दोस्तो, मेरी आपसे यह आखिरी मुलाकात है। न जाने दोबारा आपसे मुलाकात हो पाए या नहीं। दरअसल चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सुरेंद्रनगर संसदीय क्षेत्र में मोदी ने इसी बयान से पब्लिक रैली को संबोधित किया। मोदी ने अपने भाषण में अचानक आखिरी मुलाकात की बात कहकर लोगों को सन्न कर दिया। लोग शुरू में समझ नहीं पाए कि मोदी यह क्या कह रहे हैं।
मोदी धीरे-धीरे बात लोगों के सामने रखते गए। मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने गुजरात दंगों को लेकर उन्हें जेल भेजने की साजिश बनाई है। 3 महीने के भीतर ही केंद्र सरकार मुझे गिरफ्तार करवा सकती है। दोस्तो, गुजरात के स्वाभिमान के लिए मैं बलि चढ़ने को तैयार हूं। जेल क्या गुजरात के लोगों के लिए मुझे फांसी पर भी चढ़ाया जाए तो गम नहीं। मैं पुनर्जन्म लेकर आपकी दोबारा सेवा करना चाहता हूं। मोदी ने जो भावनात्मक दांव खेला उसका असर तुरंत लोगों में दिखा। लोग नारा लगाने लगे मोदी जी हम आपको जेल नहीं जाने देंगे।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित गुजरात दंगों की जांच कर रही एसआईटी को दंगों मैं मोदी और उनके मंत्री की भूमिका की जांच करने के आदेश दिए। यह निर्णय उस समय आया जब गुजरात में चुनाव प्रचार में डेढ़ दिन ही बचा था। यह फैसला मोदी के लिए झटके के बराबर था। सुप्रीम कोर्ट की बात और वो भी दंगों से जुड़ी होने के चलते यह कयास लग रहे थे कि मोदी की मुश्किल अब बढ़ने वाली है वो न ही इस मामले पर बोलना पसंद करेंगे और न ही किसी विवाद में आएंगे। पर सभी आंकलन गलत साबित हुए। कहा भी जाता है कि मोदी मुसीबतों को अवसरों में तब्दील करने की काबिलियत रखते हैं।
मोदी ने चुनाव प्रचार के आखरी दिन इस मुद्दे को भावनात्मक रूप दिया जहां-जहां रैली करने गए हर जगह कहा कि यह उनके साथ आखिरी मुलाकात है। बात लोगों को उस हद तक छूने लगी कि उनके नेता को जेल भेजा जा रहा है। ऐसे हालत हम कभी नहीं होने देंगे। दरअसल इन चुनावों में मुद्दों का अभाव था और मोदी को मुद्दा मिल गया जिसे वो भुनाने में लगे थे। मोदी ने कहा की 7 साल तक गोधरा को लेकर मैं चुप रहा था अब चुप्पी तोड़ रहा हूं।
मोदी के यह बयान 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों की याद दिला रहे थे। मोदी के बचाव में पूरी पार्टी कूद पड़ी है। 'मोदी को जेल और क्वात्रोची को सैर'- ऐसे ढेर सारे एसएमएस भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं हर अखबार में फ्रंट पेज पर इश्तेहार दिए जा रहे हैं। मोदी को अपने वोट बैंक को वापस मजबूत करने का मौका जो मिल गया। शायद मुद्दों के आकाल में 'बरसात' ने फिजा बना दी। मोदी ने ऐसे संसदीय क्षेत्रों में रैलियां कीं जहां कांग्रेस का दबदबा रहा था। इन रैलियों ने हिन्दू वोट को एकजुट कर दिया।
बिलकुल वैसा जब 2002 के विधानसभा चुनाव के आखरी दिन मौलवी द्वारा जारी किए गए फतवे और पिछली बार मौत के सौदागर शब्द ने मोदी को संवार दिया। नतीजा दो तिहाई बहुमत! हालांकि इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा है। बावजूद इसके मोदी ने इसे कांग्रेस प्रेरित साजिश करार दिया। खासकर कपिल सिब्बल मोदी मिसाइल के निशाने पर रहे।
एसआईटी की जांच करने के तरीकों और जांच से होने वाले नफा नुकसान पर किसी और दिन बात करेंगे, फिलहाल अगर राजनीति की बात करें तो मोदी को मुद्दा मिल गया है जो अपने होम ग्राउंड पर तो ठीक से नहीं भुना पाए पर देखिए बाकी दो चरणों में मोदी इसी मुद्दे पर हावी रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मोदी ने जो दांव खेला है वो बीजेपी की सीटें बढ़ा सकता है। कितनी, कहना मुश्किल है पर यह जरूर है कि मोदी वापस विकासपुरुष के साथ-साथ हिन्दू ह्रदय सम्राट के तौर पर उभर रहे हैं। मोदी को यह मुद्दा थोड़े समय के लिए जरूर फायदा करा सकता है पर लम्बे वक्त के लिए यह भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है ऐसे में जब बीजेपी की दूसरी पीढ़ी उन्हें प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करने में लगी है।














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