लोकसभा चुनाव में नेताओं की हार जीत का फैसला वोटरों के साथ-साथ पार्टी के विभीषणों पर भी टिका है। खासकर जम्मू-कश्मीर में इस समय ऐसी उथल-पुथल मची है कि किसी भी नेता पर यकीन नहीं किया जा सकता है कि वह पार्टी के घोषित उम्मीदवार के साथ चलेगा या फिर उसके खिलाफ। कहते हैं कि अगर विभीषण श्री राम की मदद न करता तो रावण को हराना आसान न होता। रावण की कमजोरियों का पता विभीषण को भलीभांति था। उसी की मदद से रावण का संहार आसान हुआ था।
यही हाल संसदीय चुनाव का भी है, यहां भी कई नाराज नेता अपनी ही पार्टी की नैया को डुबोने में लगे हुए हैं। पार्टियों के कई नेता अपने ही उम्मीदवारो के खिलाफ साजिशें रचना शुरू कर दिया है ताकि पार्टी को यह सबक सिखाया जाए कि उन्होंने उम्मीदवार का चयन सही नहीं किया है। खबर यह भी है कि कुछ पार्टियों के लोग दूसरी पार्टियों के नेताओं को ढूंढने में लगे हुए हैं, जो इनके लिए विभीषणों का काम कर सके।
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में जिन-जिन पार्टियों के उम्मीदवार घोषित हुए थे उसी समय उनके खिलाफ कई विभीषण सामने आ गए थे, खासकर कांग्रेस में यह काफी घमासान हुआ था। जम्मू जिले से लेकर जिला कठुआ तक हर जगह पर कांग्रेस के उम्मीदवारों के खिलाफ उन्हीं की पार्टी के लोग बगावत पर उतर आए और उनके ही खिलाफ चुनावों में खड़े हो गए। नतीजा यह निकला कि कांग्रेस के आधिकांश उम्मीदवार हार गए।
यही हाल बीजेपी का भी रहा था लेकिन बीजेपी उम्मीदवार कुछ एक जगह पर ही हारे थे लेकिन बीजेपी नेताओं ने अपने उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा था हालांकि एक सीट पर बीजेपी के पूर्व विधायक खड़े हो गए थे और वह हार गए लेकिन कांग्रेस के भीतराघात ने सबको हिलाकर रख दिया था। अब सभी की नजरें लोकसभा चुनाव पर लगी हुई हैं कि कब पार्टियां बिगुल बजाएं।
कांग्रेस ने जम्मू पुंछ लोकसभा सीट पर मदन लाल शर्मा और ऊधमपुर डोडा सीट पर लाल सिंह को फिर उतारा है। यह दोनों पहले भी इसी इलाके से सांसद पहुंचे थे लेकिन अब इनका पहुंचना भी पार्टी के विभीषणों पर आधारित है कि वह किस तरह से अपना रोल निभाते हैं। सबसे बड़ा खतरा बीजेपी के लिए है क्योंकि बीजेपी ने जम्मू पुंछ लोकसभा सीट पर अमरनाथ संघर्ष समिति के पूर्व कनवीनर लीला करन शर्मा को उम्मीदवार बना दिया है। इसके चलते कई बड़े नेता पार्टी हाईकमान से खफा है क्योंकि हर कोई जानता है कि लीलाकरन शर्मा पर संघ का हाथ है और उन्हीं की बदौलत वह इस मैदान में उतरे है।
वहीं ऊधमपुर डोडा सीट पर बीजेपी कद्दावर नेता डॉ. निर्मल सिंह हैं लेकिन उनके खिलाफ भी पार्टी में बगावत है क्योंकि यहां पर पार्टी के एक धड़ा उनके खिलाफ था वह पूर्व केन्द्रीय मंत्री के बेटे को टिकट दिलवाना चाहते थे। अब इन चुनावों में यही रहेगा कि किस पार्टी के नेताओं के खिलाफ कौन-कौन विभीषण बन कर सामने आता है।














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