फरवरी, 2009
ये मेरे यूनिवर्सिटी के जमाने की बात है। तब पहली बार मैंने लालू यादव नाम के किसी शख्स का नाम सुना। पता चला वो बिहार के मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं। लालू को उस समय के किंग मेकर और भारतीय राजनीति के स्तंभ माने जाने वाले देवी लाल का समर्थन हासिल था। जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह को लालू यादव फूटी आंख नहीं सुहाते थे। मुख्यमंत्री पद के लिए वी.पी. सिंह के उम्मीदवार थे दलित नेता रामसुंदर दास। तब किसी ने लालू को गंभीरता से नहीं लिया था। और न ही मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी ने सोचा था कि वो अपना कार्यकाल भी पूरा कर पाएंगे। लेकिन तमाम तर्कों और राजनैतिक समीकरणों को दरकिनार करते हुए उनकी सरकार ने न सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा किया बल्कि 15 साल तक वो बिहार में सत्ता में भी बने रहे। मैं उन्हीं लालू प्रसाद यादव की बात....









