फरवरी, 2010
कलम सुन्न है। शाहरुख और ठाकरे प्रसंग पर चल रहे चमकदार विवाद पर भी कुछ लिखना मुश्किल हो रहा है। दिमाग महीने भर पहले की उसी घटना पर अटका हुआ है जहां से दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है। सीने पर धरे इस बोझ को हटाने का यही तरीका है कि देर से ही सही, गुबार निकाल दूं। बात इसी 2010 की जनवरी की है। ग्लोबल वार्मिंग की बहस को रिकार्ड तोड़ ठंड ने ठंडा कर दिया था। चर्चा बस ये हो रही थी कि गणतंत्र के 60 साल पूरे होने का जश्न कैसे मनाया जाए। ठीक इसी वक्त पोंगल की तैयारियों में जुटे तमिलनाडु के एक दलित नौजवान को उस हैरतनाक हकीकत से रूबरू होना पड़ा,जिसने उसके लिए गणतंत्र और संविधान को बेमानी बना दिया। डिंडीगुल जिले के बाटलागुंडु थाना क्षेत्र में है गांव मेलाकोइलपट्टी। दलित नौजवान पी.सादियान्दी, उम्र 24 साल, इसी गांव का है।....









