मार्च, 2009
लोकसभा चुनाव में नेताओं की हार जीत का फैसला वोटरों के साथ-साथ पार्टी के विभीषणों पर भी टिका है। खासकर जम्मू-कश्मीर में इस समय ऐसी उथल-पुथल मची है कि किसी भी नेता पर यकीन नहीं किया जा सकता है कि वह पार्टी के घोषित उम्मीदवार के साथ चलेगा या फिर उसके खिलाफ। कहते हैं कि अगर विभीषण श्री राम की मदद न करता तो रावण को हराना आसान न होता। रावण की कमजोरियों का पता विभीषण को भलीभांति था। उसी की मदद से रावण का संहार आसान हुआ था। यही हाल संसदीय चुनाव का भी है, यहां भी कई नाराज नेता अपनी ही पार्टी की नैया को डुबोने में लगे हुए हैं। पार्टियों के कई नेता अपने ही उम्मीदवारो के खिलाफ साजिशें रचना शुरू कर दिया है ताकि पार्टी को यह सबक सिखाया जाए कि उन्होंने उम्मीदवार का चयन सही नहीं किया है। खबर यह भी है कि कुछ....
राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 1 से 11 तक का सफर तय किया। राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि बीजेपी को इतनी ज्यादा सीटें यहां पर मिली हों। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीजेपी को लोकसभा चुनावों में सफलता मिल पाएगी, क्या पार्टी का कमल यहां पर खिलेगा? जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने इस मुद्दे के हीरो रहे लीलाकरन शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाकर एक नया पैंतरा खेला है लेकिन पार्टी की इस कोशिश का विरोध शुरू हो गया है। बाबा अमरनाथ मुद्दे को भुनाकर बीजेपी के 11 विधायक विधानसभा पहुंचने में सफल हो गए और अगर हम बात करें कि जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट और उधमपुर-कठुआ लोकसभा सीट पर बीजेपी कब्जा कर पाएगी या नहीं तो अभी कुछ कहना बड़ा मुश्किल होगा क्योंकि हाल ही में राज्यसभा चुनावों में बीजेपी के एक विधायक ने विपक्षी पार्टी को अपना वोट डाल दिया जिससे बीजेपी....
बीते दिनों उमर अब्दुल्ला जब विधानसभा में बजट सत्र के बाद सवालों का जवाब देने के लिए उठे तो पूरे हाल में पिन ड्रॉप साइलेंस हो गया। उमर सब पर भारी पड़ते दिखे। हालांकि यह बजट सत्र कम अविधि का था लेकिन ऐसा लगता है कि उमर पूरी तैयारी करके आए थे। कई बार तो ऐसा भी लगता है कि वह पिछले एकाध साल से ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद जवाब देने की तैयारी कर रहे थे। पीडीपी के तेजतर्रार नेता अब असहाय से नजर आ रहे हैं जो पहले विपक्षी पार्टी पर शेरों की तरह बरसते थे। कोई सोच नहीं सकता था कि जिस पार्टी की सरकार यहां पर एक अर्से तक चली हो। वह एकाएक विपक्ष में आ बैठेगी। यहां तक उसका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी हार गया हो। यह बात है 2002 के विधानसभा चुनावों की। चलो किसी तरह से....









