जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन है। इसलिए दोनों पार्टियों की प्रतिष्ठा भी इन लोकसभा चुनावों में दांव पर लगी है। बीजेपी और पीडीपी ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के खेमे में काफी हलचल पैदा कर दी है। वहीं बीजेपी के लिए भी जम्मू प्रांत की दोनों सीटें जीतना प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है।
पीडीपी कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है तो जम्मू में बीजेपी कांग्रेस के लिए मुसीबत बनी हुई है। हालांकि पहले चरण और दूसरे चरण के चुनाव खत्म हो चुके हैं। जम्मू प्रांत के सभी उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में बंद हो चुका है लेकिन सभी पार्टियां अपनी अपनी जीत पक्की मानकर बैठी हैं।
जम्मू की दोनों लोकसभा सीटें जिनमें जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट और उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट शामिल है पर चुनाव खत्म हो चुका है। मतदान प्रतिशत भी बहुत कम रहा है जिसके चलते सभी पार्टियों के उम्मीदवार चिंतत हैं। जम्मू प्रांत में न अलगाववादियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था और न ही यहां पर आतंक का भय था क्योंकि दोनों इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध थे लेकिन उसके बावजूद भी मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ पाया।
जम्मू प्रांत की दोनों सीटें कांग्रेस के पास थीं और इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस का सहयोग भी कांग्रेस के साथ है। लेकिन फिर भी कांग्रेस के नेता जीत को लेकर इतने आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं। वजह अमरनाथ भूमि मुद्दा है। बीजेपी ने इस मुद्दे को हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में खूब भुनाया और एक से 11 विधायक बीजेपी के विधानसभा में पहुंचने में कामयाब हो गए। अब बीजेपी की नजर जम्मू प्रांत की दोनों संसदीय सीटों पर टिकी थी। इसलिए बीजेपी ने अमरनाथ भूमि आंदोलन के हीरो रहे लीला करण शर्मा को जम्मू-पुंछ लोकसभा सीट की टिकट दे दी। वहीं, उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. निर्मल सिंह को उम्मीदवार बना दिया।
कांग्रेस पार्टी को जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन मिला हुआ है। इसलिए यहां पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपना कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया तो कश्मीर प्रांत में भी कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को समर्थन दिया और अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया। जम्मू प्रांत में जम्मू-पुंछ सीट पर पहले से ही सांसद मदन लाल शर्मा और उधमपुर-डोडा से लाल सिंह मैदान में थे। लेकिन जम्मू प्रांत में भी पीडीपी इन सब का चुनावी गणित बिगाड़ रही है।
मतदान के बाद सब की नजर में अब पीडीपी एक अहम फैक्टर लग रही है क्योंकि जितने भी वोट पीडीपी इन दोनों सीटों पर लेगी उसका उतना ही फायदा बीजेपी को मिलेगा और नुकसान कांग्रेस का ही होगा। अब मतदान खत्म हो चुका है लेकिन विभिन्न पार्टियों के एकाउंटेंट यही स्टेटमेंट बनाने में जुटे हैं कि किस-किस जिले से पीडीपी को कितने वोट मिले हैं।
पीडीपी ने जम्मू-पुंछ सीट पर एक सिख उम्मीदवार त्रिलोक सिंह को खड़ा किया था। वहीं उधमपुर-डोडा सीट पर कांग्रेस के पूर्व विधायक बलवीर सिंह को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि इन दोनों सीटों पर मुख्य मुकाबला काग्रेंस और बीजेपी के बीच माना जा रहा है। भले ही पीडीपी और बहुजन समाज पार्टी जीतने की दहलीज पर नहीं है। लेकिन दोनों पार्टियां चुनावी गणित बिगाड़ सकती हैं।
बीएसपी की पहुंच भी इन दोनों सीटों पर ठीक ठाक है। यह बात अलग है कि विधानसभा चुनावों में बीएसपी को फायदा नहीं हुआ लेकिन मत प्रतिशत काफी रहा था। अब सभी पार्टियों उस दिन का इंतजार कर रही है जब ईवीएम खुलेगी और फिर पता चलेगा कि काग्रेंस-नेश्नल कॉन्फ्रेंस की प्रतिष्ठा बचती है या फिर बीजेपी की जिसने बम बम भोले का सहारा लेकर यह एक और बाजी खेली है।














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