अक्टूबर, 2009
जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रवाद की राजनीति इस कदर हावी हो गई है कि जम्मू और कश्मीर के नेता अपनी-अपनी रोटियां सेंकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। बात चाहे अमरनाथ भूमि मुद्दे की हो या फिर सैंट्रल यूनिवर्सिटी की। हर पार्टी अपने वोट बैंक को लेकर राजनीति की विसात बिछाने में लग जाती है। अभी एक साल पहले अमरनाथ की भूमि का मुद्दा जम्मू और कश्मीर में एक ज्वलंत मुद्दा बन गया था। दोनों ही जगहों के नेताओं ने अपने-अपने तरीके से लोगों को खूब भरमाया लेकिन विधानसभा चुनावों के बाद सब नेता भूल गए और तीन महीने चले आंदोलन के जख्म पीछे छोड़ गए। जम्मू और कश्मीर में आंदोलन के दौरान कई जानें गईं। कई युवा पुलिस की गोली का शिकार बने और कईयों ने जज्बात में आकर आत्महत्या कर ली लेकिन आज इनके परिवारों को कोई नहीं पूछ रहा है। अब सैंट्रल यूनिवर्सिटी का....









