राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 1 से 11 तक का सफर तय किया। राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि बीजेपी को इतनी ज्यादा सीटें यहां पर मिली हों। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीजेपी को लोकसभा चुनावों में सफलता मिल पाएगी, क्या पार्टी का कमल यहां पर खिलेगा? जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने इस मुद्दे के हीरो रहे लीलाकरन शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाकर एक नया पैंतरा खेला है लेकिन पार्टी की इस कोशिश का विरोध शुरू हो गया है।
बाबा अमरनाथ मुद्दे को भुनाकर बीजेपी के 11 विधायक विधानसभा पहुंचने में सफल हो गए और अगर हम बात करें कि जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट और उधमपुर-कठुआ लोकसभा सीट पर बीजेपी कब्जा कर पाएगी या नहीं तो अभी कुछ कहना बड़ा मुश्किल होगा क्योंकि हाल ही में राज्यसभा चुनावों में बीजेपी के एक विधायक ने विपक्षी पार्टी को अपना वोट डाल दिया जिससे बीजेपी की काफी फजीहत हुई।
उसके बाद बीजेपी के लिए नई मुसीबत बनकर आए विधान परिषद के चुनाव। इन चुनावों में बीजेपी के 11 विधायक एक भी पार्टी का आदमी नहीं जितवा पाए जबकि पैंथर पार्टी के 3 विधायकों ने कमाल कर अपने एक सदस्य को विधान परिषद में अवश्य भेज दिया।
बीजेपी पर सभी ने आरोप लगाए कि राज्य की विपक्षी पार्टी पीडीपी जिसे बीजेपी अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती है उसके साथ ही तालमेल कर विधान परिषद चुनावों में वोट डाले लेकिन बीजेपी मेंबर कुल 13 वोट ले सका जबकि पैंथर पार्टी ने साफ कह दिया कि हमने भी तीन वोट बीजेपी को डाले हैं लेकिन क्या बीजेपी के भीतर ही कोई है जो अपनी पार्टी के खिलाफ चल रहा है। यह बात अलग है कि बीजेपी अभी तक उस जयचंद का पता नहीं लगा पाई है।
खैर छोड़ो, अब बात करते हैं आने वाले लोकसभा चुनावों की जिसमें बीजेपी इस बार केन्द्र की कुर्सी पाने के दावे कर रही है। जम्मू-कश्मीर में 6 लोकसभा सीटे हैं -तीन कश्मीर, एक लद्दाख और दो जम्मू प्रांत के हिस्से में हैं। कश्मीर और लद्दाख में बीजेपी शून्य के बराबर है लेकिन जम्मू प्रांत की दोनों सीटो पर कमल खिलाने का दावा बीजेपी कर रही है।
बीजेपी के लिए नई मुसीबत अब सामने आ गई है। बाबा अमरनाथ भूमि आंदोलन में हीरो बनकर उभरे एडवोकेट लीलाकरन शर्मा जम्मू-पुंछ से बीजेपी के उम्मीदवार बना दिए गए हैं और उन्होंने अमरनाथ संघर्ष समिति से त्यागपत्र भी दे दिया है। अब लीलाकरन के सामने आने से बीजेपी का एक खेमा काफी निराश है। लीलाकरन शर्मा को टिकट दिए जाने के खिलाफ आवाजे उठने लगी है। प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।
जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट पर बीजेपी का दो बार कब्जा रहा है जबकि कांग्रेस और नैशनल कॉन्फ्रेंस ही इसी सीट पर जीतती रही हैं। हालांकि बहुत पहले यह सीट निर्दलीय उम्मीदवार के पास भी रही है। इस बार राज्य में कांग्रेस और नैशनल कॉन्फ्रेंस की गठबंधन सरकार है और जाहिर सी बात है कि दोनों पार्टियों ने इन लोकसभा सीटों पर भी गठबंधन उम्मीदवार खड़ा किया है। जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट मौजूदा सांसद कांग्रेस के मदन लाल शर्मा के पास है और इस बार भी पार्टी के यही ऊम्मीदवार हैं। यही हाल उधमपुर-कठुआ सीट को लेकर सामने आ रहा है। इस सीट पर भी कांग्रेस के सांसद लाल सिंह हैं और इस बार भी वही पार्टी के उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
उलझन में अगर कोई है तो वह है बीजेपी क्योंकि इस बार अमरनाथ भूमि आंदोलन के हीरो लीलाकरन खुद बीजेपी टिकट पर जम्मू-पुंछ सीट पर अपना भाग्य अजमाने जा रहे हैं तो वहीं उधमपुर-कठुआ सीट पर बीजेपी अभी तक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही है। कुल मिलाकर कहा जाए तो बीजेपी को भीतराघात इन दोनों सीटों पर उसे ले डूबेगा। क्योंकि इस समय जम्मू प्रांत की इन दोनों सीटों के अधीन आने वाले इलाकों से बीजेपी के 11 विधायक हैं जोकि एक बड़ी शक्ति बनकर उभर सकते हैं लेकिन आपसी फूट इन सबमें भी है क्योंकि कुछ विधायक लीलाकरन शर्मा को टिकट देने के खिलाफ हैं और वह खुलकर बगावत भी कर चुके हैं लेकिन कुछ अंदरखाने में इसका समर्थन भी कर रहे हैं।
राज्य की सबसे ब़डी विपक्षी पार्टी पीडीपी भी इन दोनों सीटों पर अपना उम्मीदवार कौन होगा इसे लेकर असमंजस में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि पीडीपी जम्मू-पुंछ सीट पर नैशनल कॉन्फ्रेंस के बागी नेता तालिब हुसैन को उतारने जा रही है क्योंकि तालिब हुसैन इसी सीट पर नैशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार के रूप में जीत चुके हैं।
बीजेपी इस बार यह उम्मीद लगाकर बैठी है कि बाबा अमरनाथ भूमि मुद्दा इस बार भी काम आएगा लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद विधानसभा के भीतर जो कुछ हुआ है उसका असर भी साफ इस पर पड़ेगा। जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट के इलाको में इस समय बीजेपी का काफी जनाधार है क्योंकि आधिकांश विधायक इन्हीं इलाकों से हैं लेकिन क्या सभी विधायक लीलाकरन शर्मा के लिए वोट मांगने निकलेंगे या फिर भीतराघात की तैयारी करेंगे यह आने वाला समय बताएगा।
अब सबसे बडा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस बार 'जय हो' होगा, क्या बाबा अमरनाथ के नारे लोकसभा सीट पर कमल खिला पाएंगे या फिर दोनों सीटों पर फिर से काग्रेंस का हाथ ही चलेगा।






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