बीते दिनों उमर अब्दुल्ला जब विधानसभा में बजट सत्र के बाद सवालों का जवाब देने के लिए उठे तो पूरे हाल में पिन ड्रॉप साइलेंस हो गया। उमर सब पर भारी पड़ते दिखे। हालांकि यह बजट सत्र कम अविधि का था लेकिन ऐसा लगता है कि उमर पूरी तैयारी करके आए थे।
कई बार तो ऐसा भी लगता है कि वह पिछले एकाध साल से ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद जवाब देने की तैयारी कर रहे थे। पीडीपी के तेजतर्रार नेता अब असहाय से नजर आ रहे हैं जो पहले विपक्षी पार्टी पर शेरों की तरह बरसते थे।
कोई सोच नहीं सकता था कि जिस पार्टी की सरकार यहां पर एक अर्से तक चली हो। वह एकाएक विपक्ष में आ बैठेगी। यहां तक उसका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी हार गया हो। यह बात है 2002 के विधानसभा चुनावों की। चलो किसी तरह से यह पार्टी 6 साल तक विपक्ष में बैठी तो।
पीडीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी तो वही दिल्ली का आशीर्वाद सिर पर था। बड़ी मुश्किल से इस पार्टी ने 6 साल काटे। जी हां, हम बात कर रहे हैं डॉ. फारूख अब्दुल्ला की पारिवारिक पार्टी यानी नैशनल कॉन्फ्रेंस की। पहले शेख साहब फिर डॉ. फारूख और अब युवा उमर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं।
लेकिन नैशनल कॉन्फ्रेंस को इस बार भले ही कांग्रेस से हाथ मिलाना पडा और उमर साहब को कुर्सी मिली लेकिन इसके पीछे है..जय हो यानी बम बम भोले। अमरनाथ श्राईन बोर्ड की जमीन का मुद्दा नैशनल कॉन्फ्रेंस को कुर्सी तक ले आया। हालांकि यह मुद्दा उठाया था मुफ्ती मोहम्मद सईद की पार्टी पीडीपी ने लेकिन वोट बैंक बना बीजेपी का और कुर्सी मिली नैशनल कॉन्फ्रेंस को।
अमरनाथ मुद्दे को लेकर कश्मीर में बवाल हुआ तो पीडीपी ने अच्छी तरह से इस मुद्दे को जम्मू विरोधी और धर्म विरोधी कह कर अपने वोट पक्के किए। बीजेपी ने इसे जम्मू प्रांत मे खूब भुनाया लेकिन असर पड़ा कांग्रेस पर। कांग्रेस के जम्मू प्रांत के कई दिग्गज हार गए। उनकी जगह पर जीते बीजेपी के लोग और फायदा ले गई नैशनल कॉन्फ्रेंस।
जम्मू-कश्मीर में इतिहास रचा गया। सबसे युवा मुख्यमंत्री राज्य को मिला। अब बारी है विपक्ष मे बैठने की पीडीपी की। अभी पहला विधानसभा का सत्र चल रहा है और इसमें साफ दिख रहा है कि पीडीपी की सरकार को घेरने की हर चाल उल्टी पड़ रही है।
पीडीपी हर रोज कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन को लेकर हंगामा करती है। सेना को वापस भेजने की बातें करती है लेकिन उमर तो उमर ठहरे। अपने जवाब में उन्होंने पीडीपी को ऐसा खामोश किया कि पीडीपी को सांप सूंघ गया। उमर ने कहा कि हम तो अभी कुछ रोज पहले ही आए हैं आप तो 6 साल थे। अपनी लिस्ट देखिए कि मानवाधिकारों का हनन कब-कब और कैसे-कैसे हुआ।
अब पीडीपी के विधायक जब कांग्रेस को नैशनल कॉन्फ्रेंस के साथ बैठे देखते हैं तो अपने पिछले वो 6 साल याद आते हैं जब दोनों उन्हीं बैंचों पर एक साथ बैठते थे जिस पर नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के लोग बैठे हैं। कुल मिलाकर अगर कहें तो यह बात साफ दिखती है कि युवा उमर में दम तो है..














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