अक्टूबर, 2009
जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल जारी है जिसके नतीजे में कश्मीर के सारे सरकारी अस्पतालों में मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। आपातकालीन सेवा भी प्रभावित हुई है। पिछले कई दिनों से श्रीनगर के बड़े अस्पतालों में होने वाले ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं। इस खराब सूरतेहाल का सामना कश्मीर की गरीब जनता कर रही है। पैसे वाले तो अपने लिये कोई भी सुविधा खरीद सकते हैं लेकिन गरीब अवाम की तो एक ही उम्मीद सरकारी अस्पताल होता है। इन सरकारी अस्पतालों में ऐसे भी मरीज हैं जिन्हें डॉक्टरों की लगातार तवज्जो की ज़रूरत रहती है जो दर्द से मर भी सकते हैं। ऐसे मरीज भी होते हैं जिनका ऑपरेशन फ़ौरन करना होता है लेकिन अस्पतालों मे डॉक्टरों के न होने का मतलब है कई मरीजों की ज़िन्दगी से खिलवाड़। डॉक्टरी का पेशा तो अजीम होता है, एक आम आदमी को खुदा के बाद सहारा होता....









