फरवरी, 2009
गुजरात बीजेपी में मोदी की तूती बोलती है। यहां के बीजेपी नेताओं के राजनीतिक करियर की स्टेयरिंग मोदी के हाथों में है। इसलिए उनकी मर्जी के बिना यहां के नेता कोई कदम नहीं उठा सकते। ऐसे में वो सब लोग उनको खुश करने में लगे है जिन्हें लोकसभा का टिकट चाहिए। 2008 में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी को वाजपेयी और आडवाणी के कद के नेता के तौर पर देखा गया। फ़िर तो क्या था जो छवि बनी उसे मोदी और निखारते गए। इतना कम था कि नागपुर बैठक में उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात और महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया। मोदी ने \'नो-रिपीट\' थ्योरी का जो हथकंडा पिछले विधानसभा चुनावों में अपनाया था वही वो लोकसभा चुनाव में अपनाने जा रहे हैं। जिसने वर्तमान सांसदों की नींद हराम कर दी है। हर एक सांसद अपने आपको बेहतर उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की....

