अगस्त, 2009
इस रक्षाबंधन पर शांता याद आ रही है। वैसे, अगर आप शांता को नहीं जानते...तो गलती आपकी नहीं,... भारत की हर दूसरी बहन यूं ही तमाम कुर्बानी देने के बावजूद गुमनाम बनी रहती है। शांता की किस्मत में भी ऐसी ही कुर्बानी थी। बावजूद इसके कि वो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की बहन थी और रामजन्म को संभव बनाने के लिए उसने बड़ा बलिदान दिया था। कथा ये है कि जब दशरथ पुत्र के लिए तड़प रहे थे तो उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ कराने की सलाह दी गई । इस यज्ञ को करने के लिए सर्वाधिक योग्य ऋषिकुमार श्रृंग्य (या श्रृंगी) थे। उनका जन्म ऋषि विभाण्डक और एक हिरनी के संसर्ग से हुआ था इसलिए उनके माथे पर सींग था। इसी वजह से वे श्रंगी कहलाते थे। श्रृंगी हमेशा वन में पिता की सेवा में जुटे रहते थे। कंद-मूल, फल के अलावा दूसरा स्वाद जानते न थे। जंगल ही उनके....









