अब तक कश्मीर में दो लोकसभा चुनाव क्षेत्र के लिए वोट डाले गए। सरकार ने मतदान को शांतिपूर्वक कराने के लिए कड़े इंतज़ाम किए। चुनाव में शामिल नेताओं और राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार करने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगाया वहीं अलगाववादी नेताओं ने रुकावटों के बावजूद चुनाव बहिष्कार मुहिम चलाकर लोगों के बहिष्कार के लिए कायल करने के लिये हर मुमकिन कोशिश की।
मतदान के दौरान मौसम सुहाना रहा मगर जो जोश विधानसभा चुनाव में था वो इन चुनावों में नहीं दिखा। कई इलाकों में जमकर मतदान हुआ लेकिन यह भी सच है कि कई इलाकों में मतदान केंद्र पर सन्नाटा ही छाया रहा। चुनाव के दिन शाम को चुनाव कमिशन ने वोटिंग पर्सेंटेज बताई जो पिछले लोकसभा चुनाव से ज्यादा थी। अनंतनाग मे 26 फीसदी और श्रीनगर में 24 फीसदी रही। फ़ौरन हुर्रियत के दोनों धड़ों ने बड़ी ख़ुशी का इज़हार करके चुनाव बहिष्कार काल की कमयाबी का ऐलान किया और लोगों को मुबारकबाद पेश की।
जिहाद काउंसिल ओर बाकी मिलिटेंट संगठन ने बयानात जारी करके लोगों का शुक्रिया अदा किया और मुबारकबाद दी। हुर्रियत नवाज़ कलमकारों ने इस बारे में खूब लिखा भी वहीं न्यूट्रल कलमकारों ने मतदान में कमी की कई वजह बताईं लेकिन उनकी दलील को रद्द करके यह ही कहा गया की लगभग 70 फीसदी लोगों ने चुनाव बहिष्कार का साथ दिया।
पहला सवाल उठता है कि क्या इसे 100 फीसदी बहिष्कार समझा जाए और अगर समझा भी जाए तो इससे क्या साबित हुआ और भारत पर इसका क्या असर पड़ा या मसला कश्मीर को इससे क्या फ़ायदा हुआ। ये बात जो सोचने वाली है कि इस बार मतदान 2004 लोकसभा चुनाव के मुकाबले से 10 फीसदी ज्यादा हुआ तो क्या अलगाववादी नेताओं के हिमायतियों में 10 फीसदी की कमी हुई और हिमायत के ग्राफ में कमी होने की यह रफ़्तार इतनी कम भी नहीं है कि जिसे नज़रअंदाज़ किया जा सके।
दूसरी बात यह कि 70 फीसदी लोगों का वोट न डालने के बावजूद चुनाव मुकम्मल हुआ जिसके खिलाफ चुनाव बहिष्कार किया गया था। इसके नतीजे में एक उम्मीदवार कामयाब होगा जो भारत की लोकसभा में जाकर इस क्षेत्र की नुमाइंदगी करेगा। फिर बहिष्कार से ऐसा क्या हुआ जिसे यह साबित हो की जम्मू-कश्मीर में लोग ने चुनाव को नहीं माना।
यह बात भी बहस के काबिल है। हाल ही में उधमपुर लोकसभा क्षेत्र में 45 फीसदी मतदान हुआ। लोकसभा चुनाव में 45 फीसदी मतदान भी बहुत होता है। हुर्रियत ने इस पर भी लोगों को मुबारकबाद दी कि उन्होंने बहिष्कार का साथ दिया। फिर उन्हें भारत के उन राज्य के लोगों को भी मुबारक देनी चाहिए जहां इससे कम मतदान हुआ। उधमपुर, जम्मू और लद्दाख, जम्मू-कश्मीर का ही हिसा हैं और जब सारी जगह मतदान मुकम्मल होगा तो चुनाव की कुल पर्सेंटेज निकाली जाएगी जो बहिष्कार के बावजूद लगभग 50 फीसदी दिख रही है।
हम अपने घरों मे बैठकर कुछ भी नया सोचने के लिए आजाद हैं लेकिन भारत के बाहर जिन देशों में अलगाववादी कश्मीर मसले की हिमायत की उम्मीद लगाए बैठे हैं और जिन्हें यह बताना चाहते हैं कि चुनाव बहिष्कार काल पर अमल होता है वहां दावों का नहीं पर्सेंटेज का जायजा होगा। और वो पर्सेंटेज साबित करेगी कि जम्मू-कश्मीर में लोग चुनाव मे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहते हैं।
अलगावदी कहते हैं कि दुनिया को यह साबित करने के लिए बहिष्कार करते हैं कि जम्मू-कश्मीर चुनाव का हिस्सेदार नहीं है लेकिन क्या वो साबित हो पाता है, क्या यह सोच की गलती है यह फिर कुछ और......














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