ibnkhabarlogo
IBN7
IBN7
  • देश
  • पॉलिटिक्स
  • सिटी
  • मनोरंजन
  • क्रिकेट
  • लाइफस्टाइल
  • फोटो
  • वीडियो
  • IPL-5
FacebookTwitterGooglePlus
  • दुनिया
  • बिजनेस
  • खेल
  • ब्लॉग
  • CJ
  • धर्म-कर्म
  • शो
  • स्पेशल
  • अजब-गजब
  • लाइव-स्कोर
  • रीडर्स स्पेस
  • चैट
  • Live TV
    CNN-IBN IBN7 IBN Lokmat CNBC-TV18 CNBC Awaaz MYTV
पंकज श्रीवास्तव
Sunday , September 28, 2008 at 20 : 56

सॉरी, भगत सिंह सॉरी!


10IBNKhabar Google Buzz

प्यारे भगत सिंह,

आज तुम्हारा एक सौ एकवां जन्मदिन है। 28 सितंबर 2008, दिन रविवार। ये बात मुझे तब पता चली जब मैं अपनी कुछ पुरानी किताबे कबाड़ी वाले को बेचने जा रहा था। हमने तय किया था कि इस वीकएंड पर पिज्जा खाने के लिए पैसे का इंतजाम पुरानी किताबें बेचकर किया जाए। दरअसल महीने का आखिरी है और मेरे क्रेडिट कार्ड की लिमिट पहले ही पार हो चुकी है। ऐसे में फिजूलखर्ची करना समझदारी नहीं। तमाम किताबें और आल्मारी तो पहले ही बेच चुका था.. पर पत्नी ने कुछ किताबें फिर भी रख ली थीं। खासतौर पर ,जिन्हें खरीदने के बाद मैंने दस्तखत करके तारीख डाली थी, और उसे उपहार में दिया था। ये शादी के पहले की बात है। लेकिन अब दिल्ली के छोटे से फ्लैट में रहते हुए उसे भी समझ में आ गया है कि किताबें जगह काफी घेरती हैं। बच्चों को सन्डे-सन्डे पिज्जा खिलाने का वादा उसे परेशान कर रहा था। यूं भी किताबों के पहले पन्ने पर किए गए मेरे दस्तखत अब खासे बदरंग हो चुके हैं। इसलिए कबाड़ी बुला लिया था। इस बीच मुझे तुम्हारी जीवनी दिख गई। बी.ए में खरीदी थी। इसमें तुम्हारे लेख भी थे जो कभी मुझे जबानी याद थे। कबाड़ी को सौंपने के पहले मैंने एक बार कुछ पन्ने उलटे तो कहीं दिख गया कि तुम 28 सितंबर 1907 को पैदा हुए थे।

...कबाड़ी करीब ढाई सौ रुपये देकर जा चुका है। पिज्जा का आर्डर दे दिया है। सोचता हूं कि जब तक पिज्जा आता है, तुम्हें एक पत्र लिख दूं । ताकि तुम्हें मेरा किताब बेचना बुरा न लगे। वैसे भी अब मुझे सारी बातें साफ-साफ बता देनी चाहिए। दुनिया काफी आगे बढ़ गई है। बेहतर हो कि तुम भी किसी भ्रम में न रहो, जैसे मैं नहीं हूं।

...तुम सोच रहे होगे कि सूचना क्रांति के दिनों में तुम्हारे जन्मदिन की जानकारी इतनी छिपी क्यों रह गई। गलती मेरी नहीं है। मैंने सुबह चार-पांच अखबार देखे थे और कई न्यूज चैनल भी सर्फ किए थे। तुम कहीं नहीं थे। हां, लता मंगेशकर के जन्मदिन के बारे में जानकारी जरूर दी गई थी। कहीं-कहीं उनका गया 'ऐ मेरे वतन के लोगों'... भी बज रहा था लेकिन तुम्हारी तस्वीर नहीं दिखा...या हो सकता है मेरी नजर न पड़ी हो। वैसे कोई छाप या दिखा भी देता तो क्या फर्क पड़ जाता। तुम्हारे बारे में सोचना तो हमने कब का बंद कर दिया है।

... तुम्हें लगता होगा कि तुमने असेंबली में बम फेंककर बहुत बड़ा तीर मारा था। लेकिन आजकल दिल्ली में आए दिन बम धमाके हो रहे हैं और तमाम बेगुनाह मारे जा रहे हैं। ये सारा काम वे कमउम्र नौजवान कर रहे हैं जिन पर तुम कभी बहुत भरोसा जताते थे। कहते थे कि नौजवानी जीवन का बसंत काल है जिसे देश के काम आना चाहिए। एक ऐसा देश बनाने में जुट जाना चाहिए जहां कोई शोषण न हो, गैरबराबरी न हो, सबको बराबरी मिले...वगैरह-वगैरह। लेकिन फिलहाल इन फिजूल बातों से नौजवान अपने को दूर कर चुके हैं। उनका एक तबका अमेरिका में बसने के लिए मरा जा रहा है, दूसरा ऐसा है जिसकी देशभक्ति सिर्फ क्रिकेट मैच के दौरान जगती है। कुछ ऐसे जिन्हें तुम्हारे हैट से ज्यादा ओसामा बिन लादेन की दाढ़ी अपनी ओर खींच रही है और कुछ इसे हिंदू राष्ट्र बनाने में जुटे हुए हैं। सब एक दूसरे के दुश्मन बन गए हैं और जरा सी बात पर किसी की जान ले लेना उनके बाएं हाथ का खेल बन गया है। तुम अश्फाक उल्लाह खान के साथ मिलकर जो देश बनाना चाहते थे, वो अब उनके सपनों से भी बाहर हो चुका है। बल्कि ऐसी दोस्तियां भी सपना हो रही हैं।

पर तुम इन बातों को कहां समझ पाओगे। तुम तो नास्तिक थे। तुम्हीं ने लिखा था- "मैं नास्तिक क्यों हूं।"... उसमें तुमने ईश्वर को नकारा था। कहा था कि अगर भारत की गुलामी ईश्वार की इच्छा का परिणाम है, अगर करोड़ों लोग शोषण और दमन की चक्की में उसकी वजह से पिस रहे हैं तो वो नीरो है, चंगेज खां है, उसका नाश हो!.....तो सुन लो, न ईश्वर का नाश हुआ, न धर्म का। मुल्ला, पंडित, ज्योतिषी, ई बाबा, ऊ बाबा, अलान बाबा, फलान बाबा सबने मिलकर युद्द छेड़ दिया है। अखबार, न्यूज चैनल, पुलिस, सरकार, सब इस मुहिम में साथ हैं। नौजवानों के बीच तुम कहीं नहीं हो। वे घर से निकलने के पहले न्यूज चैनलों के ज्योतिषियों की राय सुनते हैं। उसी के मुताबिक कपड़ों का रंग और दिशा तय करते हैं। तुम्हारी हस्ती एक तस्वीर से ज्यादा नहीं। उसमें भी घपला हो गया है। तुम लाख नास्तिक रहे हो, लोग तुम्हें सिख बनाने पर उतारू हैं। संसद परिसर में तुम्हारी मूर्ति लगा दी गई है, जिसमें तुम पगड़ी पहने हुए हो। तुम्हारी शक्ल ऐसी बनी है कि तुम्हारे खानदान वाले भी नहीं पहचान पाए। पहचानी गई तो सिर्फ पगड़ी।

और हां, तुम जिस साम्राज्यवाद से सबसे ज्यादा परेशान रहते थे, वो उतना बुरा भी नहीं निकला। तुम तो कहते थे कि विश्वबंधुत्व तभी कायम हो सकता है जब साम्राज्यवाद का नाश हो और साम्यवाद की स्थापना हो। लेकिन जिन्हें साम्राज्यवादी कहा जाता था वे तो बड़े शांतिवादी निकले। वे अशांति फैलाने वालों का सफाया करने मे जुटे हैं। अभी हाल में उन्होंने ईराक और अफगानिस्तान को नेस्तनाबूद करके शांति स्थापित कर दी है। उनकी रुचि अब हमपर शासन करने की नहीं है। वे हमसे अच्छा रिश्ता बना रहे हैं। वे हमें तरह-तरह के हथियार, परमाणु बिजली घर अजब-गजब कंप्यूटर और मोबाइल फोन सौंप रहे हैं। यहां तक कि बेचारे साफ पानी और कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों को भी हिंदुस्तान के गांव-गांव पहुंचाने में जुटे हैं। हम भी उन्हें बड़े भाई जैसा सम्मान दे रहे हैं। बल्कि उनसे बेहतर बातचीत होती रहे, इसके लिए हमने अंग्रेजी को दिल से अपना लिया है। तुम्हारे पंजाब के ही पैदा हुए सरदार मनमोहन सिंह आजकल देश के प्रधानमंत्री हैं। वे बाकायदा लंदन जाकर आभार जता आए हैं कि उन्होंने हमें टेक्नोलाजी दी और अंग्रेजी सिखाई। हम अहसान करने वालों को भूलते नहीं। हम उन्हें अपने खेत सौंपने की भी सोच रहे हैं। वे कहते हैं कि उनके बीज ज्यादा पैदावार देते हैं। थोड़ी गलतफहमी हो गई, इस वजह से कुछ हजार किसानों ने खुदकुशी जरूर कर ली, पर जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा। बड़े भाई ने भरोसा दिलाया है।

...और हां, जिस साम्यवाद की तुम बात करते थे, वो अब किसी की समझ में नहीं आता। हालांकि ऐसी बातें करने वाली कुछ पार्टियां बाकायदा मौजूद हैं। कुछ प्रदेशों में उनका शासन भी है। लेकन फिलहाल वे तुम्हारी तरह किसानों और मजदूरों के चक्कर में नहीं पड़ी हैं। वे एक कार कारखाने के लिए किसानों पर गोली चलाने से नहीं चूकतीं। कुछ ऐसे भी साम्यवादी हैं जो जंगलों में छिपकर क्रांति का सपना देख रहे हैं। पर न उन्हें जनता की परवाह है न जनता को उनकी। वैसे जिस रूसी क्रांति और लेनिन का तुम बार-बार जिक्र करते थे, वे अब भूली कहानी बन चुके हैं या फिर इतिहास में दर्ज एक मजाक।

6 जून 1929 को तुमने लियोनार्ड मिडिल्टन की अदालत में बयान दिया था कि "क्रांति से तुम्हारा मतलब है कि अन्याय पर आधारित मौजूदा व्यवस्था में आमूल परिवर्तन। धनिक समाज एक भयानक ज्वालामुखी के मुख पर बैठा रंगरेलियां मना रहा है और करोड़ों शोषित लोग एक भयानक खड्ड के कगार पर हैं, इसे बदलना होगा।"... तो समझ लो कि तुम्हारी बात सुनने वाला कोई नहीं है। भारत में जो कुछ हो रहा है वो भी आमूल परिवर्तन ही है।

... अगर तुम फिर से भारत में जन्म लेकर कुछ करने को सोच रहे हो तो भूल जाओ। कवि शैलेंद्र ने जब लिखा था कि "भगत सिंह इस बार न लेना काया भरतवासी की, देशभक्ति के लिए आज भी सजा मिलेगी फांसी की'...तब ये व्यंग्य लगता था। पर अब यही हकीकत है। मेरे इलाके के दरोगा देवीदत्त मिश्र इंस्पेक्टर बनना चाहते हैं। एक बड़े एन्काउंटर स्पेशलिस्ट की टीम में हैं। तुम अगर अपने पुराने सिद्धांतों पर अमल करते मिल गए तो गोली मारते देर नहीं लगाएंगे। अब अंगरेजी शासन नहीं है कि नाटक ही सही, मुकदमा चलाना जरूरी समझा जाए। मिश्रा जी तुम्हें मारकर शर्तिया प्रमोशन पा लेंगे।

इसलिए जहां हो, वहीं बैठे रहो। मुझे भी अब इजाजत दो। दरवाजे की घंटी बज गई है.... शायद पिज्जा वाला आ गया है।

तुम्हारा कोई नहीं

पंकज...

IBN7IBN7
IBNLiveIBNLive
IBNLive IBNLive

कमेंट्स

10

  
अपना कमेंट भेजें

नाम *

 

सिटी *

ईमेल *

     

कमेंट्स *


IBN7IBN7
IBN7IBN7

पंकज श्रीवास्तव के बारे में कुछ और

करीब 15 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय डॉ.पंकज श्रीवास्तव आईबीएन7 में एसोसिएट एडिटर हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इतिहास में डी.फिल करने के साथ उन्होंने मशहूर हिंदी दैनिक अमर उजाला से पत्रकारिता की शुरुआत की। पहले कानपुर और फिर लखनऊ ब्यूरो से जुड़कर उत्तर प्रदेश की राजनीति और दलित उभार पर विशेष रिपोर्टिंग की। 2003 की शुरुआत के साथ स्टार न्यूज की लॉन्चिंग टीम के हिस्सा बने। कुछ दिन वाराणसी और फिर चैनल का लखनऊ ब्यूरो संभाला। स्टार न्यूज में रहते हुए देश भर में घूम-घूम कर ट्रैवलॉग करने के लिए खासतौर पर पहचाने गए। सितंबर 2007 में सहारा के राष्ट्रीय न्यूज चैनल 'समय' की लॉन्चिंग टीम में शामिल हुए, जहां बतौर फीचर एडीटर और एंकर काम करने के बाद मार्च 2008 से आईबीएन7 में कार्यरत।
IBN7IBN7

IBN7IBN7

पिछली पोस्ट

  • + इतना कायर हूं कि उत्तर प्रदेश हूं...
  • + गांधी को क्यों बख्शा लालू जी!
  • + तलवार की धार पर पिता
  • + आज हम पैदा लिए थे
  • + बेशर्म एलियंस!

आर्काइव्स

IBN7IBN7

IBN7IBN7IBN7
देश|पॉलिटिक्स|सिटी|मनोरंजन|क्रिकेट|लाइफस्टाइल|फोटो|वीडियो|दुनिया|बिजनेस|खेल|ब्लॉग|CJ|धर्म-कर्म|अजब-गजब | स्पेशल|शो|लाइव स्कोर|News|Live TV
रीडर्स स्पेस|मुंबई न्यूज|आपका शहर|मैट्रो सिटी|क्राइम |बॉलीवुड |हॉलीवुड|टीवी|क्रिकेट|फैशन | रिश्ते|गैजेट्स |ऑटो |हैल्थ|ऑटो |RSS Feeds|Sitemap | Josh18
हमारे बारे में|डिस्क्लेमर|संपर्क करें | फीडबैक |Connect.in.com|Live Stock Market News|India's Premiere Technology Guide
© 2012 IBNkhabar.com India. सर्वाधिकार सुरक्षित
Disclaimer: TV18 Broadcast Limited is proposing, subject to market conditions and other considerations, an offer of its equity shares on rights basis and has filed a Draft Letter of Offer with the Securities and Exchange Board of India. The Draft Letter of Offer is available on the website of SEBI at www.sebi.gov.in and the websites of the Lead Managers at www.icicisecurities.com and www.rbs.in Investors should note that investment in equity shares involves a high degree of risk and are requested to refer to "Risk Factors" in the Draft Letter of Offer. The Equity Shares have not been and will not be registered under the US Securities Act of 1933, as amended (the "US Securities Act"), or any state securities laws in the United States and may not be offered or sold in the United States or to, or for the account or benefit of, "U.S. persons" (as defined in Regulation S under the US Securities Act) except in a transaction exempt from the registration requirements of the US Securities Act and in accordance with any applicable U.S. state securities laws.