समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की परेशानियां उनकी बौखलाहट में तब्दील हो गई हैं। शायद चुनावों में नतीजों का पूर्वानुमान उन्हें अभी से सता रहा है। पिछली बार 39 सांसदों को लोकसभा भेजने वाली समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष का आत्मविश्वास लगता है काफी डगमगा गया है।
नेताजी परेशान हैं लेकिन आज से नहीं चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तभी से। वह सबसे पहले बरसे मैनपुरी के जिलाधिकारी मिनिस्टी दिलीप पर। आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत से राज्य सरकार उनके कार्यकर्ताओं को सता रही है। और क्योंकि जिलाधिकारी महिला हैं इसलिए वो उन्हें माफ कर रहे हैं।
वोटिंग के दिन मुलायम का गुस्सा फिर सातवें आसमान पर था। वो भिड़ गए ओवजर्वर निलय नीतेश से। इस बार मुद्दा था राशन कार्ड। ओब्जर्वर का कहना था कि राशन कार्ड फर्जी है जबकि मुलायम का कहना था कि राशन कार्ड असली है क्योंकि इस पर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर हैं।
यहां के परसना क्षेत्र के दो बूथ संख्या 227 और 228 पर 11 मई को दोबारा वोट पड़े तो दलबल के साथ मुलायम यहां फिर पहुंच गए। इस बार एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें पोलिंग बूथ में जाने से रोका तो मुलायम आग बबूला हो गए।
काफी देर तक बवाल चलता रहा। जिसके बाद नेताजी और उनके समर्थकों पर मुकदमा दर्ज किया गया।
दरअसल मुलायम की परेशानी की बड़ी वजह रामपुर की सीट है। जहां रामपुर के शोले नाम की फिल्म अपने पूरे शबाब पर है। नाराज आजम खान को मनाने की सारी कोशिशें नाकाम होने के बाद जया प्रदा कई जगह रैली कर फूट फूट कर रोईं। आजम खान बोले- वो मुलायम के मुलाजिम नहीं है और मुलायम उनके बॉस नहीं।
रामपुर में शोले और भड़के और आरोप प्रत्यारोप के तीर और चले। समाजवादी पार्टी ने मानो इस सीट को अपनी इज्जत का सवाल बना लिया है। अल्पसंख्यक वोट सरकने के डर से मुंबई से अबू आजमी को इंपोर्ट किया गया। खुद मुलायम सिंह, अमर सिंह और लालू सरीखे नेता रामपुर में जयाप्रदा का प्रचार करते दिखे।
रामपुर के शोले शांत होती नहीं दिख रहे और मुलायम सिंह का गुस्सा भी इन शोलों की गर्मी के साथ बढ़ता जा रहा है। जाहिर है कि सपा के आला नेता ये मान चुके हैं कि उनकी लिए पिछली बार जीती हुईं 39 सीटें भी इस बार बनाए रखना दूर की कौड़ी है।
मतलब साफ है कि जितनी कम सीटें, दिल्ली की सत्ता में उतना ही कम दखल और भागेदारी। इन सबके मद्देनजर मुलायम सिंह यादव की बौखलाहट का मतलब साफ हो जाता है।








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