मई, 2009
मनमोहन सिंह की जीत के बाद राजनैतिक पंडितों के अपने-अपने आंकलन होंगे। ये कांग्रेस सरकार के काम की जीत है। ये राहुल गांधी के करिश्मे का कमाल है। ये क्षेत्रीय दलों से जनता की विरक्ति है। और भी न जाने क्या-क्या। लेकिन नतीजे आने के सिर्फ 12 घंटे बाद जो सबसे बेहतरीन आंकलन मैंने सुना, वह था एक आइसक्रीम वाले का- अरे साहब 'कचर-पचर' से मुक्ति मिल गई। चुनावी नतीजों की रात उस आइक्रीम वाले से यूं ही सवाल पूछ लिया था- क्या भाई! जानते हो अब इलेक्शन के बाद नया प्रधानमंत्री कौन होगा? एक सेकंड भी सोचे बिना उसका जवाब था- 'कचर-पचर' से आज़ादी मिल गई। जब उससे पूछा गया कि 'कचर-पचर' का मतलब? तो फिर दो टूक जवाब- अरे साहब, उन लोगों की छुट्टी हो गई जो बिना बात के चूं-चूं पीं-पीं करते रहते हैं। कचर-पचर। ये हिन्दी का न कोई शब्द है। ना ही मुहावरा। लेकिन....

