जून, 2009
बीजेपी की हालत बुरी है ये किसी से छुपा नहीं है। लेकिन आरएसएस उसके घाव में मिर्च डालकर उसका दर्द बढ़ा रहा है। संघ के बड़े नेता एम जी वैद्य कहते हैं कि अगर बीजेपी को ये लगता है कि हिंदुत्व के रास्ते चलकर उसे सत्ता नहीं मिल सकती तो वो हिंदुत्व को छोड़ दें। वो ये भी कहते हैं कि अगर बीजेपी को लगता है कि हिंदुत्व पार्टी के आधुनिक बनने के रास्ते में एक रोड़ा है तो उसे छोड़ दें। वैद्य की बातों में दम है और बीजेपी को फौरन उनका सुझाव मान लेना चाहिए। इसलिये नहीं कि हिंदुत्व वाकई बीजेपी के लिये एक समस्या है, बल्कि इसलिए कि जिस हिंदुत्व की बात संघ करता है वो असली हिंदुत्व है ही नहीं और इसी ओर अरुण जेटली इंडियन एक्सप्रेस के अपने लेख में इशारा करते हैं । जब वो कहते है कि बीजेपी को "श्रिलनेस" यानी....
आशीष नंदी बड़े विद्वान हैं और उनकी बहुत इज्जत है। चुनावों की समीक्षा करते हुए उन्होंने लिखा कि बीजेपी और दूसरी पार्टियों को उनका दंभ यानी "एरोगेंस" ले डूबा। उनकी तुलना में देश की जनता ने मनमोहन सिंह की "विनयशीलता और सज्जनता" को सराहा और उनके सिर जीत का सेहरा बांधा। नंदी का विश्लेषण दिलचस्प है, और अरुण जेटली की बात से काफी मेल भी खाता है। जेटली का कहना है कि मतदाताओ ने "श्रिलनेस" यानी अनावश्यक बयानबाजी, सतहीपने को नकार दिया, लोगों ने "मॉडरेशन" को पसंद किया न कि जिंगोइजम को। जिंगाइजम और एरोगेंस बड़े शब्द हैं और अगर नंदी और जेटली जैसे लोग इनका इस्तेमाल करते हैं तो फिर अनायास ही सबकी नजर भी उधर ही उठ जाती है। इन जुमलों से चुनावों का खूबसूरत विश्वेषण तो हो जायेगा लेकिन सही तस्वीर सामने आ पाएगी, कहना मुश्किल है। देश मे इस वक्त दो तरह की धाराएं....









