जुलाई, 2008
वो 23 मई की दोपहर थी.. खबर मिल चुकी थी कि आरुषि हत्याकांड में डॉ.राजेश तलवार गिरफ्तार कर लिए गए हैं। आईजी गुरुदर्शन सिंह प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं...हाथ अपने आप मोबाइल पर चला गया...मनीषा को हिदायत दी कि चिया अगर टीवी देख रही हो तो बंद कर दो। वो सारा माजरा समझ गई। बहुत कोशिश की थी कि चिया को आरुषि हत्याकांड में रुचि लेने से बचाया जाए। लेकिन अखबार छिपाने और टीवी बंद करने का भी बहुत फायदा नहीं हुआ। सोसायटी के बच्चों के साथ शाम को खेलने के बाद वो हमेशा कोई न कोई जानकारी या सवाल लेकर लौटी। कोई जवाब नहीं था, बस एक बार चिल्लाकर कहा था कि कोई बाप अपनी बेटी का गला नहीं रेत सकता। पर छठी में पढ़ने वाली बच्ची के लिए ये कोई जवाब नहीं था। न डॉ.तलवार से कोई लेना-देना था, न ही आरुषि से..पर न जाने....
एक महफिल में किसी बिहारी दोस्त ने अपने जन्मदिन की सूचना कुछ इसी अंदाज में दी थी...सब हंस पड़े थे। हर जन्मदिन पर ये बात याद आती है और चेहरे पर मुस्कराहट तैर जाती है। आज हमारा जन्मदिन है (अवधी लोग 'मेरा' की जगह 'हमारा' कहना बेहतर समझते हैं, बिहारी भाई चाहें तो हंस कर हिसाब बराबर कर सकते हैं)..बधाइयां आमंत्रित हैं।
जन्मदिन का उल्लास स्वाभाविक है...पर हाल के वर्षों में जीवन के एक साल कम होने या मृत्यु की ओर बढ़ते कदम का विचार भी छाने लगा है.....ओह!....इस दुनिया को छोड़ जाना होगा.....फिर इस सराय को घर समझने की भूल क्यों हो रही है....जीवन जीने की जगह जीवन काटने...और फिर बैंक किस्तों से कटते जाने का ये सिलसिला क्यों....
पुरानी डायरी पलटी....मुक्तिबोध की कुछ पंक्तियां सामने हैं-
अब तक क्या किया
जीवन क्या जिया
बताओ तो
किस-किस के लिए तुम दौड़ गए
करुणा के दृश्यों....
अगर कोई अब भी टीवी पत्रकारों को सत्यान्वेषी की जगह कुछ और समझता है तो दोष उसकी नजर का है। आखिर इससे ज्यादा वे और क्या करते। बड़े-बड़े वैज्ञानिक मिशन फेल हैं इन मिशनरी पत्रकारों के सामने। वैज्ञानिक दशकों की कोशिश के बावजूद ठीक-ठीक कुछ कहने की हालत में नहीं हैं, पर इन्होंने न सिर्फ एलियंस की चलती-फिरती तस्वीर दिखा दी, बल्कि उनकी आवाज और भाषा भी सुना दी। बस कमी रह गई है इस भाषा की डिकोडिंग की। उम्मीद है कि ये काम भी जल्दी हो जाएगा, क्योंकि पत्रकारों के मिशन में ब्रिटेन से लेकर पंजाब तक के लोग शामिल हो चुके हैं। वे एलियंस पर कड़ी नजर रखने के लिए रातों की नींद खराब कर रहे हैं... उड़नतश्तरियों को कैमरे (मोबाइल) में कैद करने के लिए हर वक्त मुस्तैद रहते हैं। और कुछ नहीं तो स्पेशशिप की रोशनी ही चैनलों को उपलब्ध करा देते....









