जनवरी, 2009
"अमेरिका का मिलिट्री रक्षा खर्च बाकी दुनिया के कुल रक्षा खर्च से ज्यादा है, फिर भी चार सालों के अथक प्रयासों, सैकड़ों अमेरिकियों की जान गंवाने और करीब आधा ट्रिलियन डॉलर स्वाह करने के बावजूद अमेरिका ढाई करोड़ की आबादी वाले एक देश में लोकतंत्र की जड़े जमाने मे नाकाम क्यों रहा। " जाने-माने अमेरिकी चिंतक फ्रांसिस फुकुयामा ने 2006 में अमेरिका की मौजूदा तकलीफ को इन शब्दों में बयां किया था। उनकी ये टिप्पणी अमेरिका की चिंता और उसकी वेदना की ओर इशारा करते हैं। और यही चिंता नये अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पहले भाषण मे भी दिखाय़ी देती है जब वो कहते है कि अमेरिका इस वक्त संकट के दौर से गुजर रहा है। उनका ये कहना महज एक संयोग नहीं है। फ्रांसिस फुकुयामा वो शख्स है जिसने नब्बे के दशक में इतिहास का अंत लिखकर ये कह दिया था कि उदारवादी लोकतंत्र सबसे परिष्कृत....









