मार्च, 2009
जम्मू-कश्मीर राज्य में आने वाले लोकसभा चुनाव एक नए अंदाज़ मे होंगे। राज्य के राजनीतिक हालात पर नज़र डाली जाये तो ऐसा लगता है कि अब की बार लगभग सारे राजनीतिक दल दिग्गजों के बजाए नये चहरे मैदान में उतारने के मिजाज़ में दिख रहे हैं। कांग्रेस की बात करें तो गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज़ जैसे दिग्गज नेता दल को मजबूत करने के काम मे जुटे हैं जिससे इस बात का संकेत मिलता है कि अब की बार कांग्रेस कुछ एक नेताओं को छोड़ नए खिलाड़ियों को चुनावी रणभूमि में उतारने की सोच रही है। वहीं, नैशनल कॉन्फ्रेंस भी इसी रास्ते पर चलती दिख रही है। दल के दिग्गज नेता और पार्टी प्रमुख फारूख अब्दुल्ला पहले ही दिल्ली का रुख कर चुके हैं। उमर अब्दुल्ला ने राज्य की कमान संभालकर यह बात साफ कर दी कि वो राज्य में अपने दल की जड़ों को और मजबूत करने....
क्या लोकसभा चुनाव में भी वही जोश देखने को मिलेगा, बिजली-पानी-सड़क से आगे बढ़कर अब लोग क्या चाहते हैं, क्या लोग अब अमन शांति के लिया वोट करेंगे, क्या कश्मीर विवाद के हल के लिए वोट करेंगे या फिर मतदाता दूर से ही तमाशा देखेंगे या फिर बिजली-पानी-सड़क का नारा बुलंद होगा। विधानसभा चुनाव की लम्बी-लम्बी कतारों में ठंड से ठिठुरते मतदाता, फारन के अंदर कांगड़ी लिए मर्द, मुंह ढाके हुए औरतें और आंखों में उम्मीद लिए युवा बिजली-सड़क-पानी की बात करते दिखे। लोगों ने सब भुलाकर अपनी रोज़ मर्रा की मुसीबतों को दूर करने के लिया वोट दिया। सारे सियासी मुद्दों पर इनके ये मुद्दे भारी पड़े। इन चुनावों के नतीजे सबको चौंका देने वाले थे। इस बार का मतदान राज्य में पिछले बीस साल से जब से हालात बिगड़े और आतंकवाद ने अपना जाल फैलाया तब से लेकर आज तक सबसे ज्यादा रहा। इन....









