सितंबर, 2008
मैंने अनवर से पूछा - तुम क्या कर रहे हो? उसने पलटकर पूछा - इसका क्या मतलब ? मैंने कहा - अबे जामिया में ये रैली करने की क्या जरूरत है? तुम क्यों नहीं समझते? इससे गलत संदेश जाएगा। भगवान के लिए ऐसा मत करो। ये सुनते ही अनवर आपा खो बैठा और बोला- तुम्हारा क्या मतलब है? कानूनी सहायता देना मूलभूत अधिकार है। मैं उस पर भला कैसे आपत्ति कर सकता हूं। मैंने कहा- देखो, कोई भी भला आदमी इस बात पर उंगली नहीं उठाएगा पर यह वह समय नहीं है। ऐसे में जब कोई ये नहीं जानता कि कहां बम फटेगा और हम घर लौटेंगे भी या नहीं तब आप कैसे किसी से समझदारी की उम्मीद कर सकते हैं। काफी देर गर्मागर्मी होती रही। एक बार तो ऐसा लगा कि दोस्ती खतरे में है। अनवर और मैं 1988-90 में जेएनयू में साथ-साथ थे। तब से हम....









