जनवरी, 2010
कभी-कभी सपनों के टूटे आईने में दिखने वाली शक्ल बेतरह डराती है। इक्कीसवीं सदी का पहला दशक जाते-जाते कुछ ऐसा ही मंजर छोड़ गया है। ऐसा लगता है कि भारत तेजी से बौनों के देश में तब्दील होता नजर आ रहा है। जिन मूल्यों पर इस महादेश की आधारशिला रखी गई थी, वो टुकड़े-टुकड़े होकर राजपथ से लेकर जनपथ पर बिखरे पड़े हैं। और अफसोस ये है कि किसी को अफसोस नहीं। याद नहीं पड़ता कि नारायण दत्त तिवारी के अलावा मौजूदा दौर में कोई दूसरा नेता गांधी टोपी और खद्दर की ऐसी संभाल करता रहा हो। लेकिन हैदराबाद के राजभवन से निकले वीडियो टेप में न उनकी टोपी है न धोती। 86 बरस के तिवारी की ये दुर्गति एक व्यक्ति का मसला नहीं, उन सपनों के स्खलन की कथा है जिन्हें देख-देखकर देश जवान हुआ था। एन.डी.तिवारी उन इन-गिने मौजूदा नेताओं में हैं जिन्होंने देश के....









