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Friday , May 29, 2009 at 17 : 50

वी आर भारतीय डाइनेस्टी पार्टी


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मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में 79 में से 19 मंत्री ऐसे हैं जिनके पिता या नजदीकी रिश्तेदार केन्द्र या राज्य की राजनीति के दिग्गज रहे हैं। यानी 25 फीसदी मंत्री राजनीतिक घरानों से हैं। इस बार तो ससुर-दामाद की जोड़ी ने भी बड़े गर्व से गलबहियां कीं और फैमिली फोटो खिंचवाई। दूसरी बार लगातार प्रधानमंत्री बन कर मनमोहन सिंह ने इतिहास रचा। अपने मंत्रिमंडल में डाइनेस्टी की इतनी बड़ी टीम जुटा कर भी।

इन सब राजनीतिक लाडलों को अशोक हॉल में एक साथ देख के लगा कि ये लोग दरअसल हिंदुस्तान की शान में इजाफा कर सकते हैं। 19 मंत्री, देश के विभिन्न राज्यों से। कश्मीर से कन्याकुमारी तक। मेघालय से राजस्थान तक। पंजाब से तेलगु प्रांत आंध्र प्रदेश तक। करुणानिधि के बेटे अझागिरी और नवासे दयानिधि। जतिन प्रसाद के बेटे जितिन। माधवराव के बेटे ज्योतिरादित्य और राजेश पायलेट के बेटे। सचिन के ससुर फारुख अब्दुल्ला। मूपनार के बेटे वासन। संगमा की बेटी अगाथा। कैप्टन अमरिन्दर सिंह की पत्नी परणीत कौर। खुर्शीद आलम के बेटे सलमान। दलबीर सिंह की बेटी कुमारी शैलजा। एनटीआर की बेटी पुरंदेश्वरी। प्रांत, मजहब, भाषा, विचारधारा - इन सब से कितनी ऊपर उठ चुके हैं ये लोग। सही मायनों में ये ही हैं सैक्यूलर और समतावादी भारत की असली तस्वीर।

इनकी संख्या को देख के लगा कि ये लोग राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई पार्टी बना सकते हैं। ऐसा हो तो तीसरे मोर्चे की नॉन-सीरियस, मुद्दाविहीन राजनीति की जरूरत ही न पड़े। डाइनेस्टी के ये वारिस अपने आप में किसी मोर्चे से कम नहीं होंगे। नई पार्टी का नाम भारतीय डाइनेस्टी पार्टी यानी बीडीपी हो सकता है। पार्टी का अपना मैनिफैस्टो होगा। इस मैनिफैस्टो में साफ साफ कहा जायेगा कि केवल डाइनेस्टी को ही तरजीह दी जायेगी।

क्या कहेगा बीडीपी का घोषणापत्र। अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट का बेटा ही उसकी कुर्सी संभालेगा। उसके पास मेडिकल की डिग्री हो या न हो। स्कूल के प्रिंसिपल का बेटा ही पिता के रिटायर होने पर उसकी गद्दी संभालेगा भले ही वो इंटरमीडियेट फेल हो। पीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर को भी ये हक दिया जायेगा कि वो दूसरे होनहार इंजिनियरों के काम और डिग्री को नजरअंदाज कर अपने कलाकार बेटे को अपनी कुर्सी विरासत में दे जाये ताकि वो भारत की सड़कों और भवनों के निर्माण कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। जजों को भी अपने परिवार से ही अपना उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार दिया जायेगा। वो चाहे तो जरूरी निर्देश भी जारी कर दे। यानी आम आदमी के सरोकार से जुड़े हर विभाग में डाइनेस्टी को ही आगे बढ़ाया जायेगा। फिर देखिये कैसे बदलती है हिंदुस्तान की तस्वीर। फिर देखिये किस नई बुलंदियों को छूता है हिंदुस्तान।

और सिर्फ सरकारी नौकरी में ही क्यों। दूसरे सेक्टरों में भी डाइनेस्टी पार्टी की छाप होगी। घोषणापत्र घरेलू सेक्टर में भी दखल देगा। शादीशुदा औरतें केवल खाना बनाएंगीं और बच्चों की देखभाल करेंगी क्योंकि यही उन्हें विरासत में मिला है।

पंजाब और दूसरे प्रांतो में भ्रूण हत्या को कानूनन सही ठहराया जायेगा। क्योंकि सदियों की विरासत यही सिखाती है। हर कीमत पर विरासत बरकरार रखी जायेगी।

बीडीपी मायानगरी मुंबई में खास तवज्जो देगी। शाहरुख खान के बेटे आर्यन को ही अब बॉलीवुड के नये बादशाह की उपाधि दी जायेगी। वो फुटबॉल खिलाड़ी बने तब भी। अभिषेक बच्चन और ऋतिक रौशन को आर्यन से टक्कर लेने के लिये अभी से अपनी कमर कसनी होगी। स्पॉट बॉय फिल्म निर्देशन या गीतकार बनने की सोचेगा तो उससे इसका टैक्स वसूला जायेगा। उसे स्पॉट बॉय ही रहना होगा। उसके बेटे को भी। क्योंकि यही तो डाइनेस्टी पार्टी की विचारधारा होगी। जो नहीं मानेगा वो अकेला पड़ जायेगा। और अकेला चना भाड़ नहीं भून सकता।

डाइनेस्टी पार्टी की विदेश और रक्षा नीति में भी परिवारवाद की छाप होगी। बीडीपी की सरकार बनी तो वो डाइनेस्टी को बढ़ावा देने वाले साम्राज्यों से ही दोस्ती करेंगे। पाकिस्तान के भुट्टो परिवार या जरदारी से दोस्ती पर खास तवज्जो दी जायेगी। फिर कश्मीर समस्या चुटकी में सुलझ जायेगी। तालिबानी लाहौर से ही वापस स्वात लौट जायेंगे, सीमा पार कर भारत कूच करने का इरादा छोड़ देंगे। नॉर्थ कोरिया की किम सुंग परिवार से भी अच्छे रिश्ते कायम होंगे। हिंदुस्तान और बलशाली बनेगा क्योंकि नॉर्थ कोरिया जब पाकिस्तान और चीन की मदद से न्यूक्लियर बम बनायेगा तो कुछ भारत को भी बेचेगा या उसे भी नई तकनीक से रू-ब-रू करवायेगा। फिर चीन खिलौने बेच के भारत के बाजार पर आंख नहीं गड़ायेगा और अरुणाचल की जमीन वापस कर देगा। यानी अखंड भारत का सपना साकार होगा।

जब मनमोहन 1991 में वित्त मंत्री थे तो आर्थिक उदारवाद की क्रांतिकारी नीति के जरिये उन्होंने भारत को दिशा दी, उसकी दशा सुधारी। आज भी मनमोहन ने अपनी कैबिनेट में राजनीतिक लाडलों की भीड़ लगा कर जाने-अनजाने ही सही एक क्रांतिकारी सोच, एक क्रांतिकारी पार्टी की नींव रख दी है।

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