एक ज़माना था जब लोग स्वामी और संन्यासियों को अपना भगवान मानते थे लेकिन जब आज टीवी पर स्वामी नित्यानंद और इच्छाधारी जैसे बाबाओं को देखते हैं तो रूह कांपने लगती है। पिछले दो हफ्तों से आप सबने हरेक टीवी चैनल पर स्वामी नित्यानंद का आपत्तिजनक विडियो देखा होगा। उसे देखते ही आप यकीनन चोंक गए होंगे लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर इन लोगों को स्वामी या धर्म गुरु बनने का हक़ किसने दिया।
हमने देखा कि किस तरह से नित्यानंद एक तमिल ऐक्ट्रैस के साथ रंग-रलियां मना रहा था लेकिन फिर भी स्वामीजी कह रहे थे कि वो गलत नहीं हैं। स्वामी के विडियो को देख कर लोग भड़क गए। तमिलनाडु से लेकर कर्नाटक तक लोगों में आक्रोश दिखा। लोगों ने स्वामी के आश्रम में तोड़-फोड़ की और अपना गुस्सा प्रकट किया लेकिन स्वामी टस से मस न हुए। पत्रकार स्वामी के आश्रम में पहरेदार की तरह बैठ गए ताकि स्वामी से पूछ सकें कि आखिर सचाई क्या है लेकिन स्वामी जी का कोई पता नहीं था। स्वामी के बिडदि स्थित आश्रम में उनके लोगों ने पत्रकार को बताया कि यह सब गलत है और यह स्वामी के खिलाफ एक साज़िश है जब उनसे पूछा गया कि स्वामी जी कहा हैं तो सुरक्षा का बहाना दे कर उन्होंने स्वामी जी का पता देने से इनकार कर दिया। इस घटना के कुछ दिन बाद ही स्वामी जी एक विडियो यू ट्यूब में डालकर खुद को निर्दोष बता रहे हैं। स्वामी ने सोच-समझ कर अपना पक्ष सामने रखा ताकि वह लोगों के दिमाग से उसके प्रति आक्रोश कम कर सकें लेकिन जब ऐसा न हुआ तो स्वामी ने अपने लोगों के द्वारा यह खबर फैला दी कि स्वामी कहीं पर छुपे नहीं हैं बल्कि वह कुंभ के शाही स्नान के लिए हरिद्वार गए हैं।
इस बीच चेन्नई पुलिस ने स्वामी के खिलाफ केस दर्ज कर स्वामी कि तलाश शुरू कर दी लेकिन यह तलाश सिर्फ कहने के लिए थी। स्वामी जी को पकड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया क्योंकि स्वामी जी का मेल मिलाप तमिलनाडु के दिग्गज लोगों से था। चेन्नई पुलिस पिछले दो हफ्तों से लोगों को बेवकूफ बना रही है कि वो स्वामी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। स्वामी पत्रकारों को तो मिल गए लेकिन तमिलनाडु पुलिस को अभी तक नहीं मिल पाया खैर छोड़िए, यह कोई नई बात नहीं यह भारत है और यहां ऐसा हमेशा देखने को मिलता है।
अब सवाल यह कि क्या स्वामी ने गलती की थी या नहीं। अगर स्वामी की मानें तो वह खुद यह कबूल करता है कि विडियो में दिखे सीन उसी के बैडरूम के हैं और वह रंजीता है लेकिन उसने कोई गलत काम नहीं किया है। अगर हिन्दू धर्म की बात करें या किसी भी धर्म की बात करें तो धर्म गुरु एक ऐसा इंसान होता है जिसे लोग प्रेरित होते हैं और वो धर्म की तरफ आते थे लेकिन जब आज के ऐसे पाखंडी बाबाओं को देखते हैं तो क्या होगा आने वाले दिनों में हमारे धर्म और आस्था का।
स्वामी जी अभी कुंभ में शाही स्नान में लगे हुए हैं। क्या उनके पाप वहां पर धुल जाएंगे जिस तरह से उन्होंने धर्म और लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है क्या उन्हें धार्मिक सम्मेलनों में हिस्सा लेने से रोकना नहीं चाहिए क्योंकि अगर आज हमने इन्हें नहीं रोका तो कल न जाने हमें और क्या देखने को मिलेगा। अब वक्त आ गया है कि हम सब एक होकर ऐसे पाखंडी और ढोंगी बाबाओं के खिलाफ एक मुहिम शरू करें ताकि भविष्य में ऐसे ढोंगी बाबा धर्म और आस्था के नाम पर लोगों से कोई खिलवाड़ न कर सकें।














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