दिसंबर, 2009
लव जिहाद!....अंग्रेजी और अरबी लफ्जों को मिलाकर बनाया गया एक शब्द-बम। इस बम में बारूद नहीं जहर था। पिछले कुछ महीनों में बड़ी तैयारी के साथ जगह-जगह इसे फोड़ा गया। ये बम छापेखानों की स्याही में घुलकर अखबार के पन्नों पर फैल गया। चैनलों के न्यूज रूम की नकली फर्श के नीचे उलझे पड़े तारों में जहर भरते हुए, ये बम सीधे आकाश में टंगे उपग्रहों से टकराया, और बुद्धू बक्सों के जरिये धमाका करने लगा। चौराहे पर खड़ी चेतना को इसने एक झटके में राख कर दिया। ये कमाल था संघ परिवार की प्रचार मशीनरी का। धमाका ये बताने के लिए था कि हजारों की तादाद में हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाने के लिए जिहाद छिड़ गया है। संगठित योजनाबद्ध अभियान। मुस्लिम नौजवान भोली-भाली हिंदू लड़कियों को 'फंसाते' हैं और फिर उनसे शादी करने के नाम पर इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर कर देते हैं। बाद....









