विधानसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भारी तादाद में वोट दिया था लेकिन लोकसभा चुनावों को लेकर उतना ज्यादा उत्साह नहीं है। लेकिन हम चाहते हैं कि केंद्र में सैक्युलर सरकार बने, जिसके काम करने के तरीके में एक निरंतरता हो।
मुझे उम्मीद है कि केंद्र में एक ऐसी पार्टी आएगी जो अल्पसंख्यकों की समस्याओं की ओर भी ध्यान देगी। मुस्लिम समुदाय की समस्या यह है कि या इसमें खासतौर से दो धड़े हैं एक वो जो काफी गरीब है और दूसरा वो जो बहुत अमीर है लेकिन जिसे हम मध्य वर्ग कहते हैं वो न के बराबर है। मुझे लगता है कि अल्पसंख्यकों के पिछड़े होने की एक वजह यह भी है। मेरी नजर में हर पार्टी को इस बारे में कुछ न कुछ करने की जरूरत है।
वैसे, इस बारे में किसी पार्टी या नेता को अलग करके देखना काफी मुश्किल है। तकरीबन सभी पार्टियों के समय में दंगे हुए। किसी ने एक्शन नहीं लिया। अब पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगाकर राजनीति करती हैं। गुजरात दंगों के लिए कांग्रेस बीजेपी को कटघरे में खड़ा करती है वहीं बीजेपी कांग्रेस को सिख दंगों के लेकर निशाना बनाती है। मेरा सवाल ये है कि क्या कोई ऐसी पार्टी है जो इन पीड़ितों को न्याय दिलाएगी। जिसके पास कोई नया विजन हो। जब हम लोग इस ओर देखते हैं तो हमें यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण लगता है।
मेरा मानना है कि समाज तब तक पोलराइज्ड होता रहेगा जब तक हम लोगों की मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देंगे। गरीब आदमी के पास सिवाए गरीबी के क्या होता है। मिडिल क्लास की हालत थोड़ी बेहतर होती है। मुश्किल ये है कि जब तक हम लोग गरीब आदमी को गरीब रखेंगे, शिक्षा नहीं देंगे तब तक हमें धर्म के नाम पर ऐसी ही लड़ाईयां देखने को मिलती रहेंगीं। मैं कहती हूं मुस्लिमों को आरक्षण मत दो लेकिन उन्हें शिक्षा देने की पर्याप्त व्यवस्था करो।
अगर कश्मीर के बारे में बात करें तो मेरा मानना है कि इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने की जरूरत है। जब तक विवाद रहेगा सबको परेशानी होती रहेगी। 2002 में जब हमने सरकार बनाई तो उस वक्त फौज थी। वाजपेयी जी को बुलाया तो उन्होंने उस वक्त राज्य सरकार की तारीफ की। हम उम्मीद करते हैं कि गृह मंत्री जब आएंगे तो उनकी तरफ से कुछ कॉप्लीमेंट जरूर मिलना चाहिए। जो भी सरकार आए वो कश्मीर के बारे में जरूर सोचे। शांति वार्ता को आगे ले जाए और विवाद को सुलझाए।
एक बात और जो मैं महिला होने के नाते भी काफी मजबूती से रखना चाहती हूं कि इस देश में कई शक्तिशाली महिला नेता हैं लेकिन इसके बावजूद हम संसद में महिला आरक्षण बिल को पास नहीं करा पाए। एक बात और मैं यहां कहना चाहूंगी कि हमने अपने समय में निगम चुनाव कराए तो हमने महिला उम्मीदवारों को एक तय संख्या में मौका दिया। कई इसमें जीतीं और उन्होंने अपने इलाकों में बेहतर प्रदर्शन किया। मेरा मानना है कि महिलाओं को मौका मिलना ही चाहिए। महिला सशक्तिकरण की कोशिशें पर जोर दिए जाने की जरूरत है। साथ ही एक मुद्दे को लेकर में काफी गंभीर हूं वो है सुरक्षा है। अब देखिए ये घटना हमारे आसपास होती है तो हम भयभीत हो जाते हैं लेकिन इससे तो राजधानी भी सुरक्षित नहीं है। मेरा मानना है कि हर क्षेत्र में महिलाओं की अधिक अवसर दिए जाने की जरूरत है।
खासतौर से में कश्मीर की महिलाओं की बात आगे रखना चाहूंगी। ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने इस मिलिटेंसी में अपने बच्चे और पति को खोया है जिनका कमाने वाले इंसान नहीं रहा उन्होंने काफी मुश्किल हालातों का सामना किया है और कर रही हैं। ऐसी महिलाओं पर भी सरकार को काफी ध्यान देने की जरूरत है।














कमेंट्स
9