एक हाई प्रोफाइल बच्चे की छुट्टी अचानक कैंसिल हो गई! बच्चा छुट्टी कैंसिल होने से बहुत परेशान था। परेशान इतना कि जाते-जाते अपनी मां को एक ऐसी चिट्ठी लिख कर गया कि पत्थर दिल इंसान का दिल भी पसीज जाए। कहानी शुरू करने से पहले चिट्ठी के कुछ अंश भी जरूर पढ़ लें- \"मां ये मीडिया वाले मुझे यहां जीने नहीं देंगे। इस लिए मैं वापस जेल जा रहा हूं। न जाने अब मैं दुबारा आपको कब देखूंगा!\"
ये गले को रुंध देने वाले शब्द किसी और के नहीं बल्कि जेसिका लाल के हत्यारे मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ वशिष्ठ की उस चिट्ठी के हैं जो मनु ने अपनी छुट्टी, माफ कीजिए, पेरोल के बीच में जेल जाने से पहले लिखी। मनु ने ये चिट्ठी अपनी मां को लिखी है उसी बीमार मां को जिस के लिए वो जेल से दो महीने के लिए बाहर आया था। लेकिन सुकून की बात ये है कि मां शक्ति रानी शर्मा अब ठीक हैं। वो बीमार नहीं है, बल्कि अपने पति विनोद शर्मा के चुनाव प्रचार और जीत के जश्न में भी जा रही हैं।
हाल ही में एक क्रिकेट टूर्नामेंट की प्रेस कांफ्रेंस भी अटेंड की है लिहाजा क्यों न दिल्ली में जा कर किसी बार में कोई पार्टी अटेंड की जाए? बस मनु के यही ख्वाहिश उसकी छुट्टियों की बैरी बन गई। न बेचारा मनु दिल्ली के नामी bars में जाता न वहां जा कर दोस्त के साथ हल्ला करता और न ही उसकी छुट्टियां बीच में कैंसिल होतीं। वैसे मनु ने ये छुट्टियां अपना कारोबार बढ़ाने, अपने सामाजिक रिश्ते मजबूत करने, अपनी बूढ़ी मां से मिलने और अपनी स्वर्गवासी दादी के अंतिम कर्मकांड के लिए ली थी।
एक महीने में यह सब निपट गया और एक महीने की छुट्टी भी खत्म होने वाली थी कि अचानक दिल्ली सरकार को याद आया कि मनु के बगैर उसका कारोबार मंदा पड़ता जा रहा है लिहाजा कारोबार की देखभाल के लिए मनु की छुट्टी एक महीना और बढ़ा दी गई लेकिन कारोबार की जगह मनु की मस्ती की खबर आते ही बेचारे मनु की मुश्किल तो बढ़ीं ही साथ ही दिल्ली सरकार को भी थोड़ी सी शर्म आ गयी।
शर्म मनु की वजह से नहीं शायद तिहाड़ के उन सैकड़ों कैदियों की अर्जियों की वजह से जिनमें से कइयों ने मनु से कम खतरनाक अपराध किए थे और जिनमें से कई अपने अजीजों के अंतिम संस्कार के लिए सरकार से दो दिन की पेरोल मांग रहे थे। लेकिन दिल्ली में तो पेरोल देने के नियम सख्त हैं ऐसे में किसी ऐरे-गैरे को पेरोल कैसे मिल सकती है अरे मनु की बात कुछ और है। मनु तो बेचारा हालात का मारा है।
वो तो ऐसे हालात देश की जनता और मीडिया ने उसके लिए पैदा कर दिए, नहीं तो पैसे और रसूख के बल पर मनु पहले ही जेसिका की हत्या के मामले से बच निकला था और अब अन्दर गया भी तो पिताजी का पैसा और रसूख कब काम आयेगा। अरे देश के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, हरियाणा के सबसे कद्दावर कांग्रेसी नेता हैं, क्या दिल्ली में उनकी इतनी भी न चले कि अपने बेटे को किसी भी बहाने से जेल से छुट्टी दिलवा पाएं?
खैर मनु ने इस बार एक बड़ा सबक लिया है। कम से कम अगली बार तो वो जेल से बाहर छुट्टी आने से पहले अपना पूरा बंदोबस्त करके आएगा और अगली बार तक दिल्ली में अगर कांग्रेस की सरकार रही तो शायद सरकार भी यह ख्याल रखेगी कि एक हाई प्रोफाइल बच्चे को अगर जेल से छुट्टी दी जाए तो ऐसा न लगे कि उसके साथ पक्षपात किया गया है या फिर किस तरीके से इस बच्चे की छुट्टी मीडिया और जनता से छुपा कर रखी जाए।














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