महेंद्र श्रीवास्तव
Wednesday, May 22, 2013

अब मिस्टर क्लीन नहीं रहे मनमोहन!


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आजाद भारत की ये पहली सरकार होगी जो इस कदर भ्रष्ट है। मनमोहन सिंह की अगुआई में सरकार का प्रदर्शन तो वाकई निराशाजनक रहा ही, इस दौरान संवैधानिक संस्थाओं को भी कमजोर करने की साजिश की गई। चोरी पकड़े जाने पर केंद्र सरकार के मंत्रियों ने सीएजी के खिलाफ बातें कीं, सीबीआई के दुरुपयोग का मामला सबके सामने है। यूपीए-2 में प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, संचार मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और कानून मंत्रालय समेत कई और मंत्रालयों की भूमिका संदिग्ध पाई गई और दर्जन भर मंत्रियों पर भी गंभीर आरोप लगे। साफ-साफ तो ये भी दिखाई दे रहा है कि सरकार के लिए जरूरी संख्या भी इस समय यूपीए-2 के पास नहीं है। लेकिन सीबीआई है तो सरकार को कोई खतरा भी नहीं है। ऐसे में अब सरकार को मैं क्या नंबर दूं या आप खुद ही पढ़ें सरकार की रिपोर्ट कार्ड और जरूरत समझें....

Friday , March 01, 2013

रेल बजट: बंसल की बर्थ कन्फर्म...


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कांग्रेसी रेलमंत्री पवन बंसल के रेल बजट ने यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उम्मीद थी कि बजट कुछ ऐसा होगा, जिससे रेलवे का भी भला हो और यात्रियों का भी। लेकिन मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं कि जो बजट रेलमंत्री ने संसद मे पेश किया है इससे ना रेल का भला हो सकता है, ना यात्रियों का और ना ही उनकी पार्टी कांग्रेस का। हां, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में व्हील फैक्टरी (पहिया) का ऐलान कर उन्होंने पार्टी में अपनी सीट जरूर कन्फर्म करा ली है। बंसल के बजट में कुछ भी नया नहीं है, अगर इस बजट को पूर्व रेलमंत्री लालू यादव के बजट की फोटो कॉपी कहूं तो गलत नहीं होगा। लेकिन बंसल जी को कौन समझाए कि लालू बनना इतना आसान भी नहीं है, उसके लिए पहले तो उन्हें अपने नाम के आगे यादव लिखना होगा फिर दो....

Saturday , December 01, 2012

नरेंद्र मोदी: सावधानी हटी, दुर्घटना घटी


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आपसे वादा था कि गुजरात चुनाव के बारे में आप सबको अपडेट दूंगा, तो चलिए आज गुजरात विधानसभा चुनाव की ही कुछ बातें कर ली जाएं। दो दिन पहले ही दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचा हूं और इस 48 घंटे में बहुत सारे लोगों से मुलाकात हुई। हर मुद्दे पर बहुत ही गहन विचार किया गया है। आप सबका ब्लड प्रेशर ना बढ़े इसलिए एक बात पहले ही स्पष्ट कर दूं कि दिल्ली में था, तो वहां से भी यही लग रहा था कि मोदी तीसरी बार भी सरकार बनाएंगे। गुजरात पहुंचने के बाद भी ऐसा ही लग रहा है कि मोदी की सरकार बन ही जाएगी। अब सवाल उठता है कि अगर मोदी की सरकार बन ही रही है तो फिर चुनाव में इतनी मारामारी क्यों है? तो आइये अब भूमिका खत्म, सीधे मुद्दे की बात की जाए। वैसे तो युद्ध और चुनाव के सामान्य नियम हैं, मसलन जो....

Wednesday, August 22, 2012

ब्रेकिंग न्यूज : यमलोक में हंगामा


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व्यंग्य देश की घटिया राजनीति और बाबाओं की मनमर्जी तो आप हमारी नजर से काफी समय से देखते और पढ़ते आ रहे हैं, चलिए आज आपको ऐसी जगह ले चलते है, जहां जाने के बाद कोई वापस नहीं आया। अगर कोई वापस आया भी तो उसे पहचानना मुश्किल हो गया। मसलन वो वहां गया तो मनुष्य शरीर में लेकिन वापस किस शरीर में आया, इस बारे में गारंटी के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता। शायद मैं दुनिया का पहला आदमी हूं जो जिस शरीर में गया, उसी में वापस भी आया। मुझे पता है कि आपको भरोसा नहीं होगा, इसीलिए मैं कुछ ऐसी जानकारी जुटा कर लाया हूं, जिससे आपको पता चल जाए कि मैं वाकई ऊपर होकर आया हूं। बहरहाल ऊपर काफी अफरा-तफरी मची हुई है। मुझे लगता था कि बढ़ती आबादी से सिर्फ नीचे ही मुश्किल हो रही है, पर ऐसा नहीं है, ऊपर तो और....

Thursday , May 10, 2012

शादी एमपी में ही करेंगे मामा....


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व्यंग्य कुछ दिन पहले ही मेरे मामा का फोन आया, बेटे की शादी के बारे में बात कर रहे थे। हमने कहा अच्छा तो है, बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, अच्छी कंपनी में है और उसका पैकेज भी ठीक ठाक है। फिर जिस तरह वो पढ़ने में होशियार है, मुझे तो पक्का भरोसा है कि वो एक दिन आईएएस हो ही जाएगा। ऐसे में उसकी शादी की चिंता आपको अभी से क्यों सता रही है। कहने लगे नहीं ऐसा नहीं है, यूपी और बिहार से तो तमाम बड़े-बड़े अफसर अपनी बेटी का रिश्ता लेकर आ रहे हैं, पर हमारे एक ही बेटा है, हम इसकी शादी में अपनी सभी हसरतें पूरी करना चाहते हैं। मैंने कहा अरे मामा क्या बात है, कीजिए ना हसरत पूरी आपको किसने रोका है। धूमधाम से कीजिए शादी, कोशिश करूंगा कि मैं भी परिवार के साथ वहां पहुंचूं। कहने लगे कि गुड्डू तुम एमपी यानी....

Saturday , March 10, 2012

टीम अन्ना भी तो करे आत्ममंथन!


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यूपी समेत देश के पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया खत्म हो गई है। इस चुनाव मे कौन जीता-कौन हारा ये बात भी सामने आ गई है। लेकिन चुनाव के नतीजों से कई सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल ये कि टीम अन्ना की जनता में कितनी विश्वसनीयता बची है। अगर रिजल्ट के हिसाब से देखें तो मुझे लगता है कि ये अन्ना गैंग जबर्दस्ती का भौकाल क्रिएट किए हुए है, जनता में अब इसकी पूछ नहीं है। आप पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों? मैं बताता हूं कि ये बात मैं किस आधार पर कह रहा हूं :- अन्ना के जनलोकपाल बिल का अगर कोई राजनीतिक दल खुलकर विरोध कर रहा था, तो वह थी मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी। सपा मुखिया ने साफ कहा था कि वो अन्ना के जनलोकपाल बिल से कतई सहमत नहीं हैं क्योंकि ये जनलोकपाल बिल देश के संघीय....

Wednesday, January 04, 2012

मीडिया ने रोका शतकों का शतक!


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मुंबई से दिल्ली की उड़ान में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से मुलाकात हो गई। संयोगवश मेरी बगल वाली सीट सचिन की थी। वो आए और बगल में ही बैठ गए। सचिन को लग रहा था कि अगर लोग उन्हें पहचान लेंगे तो सब ऑटोग्राफ लेने के लिए उन्हें घेर लेंगे, लिहाजा वो फ्लाइट के अंदर आने के बाद भी ठंड की वजह से मंकीकैप पहने रहे। लेकिन कुछ देर बाद उन्हें गर्मी लगी तो उन्हें कैप उतारनी पड़ गई। सचिन को लगा कि अब उन्हें हवाई जहाज में बैठे प्रशंसकों को तो ऑटोग्राफ देना ही पड़ेगा, लिहाजा वो कोट की जेब से पैन निकालकर ऑटोग्राफ देने को तैयार हो गए। पर ये क्या सचिन को देखने के बाद भी जहाज में कोई सुगबुगाहट नहीं, सभी लोग अपनी जगह पर ही बैठे रहे। हवाई जहाज में ऐसा कोई प्रशंसक ही नहीं था, जो उनसे ऑटोग्राफ लेता। इस बीच एक आठ साल का....

Tuesday , December 06, 2011

ईमानदार आदमी समझदार भी हो जरूरी नहीं...


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अन्ना एक बार फिर सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में हैं। धमकी दे रहे हैं कि अब की निर्णायक लड़ाई होगी यानी आर-पार की। अब निर्णायक लड़ाई का क्या मतलब है? क्या जनलोकपाल कानून की अधिसूचना रामलीला मैदान से खुद जारी कर देगें? कुछ बोलना है, क्या बोलना है, इस पर किसी का नियंत्रण नहीं रह गया है। दरअसल अन्ना ईमानदार हैं, उनकी ताकत भी यही ईमानदारी है। अब ये तो जरूरी नहीं है ना कि ईमानदार आदमी समझदार भी होगा। बस समझदारी से काम ना लेना यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है। अब देखिए सड़क पर उतरने वाली भीड़ को अन्ना अपना समर्थक मानते हैं, उन्हें लगता है कि उनकी आवाज पर ये भीड़ सड़क पर आ जाती है, पर ऐसा है नहीं। दरअसल इस भीड़ का दुश्मन नंबर एक कौन है? आप बता सकते हैं? चलिए मैं बताया हूं। इस सवाल का सिर्फ एक जवाब....

Thursday , December 01, 2011

दोस्तो! प्लीज हेल्प मी...


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आमतौर पर मैं अपने फैसले लेने में सक्षम में हूं। ऐसा मसला जो सीधे मुझसे या मेरे परिवार से जुड़ा हो, उस मामले में मैं कोशिश करता हूं कि अपनी राय पर कायम रहूं। व्यक्तिगत मामलों में मित्रों से राय मांगकर उन्हें परेशान करना कभी मेरी आदत नहीं रही, लेकिन इस बार मैं बहुत उलझन में हूं, सच में मुझे इस वक्त आपकी सलाह ही मुश्किल से उबार सकती है। कुछ दिन पहले मैं आस्था चैनल पर श्रीमद् भागवत की कथा सुन रहा था, उस दौरान स्वामी जी ने एक प्रसंग सुनाया और कहा कि मैं देखता हूं कि लोग व्यक्तिगत मामलों में भी दूसरों की सलाह लेते हैं। ये निशानी है कमजोर और अस्थिर दिमाग के लोगों की। स्वामी जी की सलाह थी कि अपने फैसले खुद लें, वो अच्छा हो या खराब। अगर आपने गलत फैसला ले भी लिया तो अगली बार ऐसी गलती नहीं करेंगे। जान....

Saturday , November 12, 2011

भिखारियों का अंबानी


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अटपटा लग रहा है ना आपको। ये क्या बात है, कोई भिखारियों का अंबानी भी है? चौंकिए बिल्कुल मत, मैं आपको बताता हूं, भिखारियों का अंबानी है और आज मैं आपकी इससे मुलाकात भी कराऊंगा। मैं बताता हूं कि इस अंबानी की सिर्फ एक ही जगह नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में इसका ठिकाना है और ये ठिकाने हासिल करने में इसे 35 साल लग गए। दरअसल पिछले दिनों मैं दिल्ली में कनॉट प्लेस से कुछ जरूरी काम निपटाने के बाद लौट रहा था। एक चौराहे के करीब से गुजरने के दौरान कार का एक पहिया पंचर हो गया। कार को साइड में लगाकर मैं नीचे उतरा। वैसे तो मैं चाहता तो खुद ही चक्का बदल सकता था, लेकिन मैने देखा कि गाडी़ में कोई टूल्स ही नहीं हैं, फिर तो एक ही चारा बचता है कि किसी मिस्त्री को यहीं बुलाया जाए। बहरहाल मैंने फोन कर मिस्त्री....

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