रालय ने पुख्ता तौर पर इस बात से इंकार किया और कहा कि साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय के ऑफिस में किसी तरह की बगिंग नहीं की गई है। सवाल यह उठता है कि अगर बगिंग नहीं की गई तो आईबी को इसकी जांच क्यों सौंपी गई जबकि आमतौर पर इस तरह की जांच आर्मी इंटेलीजेंस को सौंपी जाती है। अफवाहें कई शक्ल अख्तियार कर चुकी थीं। मीडिया में कई अखबारों में यह चर्चा होने लगी थी कि साउथ ब्लॉक में योजनाबद्ध तरीके से बगिंग कराई गई है। इसमें वीके सिंह पर भी सवाल उठ रहे थे। सवाल यह था कि कि कहीं ये बगिंग रक्षा मंत्री एके एंटनी की जासूसी के लिए तो नहीं की गई। ऐसा माना जा रहा था कि यह ऑपरेशन मिलिट्री इंटेलीजेंस का था और इसमें मिलिट्री रैंक के अफसर भी शामिल थे। कहा गया कि कम से कम 7 ऐसे लोग थे जिनके ऊपर मिलिट्री इंटेलीजेंस की तरफ से ये सर्विलांस लगाया गया था। इस तथ्य में कितनी सच्चाई है वह सामने आना बाकी है।
तमाम तरह की खबरों के बीच मिलिट्री इंटेलीजेंस में दो फाड़ की खबरें भी आईं। मिलिट्री इंटेलीजेंस का एक धड़ा (लॉबी) जो वीके सिंह के अपोजिट था, इस खास लॉबी ने इस खबर को लीक आउट कर दिया। लॉबी के जरिए ये बात सरकारी महकमे तक पहुंची, इसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ। ये वो तथ्य हैं जिसका पता आईबी की जांच पूरी होने के बाद ही लग पाएगा। इस मामले को ठंडा करने की कोशिश की ही जा रही थी कि एक अखबार को दिए जनरल वीके सिंह के इंटरव्यू ने फिर सियासी महकमे में हड़कंप मचा दिया। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में वीके सिंह ने कहा कि 600 घटिया गाड़ियों की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपए बतौर घूस पेशकश की गई थी।
अखबार के हवाले से सिंह ने ये भी कहा है कि उन्होंने इस बात की जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को भी दी थी। लेकिन इसमें कितना तथ्य है, किस बिना पर सिंह ने एंटनी को इस बात की जानकारी दी यह कहना अभी मुश्किल है। इस बात का पता वक्त बीतने के साथ ही और पूरी डिटेल्स सामने आने के बाद ही लगाया जा सकता है।
जानकारों का मानना है कि वीके सिंह के कार्यकाल में उनके उम्र को लेकर उठे विवाद, बगिंग जैसी खबरों की वजह से उनकी ईमानदार छवि को धक्का लगा है। उन सबसे बाहर निकलने के लिए ही सिंह इस तरह के जुमले अख्तियार कर रहे हैं। फिलहाल आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसके अलावा जानकार सिंह को रिश्वत पेश किए जाने संबंधी बयान पर उन्हें शक की निगाहों से देख रहे हैं। कहीं ये सब विवादों से बाहर निकलने की कोशिश तो नहीं। फिलहाल आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है।














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