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आशुतोष

नवंबर, 2009

Sunday , November 29, 2009

वाजपेयी का मुखौटा या संघ का खिलौना


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लिब्रहान कमीशन ने अयोध्या का सच सामने लाने में 17 साल लगाए और इसको लेकर उसकी जी भर के आलोचना की जानी चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ये भी लगता है कि कमीशन ने कांग्रेस लीडरशिप को भी जाने अनजाने बचाने की कोशिश की है। वो नरसिंहराव को जिम्मेदारी के बोझ से मुक्त कर देती है लेकिन पूरी रिपोर्ट ने सबसे ज्यादा चौंकाया अटल बिहारी वाजपेयी को अयोध्या मामले में घसीट कर। इस वजह से हिंदूवादियों और कुछ भ्रमित सेकुलरवादियों को मिर्ची लगी हैं। वो इसी आधार पर जस्टिस लिब्रहान की मंशा और विवेक पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। कमीशन बड़े दिलचस्प अंदाज में वाजपेयी को 'स्यूडो-माडरेट' बताती है। यानी वो शख्स जो दिखने में तो उदारवादी है पर हकीकत में उदारवाद का ढोंग कर रहा है, वो 'छद्म -उदारवादी' है। पेज 942, पैरा 166.6 में रिपोर्ट लिखती है 'आडवाणी, वाजपेयी, जोशी को संघ परिवार की साजिश....

Sunday , November 22, 2009

नितिन का चुनाव और संघ की शक्ति


5IBNKhabar Google Buzz

नितिन गडकरी बीजेपी के अध्यक्ष बनेंगे। ये खबर कुछ लोगों को चौंका सकती है लेकिन जो संघ को जानते हैं, वो जानते थे कि कुछ ऐसा ही होगा। इसकी बुनियाद उसी दिन पड़ गई थी जिस दिन आडवाणी, चुनाव के फौरन बाद नेता का पद छोड़ने का ऐलान कर उससे मुकर गए। संघ तब सन्नाटे में आ गया था। संघ सोच रहा था कि आडवाणी जाएंगे तो पार्टी में नई लीडरशिप आएगी और वो भविष्य की राजनीति को संचालित करेगी लेकिन आडवाणी के पलटते ही संघ की योजना को झटका लगा। इस वजह से नहीं की आडवाणी में काबिलियत नहीं थी बल्कि इसलिए कि उम्र के जिस पड़ाव वह खड़े थे उसके आगे भविष्य की लंबी दीवार नहीं खड़ी की जा सकती थी और आडवाणी इस नई दीवार के नींव के पत्थर नहीं बन सकते थे। जानने वाले जानते हैं कि संघ की बीजेपी को नई शक्ल देने की....

Sunday , November 15, 2009

हमारी आंखों का पूरा ख्वाब है सचिन


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जो मुझे जानते हैं उन्हे पता है कि मैं सचिन तेंदुलकर का हमेशा आलोचक रहा। इस वजह से अकसर सहयोगियों से नोकझोंक भी होती रहती है। शायद मैं 'ओल्ड फैशन्ड' हूं या फिर सचिन की कामयाबी से 'जलने वाला इंसान'। शायद दोनों ही। लेकिन आज कहना चाहता हूं। साथियों को भले ही अजीब लगे मैंने हमेशा ही मन ही मन में सचिन के खेल की सराहना की है और हमेशा उसको खेलते हुए देखकर अपने मन से पूछा है कि क्या हाड़ मांस का कोई इंसान इस तरह खेल सकता है। और उसका आलोचक इसलिए रहा कि मन ही मन ये मान बैठा था कि ये नन्हा मास्टर कभी कोई गलती नहीं कर सकता। इसलिए जब उसे कोई गलत शॉट लगाते हुए देखा या फिर मामूली गेंद पर आउट होते देखा तो खीज उठा और बोल उठा ये वो सचिन तो नहीं। क्योंकि सचिन तो कभी गलत कर ही नहीं....

Sunday , November 08, 2009

शिवराज का बिहारी अ-प्रेम और अस्मिता का सवाल


11IBNKhabar Google Buzz

सतना में दिए शिवराज सिंह चौहान के बयान से मैं चौंका। दो कारणों से- एक, शिवराज की ऐसी कोई इमेज कभी रही नहीं। बीजेपी में होने के बावजूद उनकी छवि कभी भी ऐसे नेता की नहीं रही जो उग्र भाषा में बात करता हो जैसा उनके कुछ सहयोगी अक्सर करते हैं। हालांकि इसका कतई ये मतलब नहीं कि वो संघ के एजेंडे को लागू करने में पीछे रहते हैं। शिवराज का नाम आते ही एक निहायत से मासूम से दिखने वाले उदारवादी सहज नेता की तस्वीर उभरती है। दो, शिवराज की पार्टी का नाम बीजेपी है और वह संघ परिवार का सदस्य है। संघ की विचारधारा वृहत्तर राष्ट्रवाद की बुनियाद पर टिकी है। यानी कश्मीर से कन्याकुमारी, द्वारका से अरुणाचल प्रदेश तक सब एक ही संस्कृति का हिस्सा है। संघ की विचारधारा प्रांतवाद या क्षेत्रवाद में यकीन नहीं करती है। वो इसे राष्ट्रवाद के रास्ते में एक रुकावट मानती है....

Sunday , November 01, 2009

एक पुलिस वाले का सिर कलम या एक विचारधारा की जीत


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अठारह साल की उम्र में मार्क्सवाद से मेरा परिचय नहीं हुआ और न ही किसी वामपंथी से दोस्ती, लेकिन बीस साल की उम्र में जेएनयू की बदौलत इनसे जान पहचान हो गई। तब तक मैं शायद दुनिया को जानने लगा था इसलिए मार्क्सवादी नहीं बना। दबाव काफी था, दोस्त यारों ने काफी जोर भी डाला था। एक मित्र तो दिन रात ये समझाने की कोशिश करते थे कि मुझे उनके साथ बिहार जाना चाहिए और वहां क्रांति लाने के लिये काम करना चाहिए। वह कभी-कभी उलाहना भी देते थे। तुम आईएएस बनकर अपने आप को बर्बाद करोगे। उसी सिस्टम का हिस्सा बनोगे जो शोषण पर आधारित है। खैर, उनकी मेहनत जाया गई। मैं उनसे कहता था कि तीन वजहों से मैं वामपंथ के साथ खड़ा नहीं हो सकता। एक, वामपंथ अपने मूल में लोकतंत्र विरोधी है। दो, मानवाधिकार में इसकी कोई आस्था नहीं। तीन, ये हिंसा के कट्टर....

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आशुतोष के बारे में कुछ और

44 साल के आशुतोष मैनेजिंग एडिटर हैं। IBN7 से जुड़ने से पहले आशुतोष एक प्रमुख खबरिया चैनल आजतक की टीम का हिस्सा थे। वह प्राइमटाइम के कुछ खास ऐंकर्स में से एक थे। ऐंकरिंग के अलावा फील्ड और डेस्क पर खबरों का प्रबंधन उनकी प्रमुख क्षमता रही है। वह भारत के एक छोर से दूसरे छोर तक खबरों की कवरेज से जुड़े रहे हैं।
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