विमल कुमार
Wednesday, December 26, 2012 at 12 : 22

क्रिकेट के भगवान विदा ले रहे हैं...पर्दा गिर रहा है...


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सचिन तेंदुलकर ने वन-डे क्रिकेट को अलविदा कह दिया है और अब हर किसी की ज़ुबां पर अगला सवाल यही है कि वो टेस्ट क्रिकेट कब तक खेलेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि शायद वन-डे रिटायरमेंट के बाद उनका अगला लक्ष्य 200 टेस्ट खेलना है। लेकिन, इसके लिए उन्हें फिलहाल 6 और टेस्ट खेलने होंगे जिसका मतलब होगा ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ में 4 मैचों के अलावा अगले साल के साउथ अफ्रीका दौरे पर टेस्ट सीरीज़ में खेलना। तेंदुलकर के हाल की फॉर्म देखते हुए एक साल बाद के टेस्ट करियर की बात करना मुश्किल है। हां, इतना तय है कि ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में वो खेलेंगे ज़रूर। अब, ये सीरीज़ उनकी आखिरी सीरीज़ होती है या नहीं इस पर सस्पेंस फिलहाल वैसा ही बरकरार रहेगा जैसा कि वन-डे संन्यास को लेकर पिछले एक साल से था। इंग्लैंड सीरीज़ में सचिन शतक को क्या रनों के लिए जूझते दिखाई पड़े थे। उस सीरीज़ से पहले रणजी ट्रॉफी में रेलेव के ख़िलाफ़ उन्होंने एक शतक लगाया था। यकीन नहीं होता है कि 22 महीनों के अंतराल के बाद इस बल्लेबाज़ ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शतक जमाया। इत्तेफाक से टेस्ट क्रिकेट में सचिन का आखिरी शतक भी वही रहा।

2010-11 सीज़न में साउथ अफ्रीका की बेहतरीन गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ अपने प्रचंड खेल का जलवा दिखाने वाले तेंदुलकर अब पहली बार किसी सीरीज़ में अपनी साख़ और स्थान को बचाने के इरादे से उतरेंगे। ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 4 टेस्ट मैचों में 500 रन तेंदुलकर के करियर को बहुत बड़ी लाइफ लाइन भले ही ना दें लेकिन 4 मैचों में सिर्फ 100-150 (इंग्लैंड सीरीज़ की तरह) रन उनके टेस्ट करियर पर उठ रहे गंभीर सवालों को एक निर्णायक दिशा देने का माद्दा रखते हैं। काफी मुमकिन है कि इस सीज़न की आखिरी घरेलू सीरीज़ सचिन के लिए कहीं उनकी आखिरी सीरीज़ भी साबित ना हो। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर ऐडम गिलक्रिस्ट ने कुछ महीने पहले दिल्ली में एक समारोह के दौरान साफ-साफ कहा था कि तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी के बार में संदेह जैसा शब्द प्रयोग करने से पहले उन्हें भय होगा। गिलक्रिस्ट की बातों में ये साफ है कि अब भी दुनियाभर के जानकारों का भरोसा इस खिलाड़ी पर बरकरार है। अब भी बहुत सारे दिग्गज ये दावा करते हैं कि मुंबई के इस दिग्गज के लिए अब भी सम्मान वैसा ही है। लेकिन, वक्त यूं ही नहीं ठहर सकता है और ना ही विरोधी खिलाड़ियों में सम्मान की वो ज़बरदस्त भावना। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ जिस तरह से तेंदुलकर लगातार एक ही अंदाज़ में आउट उससे, हर कोई दहल गया। युवा विराट कोहली के आउट होने के अंदाज़ पर शायद ही इतनी बहस हो लेकिन अगर आपका नाम सचिन तेंदुलकर हो और आप 40 की दहलीज़ पर खड़े हों तो हर कामयाबी और नाकामी की ना सिर्फ चर्चा होगी बल्कि उस पर एक लंबी बहस होगी।

तेंदुलकर करीब 2 साल तक शतकों के \'महाशतक\' के जाल में उलझे रहे। सन्यास के मुद्दे पर कभी भी किसी तरह की कोई भी राय नहीं रखने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी ने आखिरकार एक टीवी इंटरव्यू में मान ही लिया है कि 40 साल की उम्र के नज़दीक पहुंचने के बाद उन्हें इस बात का एहसास है कि उनमें अब बहुत ज़्यादा क्रिकेट नहीं बची है। तेंदुलकर ने खुद माना कि नवंबर से वो गंभीरता से इस बात पर विचार करेंगे कि उनके भविष्य की राह क्या हो। और हुआ भी ऐसा ही। तेंदुलकर ने पहले वन-डे क्रिकेट को अलविदा कहा। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 4 टेस्ट में नाकामी के बाद फरवरी-मार्च में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 4 टेस्ट मैच खुद तेंदुलकर और चयनकर्ताओं को इस बात की पूरी जानकारी दे देंगे कि क्या सचिन 2013-14 के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भी जाने का दमखम रखते हैं। तेंदुलकर के असाधारण करियर और कई बार आलचकों को ग़लत साबित करने के ज़ज्बे के चलते किसी तरह की भविष्याणी करना ख़तरे से खाली नहीं है। लेकिन, जिस तरह से तेंदुलकर ने अपने आखिरी दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर 3 टेस्ट मैच में 2 लाजवाब शतक लगाए, उसको बेहतर करना 41 साल की उम्र में मुश्किल होगा।

वैसे भी खुद मास्टर चाहेंगे कि उनकी विदाई सीरीज़ घर में हो। भारतीय क्रिकेट के दो बड़े दिग्गज राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण विदेश में संन्यास की घोषणा नहीं कर पाए लेकिन उसके बाद उन्होंने घरेलू विदाई के बारे में तनिक भी नहीं सोचा। लेकिन, पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को ऑस्ट्रलिया के ख़िलाफ 2008 में सही तरीके से विदाई सीरीज़ में खेलने का मौका मिला। उसी सीरीज़ में फॉर्म और फिटनेस से जूझने वाले एक और पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने भी टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। तेंदुलकर इन सभी खिलाड़ियों के मुकाबले एक ज़बरदस्त यादगार विदाई के हक़दार हैं। लेकिन, वन-डे क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी को मैदान में विदाई नहीं मिली और उन्हें एक प्रेस रिलीज़ के ज़रिए इस बात की जानकारी दुनिया को देनी पड़ी। टेस्ट क्रिकेट में एक यादगार विदाई तभी मुमकिन होगी, ऐसा तभी होगा अगर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तेंदुलकर पुराने तेंदुलकर की तरह खेलें। लेकिन, सौवें अंतर्राष्ट्रीय शतक के खेल में जिस तरह से किस्मत और क्रिकेट ने तेंदुलकर को बार-बार पारजित किया, उससे वो शायद ही यादगार विदाई के बारे में सोचें। उनके दिमाग में सिर्फ एक बात गूंजेगी कि रन, शतक और टीम की जीत। अगर ये चीज़ें ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मिलती हैं तो यादगार विदाई और बेहतरीन भविष्य दोनों की राह अपने आप तय हो जाएंगी।

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विमल कुमार के बारे में कुछ और

विमल कुमार करीब दशकभर से क्रिकेट रिपोर्टिंग से जुड़े हैं। आईबीएन7 से जुड़ने से पहले वे टीडब्लूआई और आज तक जैसे संस्थानों में काम कर चुके हैं। Twitter ID@Vimalwa
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