अक्टूबर, 2009
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के सिलसिले में विदर्भ में मौजूद आईबीएन7 के वरिष्ठ संवाददाता नीरज गुप्ता ने बताया है कि किसानों की खुदकुशी चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। चुनाव उन्हीं सारे छल-छंद में रंगा है जो भारतीय लोकतंत्र की खासियत माने जाते हैं। यानी किसानों का भूत नेताओं की नींद खराब नहीं कर रहा है। यूं भी, हमारे नेताओं को असल मुद्दों को दफनाने में महारत हासिल है। जनता की बेजारी ने उनका काम आसान कर दिया है, जो फिलहाल छोटे पर्दे में विराजतीं सास-बहुओं के चिंताकुल चेहरों का जायजा लेने में मुब्तला है और जब फुर्सत मिलती है तो कभी राजू श्रीवास्तव का गब्बर छेक लेता है तो कभी राखी की स्वयंवरित परेशानियां। पता नहीं, दुनिया का कौन सा ऐसा महाबली देश (आजकल भारत को महाशक्ति कहने का फैशन है) होगा जहां हजारों किसानों की खुदकुशी से राज और समाज इस तरह बेजार रह सकता है। वैसे, इसका....









