मृत्युंजय कुमार झा
Wednesday, November 07, 2012 at 18 : 27

बिल्कुल अलग है चीन का होने वाला मुखिया


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अमेरिका में चुनाव के नतीजे आ गए। बराक ओबामा अगले 4 सालों के लिए वर्ल्ड स्टेज पर प्रमुख भूमिका में बने रहेंगे और अब दुनिया की निगाहें 8 नवंबर से चीन की राजधानी बीजिंग में शुरू हो रही कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 18वीं कांग्रेस पर टिकी हैं। 7 दिनों की इस बैठक में उन लोगों को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी जो अगले 10 साल तक चीन का भविष्य तय करेंगे। इस बैठक में यह भी तय होगा कि चीन में आर्थिक और सामाजिक सुधारों को किस हद तक स्वतंत्रता दी जाएगी। क्या वहां बढ़ रही अमीर और गरीब के बीच की खाई पाटने की कोशिश की जाएगी, सवाल कई हैं लेकिन फिलहाल जवाब कोई नहीं। हां, एक बात तो तय है कि दुनिया की इस दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी में कुछ भी हो, इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा ही। निगाहें चीन के भावी नेता शी जिनपिंग पर होंगी जो चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ के उत्तराधिकारी मुकर्रर किए गए हैं। शी की गिनती 'प्रिंसलिंग' ग्रुप में होती है क्योंकि उनके पिता भी चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रभावशाली नेता रहे हैं। हमेशा की तरह शी को लेकर चीनी मीडिया में कोई हलचल नहीं है। सन 2002 में जब शी शी जिनपिंग चीन के झिजियांग के चीफ बनाए गए तब उनका मंत्र था पूंजीवाद। देखते ही देखते झिजियांग प्राइवेट इंटरप्राइजेज का गढ़ बन गया। 5 साल बाद शी सत्ता के शिखर के पास पहुंचे। बीजिंग की पॉलिसी बनाने वाली कमेटी में शामिल हुए। जब उन्हें राष्ट्रपति हू जिंताओ का उत्तराधिकारी बनाया तब कम्यूनिस्ट पार्टी के स्कूल में दिए गए भाषण में उनका जोर था मार्क्सिज्म और ज्यादा मार्क्ससिज्म पर। एक ही शख्शियत के दो पहलू!

59 वर्षीय शी जिनपिंग जल्द चीन की सत्ता के सबसे ऊंचे शिखर पर होंगे साथ ही पार्टी के जनरल सेक्रेटरी भी। सबसे बड़ी चुनौती होगी उन सबको साथ लेकर चलने की जो चीन में परिवर्तन और सुधार को लेकर कई फ्रंट पर विरोध कर रहे हैं। एक तरफ वो लोग हैं जो शी जिनपिंग के पिता शी झॉगजुन के 70 के दशक की आर्थिक नीतियों और खुले बाजार की हिमायती रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार द्वारा नियंत्रित मोनोपोली और वे लोकल सरकारें हैं जिन्हें हू जिंताओ का संरक्षण हासिल रहा है जो हर तरह के सुधार का विरोध करते रहे हैं। 'नो एनसिएंट विस्डम, नो फॉलोअर्स: दी चैलेंजेस ऑफ अथॉरिटन कैपिटलिज्म' के लेखक जेम्स मैग्रोगर के मुताबिक शी शी जिनपिंग के लिए इन मुश्किलों को ज्यादा समय तक टालना या ढुलमुल रवैया अपनाना मुमकिन नहीं होगा। उनके पास समय है ही कहां। अगर वो अपने देश की बेचैन हो रही जनता को खुश रखना चाहते हैं, अपने देश की इकॉनमी को चलाते रखना चाहते हैं तो सिर्फ सुधार ही एक विकल्प है। उनकी पार्टी की विश्वसनीयता इसी ग्रोथ पर टिकी है जिससे उनके लोग अपनी बेहतरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

शी जिनपिंग संभवत: अगले साल मार्च में चीन के राष्ट्रपति बन जाएंगे। उस वक्त विकास की दर 7 फीसदी रहने का अनुमान है जो बीते 23 सालों की सबसे कम विकास दर होगी। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक विकास दर इसी तरह रही तो अगले 10-15 सालों में ये 3-4 फीसदी तक भी गिर सकती है। दुनिया में छायी मंदी का असर चीन पर भी पड़ रहा है। कई जगहों पर इंडस्ट्रियल वर्कफोर्स में असंतोष और रोष दोनों ही खुल कर दिखने लगे हैं जिसका सीधा असर विस्थापित कामगारों पर भी पड़ रहा है। दूसरी बड़ी समस्या अमीर और गरीब के बीच और चौड़ी होती खाई की यानी वेल्थ गैप की है जो समाज में फैल रहे असंतोष को बढ़ावा दे रहा है। समस्याओं की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन, हर कोने में फैला भयानक भ्रष्टाचार, तेजी से उम्रदराज होती जनसंख्या, पड़ोसियों के साथ सीमा और टेरिटोरियल झगड़े...70 के दशक में देंग शियाओपिंग के बाद यह पहली बार है जब सत्ता हस्तांतरण इतना चुनौतियों भरा है। शी जिनपिंग के पिता शी झांगशुन खुले बाजार के हिमायती थे। वो देंग की सुधार नीतियों को लागू कराने में अहम भूमिका निभाकर सुर्खियों में आए थे। बतौर गवर्नर उन्होंने गवांग्दोंग प्रांत को दुनिया के आर्थिक नक्शे पर खड़ा कर दिया था। रातों-रात धान की खेतों की जगह कारखाने खड़े हो गए। शेनझेन और शुहाई एक्सपोर्ट ड्रिवन ग्रोथ पर बीते तीन दशकों से फलता फूलता रहा है। शी जिनपिंग ने खुद फुजियान और झीजियांग की तस्वीर बदल दी। इन दोनों ही प्रांतों की इकॉनमी हांगकांग और ताईवान से कहीं ज्यादा बड़ी है। शी के व्यक्तित्व का ये अलग ही पहलू है। लगता है कि सुधार उनके डीएनए में है। चीन में रहे अमेरिका के राजदूत ज़ॉन हंट्समन 2009-2011 के दौरान शी चिन पिन के काम करने के तरीके से काफी प्रभावित रहे हैं। जॉन कहते हैं कि फुजियान और झीजियांग के क्षेत्रीय इलाकों में उनके काम से मैं काफी प्रभावित हूं। वो बाजार और आर्थिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी चीजों को समझते हैं।

शी जिनपिंग के पिता शी झांगजुन माओ के साथी थे और चीन की क्रांति के हीरो भी लेकिन 1962 में माओ से उनके मतभेद हो गए और पार्टी से उन्हें बेदखल कर दिया गया। यहां तक कि उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1976 में माओ की मृत्यु के बाद उनका सितारा एक बार फिर चमका और वो देंग शियाओपिंग की कोर टीम में शामिल हो गए और उन्हें गवांग्दोंग का गवर्नर बना दिया गया। माओ के ट्रांसलेटर सिडनी रिट्टनबर्ग ने लिखा है कि उनके पिता सारे चीनी नेतृत्व में सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक व्यक्ति थे। मुझे उम्मीद है कि उनके पिता की सोच उनके अंदर भी होगी। शी जिनपिंग करीब 22 सालों तक उन प्रांतों में प्राइवेट इंटरप्रइजेज को बढ़ाने में जुटे रहे। विशेषज्ञों के मुताबिक इन सालों में शी जिनपिंग ने लाल फीताशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई भी लड़ी साथ ही निजी कंपनियों को जमकर बढ़ावा भी दिया। लेकिन सरकारी संस्थानों की मोनोपोली तब भी कायम रही और आज भी है। झाउ एन लाइ: दी लास्ट पर्फेक्ट रिवोल्यूशनरी के लेखक जियो वैनक्विन के मुताबिक You have to compromise with every group, Hu Jintao hasn't been able to achieve anything over 10 years because above him he has a supervisor, who is Jiang Zemin. But Xi Jin ping will have not one but two supervisors watching over him: Jiang Zemin and Hu Jintao. शी जिनपिंग, उनके होने वाले प्रीमियर ली केकियांग और उनका सात या नौ सदस्यीय पोलित ब्यूरो, स्टैंडिंग कमेटी जो पार्टी और देश को चलाएंगे, का 18वीं कांग्रेस में ही फैसला होगा।

कमेटी के सदस्य और पोलित ब्यूरो के 25 सदस्यों में से कई लोग भी ऐसे होंगे जो इस मौजूदा व्यवस्था में फले-फूले हैं और जाहिर है किसी भी बदलाव का विरोध करेंगे। मैकग्रेगोर के मुताबिक When everybody had nothing back in the late 1970s, there may have been ideological resistance to reform but there wasn't personal-property, personal-wealth resistance to reform, Now you've got a lot of people with millions, tens of millions and even billions of dollars riding on their position. That is an order of magnitude different. हालांकि ये भी सच है कि शी जिनपिंग उनकी पत्नी या बेटी के पास कोई खास संपत्ति नहीं हैं लेकिन यह भी सच है कि उनकी दो बहनों के साथ-साथ दूसरे कई नजदीकी रिश्तेदारों ने अरबों कमाए हैं और विदेशों में भी काफी निवेश किया है। लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि शी ने किसी तरह से उनकी मदद की हो। शी के बारे में जब खूबियां गिनाई जाती हैं तो उनमें एक है उनका पॉलिटिकल कैरियर। अपने विरोधियों से भी समर्थन हासिल करने की उनकी क्षमता रही है। रिट्टनबर्ग के मुताबिक We talked to a number of people in Hangzhou and other towns when he was in charge of Zhejiang, They really seemed to love this guy. He was approachable and had a democratic style. He listens to people. He keeps his ear to the ground and never made life hard for political opponents. जब शी झिजियांग के चीफ थे तब उन्होंने 'डेलिबिरेट डेमोक्रेसी' की कवायद शुरू की थी जिसके तहत स्थानीय लोगों को स्थानीय बजट पर बहस करने के लिए बढ़ावा दिया जाता था बाद में लोगों ने खुद इसमें भाग लेना शुरू कर दिया। लेकिन जब शी वाइस प्रीमीयर बने तो 'कोर पार्टी रिहोट्रिक' पर बने रहे। खासकर सेंट्रल पार्टी स्कूल में कार्ल मार्क्स और लेनिन पर काफी जोर दिया। उनके भाषणों में भी मार्क्स और लेनिन की छाप हमेशा रही है। रिट्टनबर्ग के अनुसार From Xi's speeches it's quite clear he takes Marxist theory very seriously, Not just slogans and lip service - he tries to analyze things. जाहिर है इससे शी को पार्टी के दूसरे ग्रुप के साथ-साथ पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के साथ जुड़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी जो इन सिद्धातों को खूब मानते हैं। चीन में रहे ब्रिटेन के राजदूत ब्राउन (200-2003) लिखते हैं There's no other leader quite like him .A president able to unify a leadership facing all these problems isn't a bad place to start.

चीन के जानकारों का मानना है कि शी के व्यक्तित्व का ये दोहरापन उनकी सबसे बड़ी योग्यता साबित होगी खासकर इस मौजूदा दौर में। शी के शुरू के दिन भी इसी दोहरेपन में या यूं कहें के दो विचारधाराओं के बीच गुजरे थे। जब उनके पिता को माओ ने दरबदर कर दिया था और 'कल्चरल रिवोल्यूशन' के दौरान शी को दूसरे लोगों की तरह दूरदराज के गावों में गांव वालों के साथ खेतों में काम करने के लिए भेजा गया। शी ने गोबी रेगिस्तान के इलाके में शानशि गांव में 7 साल बिताए। सन 2000 में शी ने एक चाईनीज मैगजीन झांग्जुआ एर्नु को दिए एक इंटरव्यू में कहा था The experiences from my time in the countryside have left a deep impression. When later I have come across problems, I have never experienced them as big as then. शी का यह पहला इंटरव्यू था जिसमें उन्होंने अपने पिता से मिली सुधार और डेमोक्रेसी की विरासत के बारे में भी बात की My father often talked about it. When you live with other people and only follow your own opinion, things will go badly. कल्चरल रिवोल्यूशन के खत्म होने के बाद शी वापस राजधानी बीजिंग लौटे और शिंगुहा यूनिवर्सिटी से 1979 में इंजिनियरिंग की डिग्री हासिल की। तब तक उनके पिता को देंग शियाओपिंग ने गुवानदोंग का गवर्नर बना दिया था। शी स्टेट काउंसिल के जनरल अफेयर में सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के जनरल सेक्रेटरी जेंग बियाओ के सेक्रेटरी बन गए। यहीं पर उनका परिचय ब्रिटेन में चीनी राजदूत की बेटी से हुआ। जिनसे बाद में उनकी शादी हुई लेकिन यह शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई। लेकिन शी अब पार्टी में अपनी जगह तलाश करने में लगे थे। 1982 में एक बार फिर वो हेबी प्रांत के झेनदिंग में बतौर पार्टी सेक्रटरी काम करने के लिए पहुंचे। यहां पर उन्हें स्थानीय सरकार और प्रशासन को समझने का मौका मिला। 1985 में उन्हें अमेरिका जाने का मौका मिला जहां मिसीसिपी नदी के किनारे आइवोवा स्टेट के मस्काटाइन में एक अमेरिकी परिवार के साथ गांव में रहकर यह अनुभव हासिल किया कि किस तरह अमेरिकी किसान फसल उगाते हैं। इसी दौरान हॉलीवुड की फिल्में खूब देखीं। गॉड फादर उनकी पसंदीदा फिल्मों में से एक है। बाद में जब वो दुबारा अमेरिका गए तो वो उस गांव में गए जहां उन्होंने महीनों बिताए थे..It's my second visit to Muscatine after a hiatus of 27 years, and all the memories of my being here are now coming back, Coming here is really like coming back home.

1985 के बाद से अगले 17 साल शी के लिए सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के थे। फुजियान प्रांत में एक के बाद एक वो पार्टी में आगे बढ़ते गए। 1999 में वो वहां के गवर्नर बनाए गए। 2002 में वो शिंजियांग प्रांत के पार्टी सेक्रेटरी बनाए गए। 2007 में शंघाई के पार्टी सेक्रटरी बने और कुछ ही महीनों बाद पोलित ब्यूरो स्टैडिंग कमेटी और वाइस प्रेसिडेंसी, शी अब सत्ता की रेस में आगे थे। इस बीच उन्होंने पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) यानी चीन की लाल सेना में कार्यरत पैंग ल्यूयान से शादी कर ली जो आज मेजर जनरल हैं। ळी चीन की सबसे मशहूर लोक गायिका भी रही हैं और आज भी अपने पति से ज्यादा लोकप्रिय हैं। हालांकि अब वो स्टेज पर नहीं आतीं लेकिन WHO और दूसरी संस्थाओं के लिए एड्स, टीबी जैसी फिल्मों में संदेश फैलाने के लिए काम करती रही हैं। इस बीच शी को चीन में हो रहे औलपिंक का जिम्मा दिया गया और इसकी सफलता ने शी को एक सशक्त राष्ट्रीय नेता की पहचान दिला दी।

शी आज चीन की सत्ता के शिखर पर हैं। अब तक चीन अथॉरिटन मॉडल अपनाता रहा है लेकिन जानकारों के मुताबिक यह ढांचा, यह तरीका बहुत समय तक नहीं चल सकता है। इस बीच पार्टी के एक मजबूत नेता बो शिलाई को पार्टी से निकाला जाना इस मॉडल की एक और मिसाल है। पेरी लिंक जिन्होंने पार्टी के 1989 के थियानमेन स्क्वायर पर लिखे गए दस्तावेज का अंग्रेजी में अनुवाद किया था, उनका मानना है कि The men near the top in China don't want an innovator, a reformer, a boat-rocker like Bo Xilai because their collective interest is to keep the power-elite's boat afloat. बो पर आरोप है कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने इसका भरपूर दुरुपयोग किया। उनकी पत्नी पर एक ब्रिटिश कारोबारी पर हत्या की साजिश रचने का मुकदमा भी चल रहा है। उधर चीन की आम जनता को शी जिनपिंग के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है। उन्हें सिर्फ इतना पता है कि शी चीन को राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया है। उसे खास बदलाव की उम्मीद नहीं है लेकिन उसकी ख्वाहिश है कि सरकार उन्हें विचारों की, अभिव्यक्ति की आजादी दे, वोट डालने का अधिकार दे, आजादी की हवा में सांस लेने का अधिकार दे...क्या शी यह सब कुछ दे पाएंगे। जिस तरह से बदलाव की मांग उठ रही है, जिस तरह से अब लोग सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं, सड़कों पर उतरने लगे हैं, जिस तरह से ट्विटर और फेसबुक पर अपने विचार व्यक्त करने लगे हैं, शी के लिए उतनी मुश्किलें और भी बढ़ेंगी। ऐसे में खतरा इस बात का है कि चीन कहीं एक बार फिर अपनी पुरानी देशभक्ति के नाम पर आक्रामक रवैया की नीति ना अपनाए।

चाहे वो साउथ चीन सागर का मामला हो या फिर सीमा विवाद का। जापान के साथ चीन का तनाव एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। अब सवाल है कि शी जिनपिंग कौन सा रास्ता अख्तियार कर पाएंगे। क्या वो अपने पिता की तरह चीन की इकॉनमी में एक सिरे से बदलाव करेंगे या फिर सुधार और कट्टरपंथ के बीच कोई राह ढूंढने की कोशिश करेंगे, यह कहना बहुत मुश्किल है। सत्ता के शिखर पर बैठने के बाद उन्हें कुछ साल तो अपना पावर बेस बनाने में ही लगेगा। उतना ही वक्त लगेगा उन लोगों से तालमेल बनाने में जो मार्क्सिज्म विचार से हटना नहीं चाहते। यह कहना गलत नहीं होगा कि शी जिनपिंग के दो चेहरे हैं। एक जो अपने पिता से प्रभावित होकर मार्केट, ओपन इकॉनमी, बदलाव और सुधार को बढ़ावा देने का पक्षधर है। दूसरा शी जो पार्टी और 'रेड एंपायर' का विश्वासी है और उसके खिलाफ जा नहीं सकता है। दोनों शी में कश्मकश तो होगी ही। देखें, कौन जीतता है या कोई बीच का रास्ता भी है क्या..?

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मृत्युंजय कुमार झा के बारे में कुछ और

मृत्युंजय कुमार झा बीते 23 सालों से टीवी पत्रकारिता में हैं। देश की पहली वीडियो न्यूज मैगजीन की शुरुआत से ही उसके साथ जुड़े। आज तक के फाउंडर मेंबर रहे। 16 साल तक टीवी टुडे में काम करने के बाद पिछले सात सालों से आईबीएन7 में इक्जेक्यूटिव एडिटर के रूप में कार्यरत।
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