अक्टूबर, 2008
न सास बहू सीरियलों जैसा तामझाम, न विजुअल इफेक्ट्स, न कानफाड़ू साउंड की कारीगरी, न कैमरा मूवमेंट, जूम इन जूम आउट का कोई खेल नहीं और फिर भी देश का नंबर वन सीरियल! न सेक्स से सराबोर आधुनिक जीवन शैली, न पश्चिमी सभ्यता के सपने दिखाने का अंदाज, न प्रचार का भोंडा तरीका, लेकिन फिर भी देश का नंबर वन सीरियल! कहीं लोग सठिया तो नहीं गए? मैं बात कर रहा हूं कलर्स पर आने वाले सीरियल बालिका वधू की...जिसमें न तो एकता कपूर का घटिया अंदाज दिखेगा और न ही आधुनिक पौराणिक कथाओं की झलक। ऐसे में यही सवाल उठता है कि एक क्रूर सचाई पर आधारित बालिका वधू सीरियल आज देश का नंबर एक सीरियल कैसे हो गया? सादा जीवन, सादे लोग, सादगी भरा परिवेश यही सब कुछ तो है बालिका वधू में। फिर ये सोचकर आश्चर्य नहीं होता कि लोगों ने इसे नंबर वन कैसे....









