मई, 2009
दरअसल इसबार के चुनाव नतीजे राजनीतिक पार्टियां तो छोड़िए आम लोगों की उम्मीदों से भी विपरीत आए। खासकर बीजेपी के लिए सबसे चौंकानेवाले नतीजे रहे। उस जमीं पर जहां पार्टी से ज्यादा मोदी की तूती बोलती है। नतीजों की अब समीक्षा होगी। हार के ठीकरा फोड़ने के लिए मोहरे तलाशे जाएंगे। समय-समय पर हरे जख्म भर जाते हैं। कुछ समय बाद वापस उसी रफ़्तार से बीजेपी राजनीतिक पटरी पर दौड़ने लगेगी। समीक्षा के नाम पर एनडीए की करारी हार के साथ बीजेपी के उन राज्यों को भी जोड़ा जा रहा है जिन राज्यों के मुखिया के विकास के कामों को चुनावी प्रचार का मुद्दा बनाया गया और वहीं बीजेपी कुछ खास नहीं कर पाई। उसमें गुजरात भी एक है। गुजरात यानी मोदी....गुजरात के नतीजे मोदी के गणित से बिलकुल विपरीत रहे। अबतक यह होता आया था की मोदी ने जो गणित पार्टी के आला नेताओं को गिनाए वो....









