सितंबर, 2009
14 सितम्बर की सुबह... गुजरात की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर में रोज के मुकाबले हलचल ज्यादा थी। उपचुनावों के आने वाले नतीजों के चलते हलचल के साथ वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में थोड़ी घबराहट भी थी। जैसे-जैसे घड़ी आगे बढ़ रही थी वैसे ही कार्यकर्ताओं की बेचैनी और बढ़ रही थी। दस बजे के आसपास थोड़ा स्पष्ट होने लगा की बीजेपी का घोड़ा रेस में आगे चल रहा है। वो भी एक नहीं पांच-पांच सीटों पर। यह रुझान जितने बीजेपी कार्यकर्ताओं और उनके नेताओं के लिए चौंकाने वाले थे उससे कई गुना ज्यादा कांग्रेस के लिए थे। चूंकि जसदन,देहगाम,दांता और चोटिला सीटों पर यह ट्रेंड बीजेपी के लिए कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के बराबर था। थोड़े समय बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा ही दी। मसलन सौराष्ट्र(सोरठ) की चार सीटें इस बार बीजेपी के खाते में आईं....
14 सितम्बर की सुबह... गुजरात की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर में रोज के मुकाबले हलचल ज्यादा थी। उपचुनावों के आने वाले नतीजों के चलते हलचल के साथ वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में थोड़ी घबराहट भी थी। जैसे-जैसे घड़ी आगे बढ़ रही थी वैसे ही कार्यकर्ताओं की बेचैनी और बढ़ रही थी। दस बजे के आसपास थोड़ा स्पष्ट होने लगा की बीजेपी का घोड़ा रेस में आगे चल रहा है। वो भी एक नहीं पांच-पांच सीटों पर। यह रुझान जितने बीजेपी कार्यकर्ताओं और उनके नेताओं के लिए चौंकाने वाले थे उससे कई गुना ज्यादा कांग्रेस के लिए थे। चूंकि जसदन,देहगाम,दांता और चोटिला सीटों पर यह ट्रेंड बीजेपी के लिए कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के बराबर था। थोड़े समय बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा ही दी। मसलन सौराष्ट्र(सोरठ) की चार सीटें इस बार बीजेपी के खाते में आईं....

