दिसंबर, 2008
रात के दस बजे थे। अचानक फोन की घंटी बजी। अनमने से फोन उठाया। लेकिन फोन पर बात सुनते ही होश उड़ गये। उधर से कहा गया कि मुंबई में कई जगह पर फायरिंग की खबर है। आंतकवादियों ने काफी बड़ा हमला बोला है। आनन-फानन में रिपोर्टर्स को मोबलाइज किया गया। ओबी वैन को स्पॉट पर पंहुचाने की कोशिश में पूरा न्यूजरूम लग गया। चैनेल लाइव था। हमारे संवाददाता जेपी फोन पर खबर दे रहे थे। एंकर ने सवाल किया। कैमरा हवा में घूमा और कुछ पल के लिये टीवी ब्लैक हो गया। ग्रेनेड हमारी कैमरा टीम के पास ही फटा था। पूरे न्यूज रूम में सन्नाटा...एंकर ने पूछा, जेपी...जेपी। आवाज नही आयी। अनिष्ट और आंशका से दिल बैठ गया। न्यूज रूम और एंकर के सामने अंधेरा सा छाने लगा। एंकर ने फिर जेपी का नाम पुकारा। उधर से दो सेकेंड तक आवाज नहीं आयी। आशंका सच साबित होती दिखी।....









