नवंबर, 2009
आईबीएन7 पर एहेतशाम खान की दिल दहला देने वाली खबर चल रही थी। ये कहानी भूख और बीमारी के कहर में लिपटे झारखंड के गढ़वा जिले के आदिवासियों की थी। मिरल ब्लॉक के गांव टेटुका कलां के साठ पार के बूधन भुइयां कांपती आवाज में बता रहे थे कि उनके दो नौजवान बेटे परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटाने की जद्दोजहद में भरी जवानी मौत का शिकार बन गए। भूख ने शरीर को इस कदर तोड़ दिया था कि घात लगाए बैठी बीमारियों का हमला बर्दाश्त नहीं हुआ। बूधन की एक-एक अंतड़ी टीवी के पर्दे पर चमक रही थी। तन पर बस लाज ढकने भर का कपड़ा था। बता रहे थे कि किसी तरह मक्के का जुगाड़ हो पाता है। वो भी रोज नहीं। सरकारी मदद का कोई चेहरा आसपास नजर नहीं आता। हताश बूधन जैसे भविष्यवाणी कर रहे थे-'इसी तरह एक दिन हम भी मर जाएंगे।' ....









