फरवरी, 2010
\"मुझे इस बात से तकलीफ पहुंची कि 2008 में देश का सबसे सीनियर चीफ जस्टिस होने के बावजूद मुझे सुप्रीम कोर्ट नहीं भेजा गया।\" सत्रह साल तक हाईकोर्ट के जज रहने के बाद पद पर अपने आखिरी दिन दिल्ली के चीफ जस्टिस अजित प्रकाश शाह ने ये बात कही। इस बयान में सिर्फ उनका दुख नहीं झलकता, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत के जज बनने के पैमानों पर भी बड़ा सवाल उठता है। कई बार देश के अलग-अलग हलकों से सुप्रीम कोर्ट का जज बनने यानि कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठता रहा है। लेकिन देश के बेहतरीन जज कहे जाने वाले जस्टिस शाह की पीड़ा इस सवाल को और ज्यादा गंभीर बना देती है। जस्टिस शाह ने यहां तक कहा कि अगर किसी जज को सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनाया जाता, तो कॉलेजियम को कम से कम उन कारणों को जरूर बताना चाहिए जिसकी वजह से जज की पदोन्नति....









