जिस सचिन तेंदुलकर का देश दीवाना है उन्हें भी दीवानगी की इस हद तक आने में बीस साल लगे। लेकिन तीन साल पहले तक जिस ललित मोदी के बारे मुल्क ने न ज्यादा सुना, न पढ़ा और न शायद गौर से देखा होगा आखिर कैसे वो फटाफट क्रिकेट के अवतारपुरुष बन गए। डर है कि देश की जनता अभी भी मोदी से पूरी तरह वाकिफ नहीं है। मोदी ने क्रिकेट की पिच पर बैट और बॉल को छुए बिना कितने छक्के लगाए, कितने विकेट लिए या आईपीएल में कैसी कप्तानी की, इससे भी अहम ये है कि मोदी देश में अपनी तरह के शायद इकलौते ऑलराउंडर हैं, आप कपिल देव से तुलना मत कीजिएगा। मोदी एक ऐसे ऑलराउंडर है जिन्होंने 20-20 में जितनी शौहरत और विवाद बटौरा उतना ही सियासत और बिजनस में भी।
मोदी से राजस्थान का परिचय देश में सबसे पहले हुआ। ललित मोदी को ठीक से समझने के लिए आपको राजस्थान से ही शुरुआत करनी पड़ेगी। 2008 में राजस्थान विधानसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस का मुद्दा था मोदी। चुनाव घोषणा पत्र लीजिए, चुनाव कैंपेन लीजिए या अशोक गहलोत की चुनावी स्पीच। सब जगह मुद्दा था मोदी। जिस तरह से मोदी के विरोधी आज नारा दे रहे हैं कि मोदी भगाओ क्रिकेट बचाओ, ठीक उसी तरह कांग्रेस का नारा था- मोदी भगाओ राजस्थान बचाओ, मोदी भगाओ भष्ट्राचार मिटाओ, मोदी मदिरा और मुद्रा-। आप हैरान होंगे कि आखिर कांग्रेस के टारगेट पर मोदी क्यों थे। इस सवाल के जबाब में ही मोदी नाम के ब्रांड की पहचान छुपी है। महारानी के राज में जयपुर में देशभर के रियल स्टेट के निवेशकों की बाढ़ आई तो नाम आया मोदी का। जयपुर समेत राज्य में अचानक जमीनों की कीमतें आसमान में पहुंच गईं तो नाम आया मोदी का। जयपुर में सेज को लेकर वसुंधराराजे सरकार में घमासान मचा तो नाम आया मोदी का। महारानी के खिलाफ मंत्रियों ने ताल ठोककर हटाने की मुहिम शुरू की तो निशाने पर थे मोदी। बीजेपी में महारानी विरोधी कैंप ने हाईकमान की शिकायत की तो वो भी मोदी को लेकर। जब सवाई मानसिंह स्टेडियम को सरकार ने लीज पर दिया तो नाम आया मोदी का।राजस्थान की हैरिटेज की बोली लगने लगी तो नाम आया मोदी का। जयपुर के आमेर महल के चारों ओर की हवेलियों को खरीदने के लिए सरकारी धमकियां और जबरन कब्जे का मुद्दा गरमाया तो नाम आया मोदी का।
खुद मोदी ने अपनी पत्नी मीनल मोदी के नाम पर आमेर के पास एक हैरिटेज हवेली भी खरीदी थी। अशोक गहलोत का तो जुमला था कि महारानी की सरकार पांच सितारा होटल रामबाग से चलती है जो मोदी का अस्थायी आशियाना था जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे और कांग्रेस को बहुमत नहीं मिल रहा था तब भी कांग्रेस को डर मोदी का ही था। मोदी राजस्थान में अकेले कांग्रेस के ही टारगेट पर नहीं थे, बीजेपी में वसुंधराराजे की विरोधी लॉबी के निशाने पर भी थे मोदी। यानी 2003 से 2008 तक पांच साल में राजस्थान में खड़े हुए ज्यादातर बवंडर में मोदी का नाम जो़ड़ा गया या जुड़ गया।
राजस्थान की सत्ता के गलियारों में कहावत थी कि पॉलिटिशियन, ब्यूरोक्रेसी और बिजनसमैन महारानी के अलावा किसी के सामने सजदा करते थे तो वो थे मोदी। कांग्रेसी मोदी का मतलब शैडो सीएम निकालते थे। मोदी नाराज तो फिर कुर्सी खतरे में। जयपुर के एक पांच सितारा होटल में जब लालबत्ती की कतार लगती तो ये माना जाता कि मोदी आ गए।
पॉलिटिशियन लालबत्ती और सरकार के आशीर्वाद के लिए मोदी के दरबार में आरती में करने जाते थे। मोदी से राजस्थान का पहला परिचय हुआ जब 2003 में सूबे की बागडोर वसुंधराराजे ने थामी। मोदी का राजस्थान में सबसे बड़ा परिचय है वसुंधराराजे के दोस्त, सलाहकार और महारानी की पूर्व सरकार के इंजन। मोदी की राजस्थान में पहचान आरसीए के प्रेसिंडेट से भी ज्यादा ऐसे शख्स के रूप में है जिसकी सूबे में पांच साल तक सत्ता थी। जब वसुंधराराजे की सरकार गई तो मोदी की सत्ता भी। मोदी की राजस्थान में भी दो तरह की इमेज है- एक राजस्थान में क्रिकेट के एंपायर को जमीन से बुलंदी पर पहुंचाने वाले जादूगर की। दूसरी विवादों और आरोपों से घिरे मोदी की। राजस्थान में महारानी के राज में विकास या फिर भ्रष्टाचार के विकास पर जब भी बहस शुरू होती है तो वसुंधराराजे के साथ मोदी का नाम लोग जरूर लेते हैं।
मोदी ब्रांड राजस्थान में सत्ता के गलियारों के साथ सूबे की क्रिकेट की सियासत में भी खूब चमका। लेकिन यहां भी विवाद साथ चले। पहला विवाद अपना नाम बदलकर राज्य में एक जिला एसोसिएशन का चुनाव लड़ने को लेकर। आज भी मोदी के विरोधी चटखारे लेकर कहते हैं कि मोदी का असली नाम ललित मोदी है या फिर ललित कुमार। क्योंकि आरसीए प्रेसिडेंट बनने के लिए नागौर जिला संघ का चुनाव ललित कुमार के नाम से लड़ा था तब आरसीए की कुर्सी के लिए नागौर में फर्जी तरीके से जमीन खरीदने के आरोप भी लगे।
मोदी से डर का अंदाजा देखिए कि महारानी के सत्ता से बाहर होने के बाद आरसीए के चुनाव हुए तो प्रेसिडेंट के चुनाव में एक ओर मोदी थे तो दूसरी ओऱ सामने संजय दीक्षित के साथ थी गहलोत सरकार। यानी पिछले सात साल से राजस्थान में क्रिकेट से लेकर सियासत में मोदी चर्चा में है। मोदी की राजस्थान से शुरू हुई ये ब्रांड इमेज आईपीएल कमिश्नर बनने के बाद भी जारी है। राजस्थान की तरह आईपीएल में भी मोदी ब्रांड जमकर चमका लेकिन विवाद और आरोप भी उतने ही बड़े है जितना मोदी का आईपीएल ब्रांड।
मोदी अब एक एंपायर का नाम है, लेकिन सवाल ये कि इतने कम वक्त में ये एंपायर कैसे खड़ा हुआ। पूरा देश इस चमात्कार की कहानी को जानना चाहता है। एक और बात है मोदी चाहे जितने आरोपों से घिरे हों लेकिन एक करामात शायद केवल मोदी में है, वो है कम वक्त में इतना बड़ा काम करके दिखाना जिसके बारे में सोचना भी मुश्किल होता। इसी वजह से मोदी विरोधियों पर भारी रहे। इसी वजह से बहुमत उनके पीछा खड़ा होने का मजबूर रहा।














कमेंट्स
6