पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का इन दिनों कुछ अता-पता नहीं है। यह आलम तब से है जब से पाकिस्तानी पत्रकार अरुसा आलम भारत आई हैं। कैप्टन की दोस्त अरुसा पिछले हफ्ते ही अटारी बॉर्डर से सड़क के रास्ते भारत में दाखिल हुईं और सीधा दिल्ली निकल गईं। तभी से कैप्टन साहब का भी कुछ अता-पता नहीं है। अमरिंदर के बेहद नजदीकी सूत्रों की मानें तो कैप्टन साहब अपनी दोस्त अरुसा के साथ हिमाचल की हसीन वादियों में निकल गए हैं।
शायद सोलन में अपने डोची फार्म पर या फिर मनाली में। अटकलें यह भी हैं कि अमरिंदर अरुसा के साथ दिल्ली में अपने किसी गुप्त ठिकाने पर हैं। खैर अरुसा के भारत में आते ही कांग्रेस पार्टी ने खतरे की घंटी बजा दी। खासतौर से कांग्रेस की आलाकमान अरुसा के भारत आने से काफी खफा हैं। खबर तो यहां तक है कि कांग्रेस हाईकमान ने अमरिंदर तक यह सन्देश भिजवाया है कि लोकसभा चुनावों तक अरुसा पंजाब में दाखिल न हों।
इससे पहले अरुसा जब भी भारत आती तो पटियाला में अमरिंदर के मोतीबाघ महल में जरूर ठहरती थीं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। अरुसा का नाम जब-जब अमरिंदर सिंह के साथ जुड़ा तब-तब कांग्रेस को पंजाब में मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस की विरोधी पार्टियों का तो यहां तक आरोप है कि अरुसा I. S. I की एजेंट हैं और अमरिंदर को अपने पाकिस्तानी आकाओं के लिए उपयोग कर रही हैं।
अब तो लोकसभा चुनाव भी नजदीक हैं। ऐसे में अरुसा का भारत में आना और अमरिंदर का अचानक गायब हो जाना पंजाब कांग्रेस के लिए कुछ ठीक इशारा नहीं है। यह तब है जब खुद पंजाब सरकार चला रही शिरोमणि अकाली दल और भाजपा विपक्ष को चुनाव में घेरने के लिए रणनीति बना रही हैं।
इस सारे मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि अमरिंदर सिंह जो कुछ भी कर रहे हैं वो पंजाब की संस्कृति के खिलाफ है। साथ ही जिस तरह के नाजुक हालात आजकल भारत और पाकिस्तान के बीच बने हुए हैं ऐसे में एक राजनेता द्वारा इस ढंग से व्यवहार करना शोभा नहीं देता।
पंजाब की सत्ताधारी दोनों पार्टियां लोकसभा चुनावों में अमरिंदर के इस बर्ताव को चुनावी मुद्दा जरूर बनाएंगी। खैर कांग्रेस की आलाकमान ने हाल ही में पंजाब के लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए जो स्क्रीनिंग कमेटी तैयार की है उसमें राजिंदर कौर भट्टल और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहिंदर सिंह केपी का नाम तो है पर अमरिंदर को इससे बाहर रखा गया है।
पंजाब कांग्रेस के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर यह तक कह डाला कि अब वक्त आ गया है जब अमरिंदर सिंह को यह तय करना है कि उन्हें पार्टी के साथ रहना है या अरुसा के साथ। इस बीच अमरिंदर की कुछ मुसीबतें और बढ़ गई हैं। पहले उनके और बेटे रनिंदर के खिलाफ विजिलेंस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया और अब अमरिंदर को दूसरा झटका सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है। कोर्ट ने अमरिंदर सिंह की पंजाब विधानसभा से सदस्यता ख़त्म करने के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
वैसे इस बात की दाद देनी पड़ेगी कि इतने पचड़ों में घिरे रहने के बावजूद अमरिंदर बड़ी शांति से अपने दोस्तों के साथ आउटिंग का समय निकाल लेते हैं। शायद राजा साहब लोकसभा चुनावों के लिए पसीना बहाने से पहले कुछ रिलेक्स कर लेना चाहते हैं।














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