व्यंग्य कुछ दिन पहले ही मेरे मामा का फोन आया, बेटे की शादी के बारे में बात कर रहे थे। हमने कहा अच्छा तो है, बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, अच्छी कंपनी में है और उसका पैकेज भी ठीक ठाक है। फिर जिस तरह वो पढ़ने में होशियार है, मुझे तो पक्का भरोसा है कि वो एक दिन आईएएस हो ही जाएगा। ऐसे में उसकी शादी की चिंता आपको अभी से क्यों सता रही है। कहने लगे नहीं ऐसा नहीं है, यूपी और बिहार से तो तमाम बड़े-बड़े अफसर अपनी बेटी का रिश्ता लेकर आ रहे हैं, पर हमारे एक ही बेटा है, हम इसकी शादी में अपनी सभी हसरतें पूरी करना चाहते हैं। मैंने कहा अरे मामा क्या बात है, कीजिए ना हसरत पूरी आपको किसने रोका है। धूमधाम से कीजिए शादी, कोशिश करूंगा कि मैं भी परिवार के साथ वहां पहुंचूं। कहने लगे कि गुड्डू तुम एमपी यानी....
यूपी समेत देश के पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया खत्म हो गई है। इस चुनाव मे कौन जीता-कौन हारा ये बात भी सामने आ गई है। लेकिन चुनाव के नतीजों से कई सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल ये कि टीम अन्ना की जनता में कितनी विश्वसनीयता बची है। अगर रिजल्ट के हिसाब से देखें तो मुझे लगता है कि ये अन्ना गैंग जबर्दस्ती का भौकाल क्रिएट किए हुए है, जनता में अब इसकी पूछ नहीं है। आप पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों? मैं बताता हूं कि ये बात मैं किस आधार पर कह रहा हूं :- अन्ना के जनलोकपाल बिल का अगर कोई राजनीतिक दल खुलकर विरोध कर रहा था, तो वह थी मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी। सपा मुखिया ने साफ कहा था कि वो अन्ना के जनलोकपाल बिल से कतई सहमत नहीं हैं क्योंकि ये जनलोकपाल बिल देश के संघीय....
मुंबई से दिल्ली की उड़ान में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से मुलाकात हो गई। संयोगवश मेरी बगल वाली सीट सचिन की थी। वो आए और बगल में ही बैठ गए। सचिन को लग रहा था कि अगर लोग उन्हें पहचान लेंगे तो सब ऑटोग्राफ लेने के लिए उन्हें घेर लेंगे, लिहाजा वो फ्लाइट के अंदर आने के बाद भी ठंड की वजह से मंकीकैप पहने रहे। लेकिन कुछ देर बाद उन्हें गर्मी लगी तो उन्हें कैप उतारनी पड़ गई। सचिन को लगा कि अब उन्हें हवाई जहाज में बैठे प्रशंसकों को तो ऑटोग्राफ देना ही पड़ेगा, लिहाजा वो कोट की जेब से पैन निकालकर ऑटोग्राफ देने को तैयार हो गए। पर ये क्या सचिन को देखने के बाद भी जहाज में कोई सुगबुगाहट नहीं, सभी लोग अपनी जगह पर ही बैठे रहे। हवाई जहाज में ऐसा कोई प्रशंसक ही नहीं था, जो उनसे ऑटोग्राफ लेता। इस बीच एक आठ साल का....
अन्ना एक बार फिर सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में हैं। धमकी दे रहे हैं कि अब की निर्णायक लड़ाई होगी यानी आर-पार की। अब निर्णायक लड़ाई का क्या मतलब है? क्या जनलोकपाल कानून की अधिसूचना रामलीला मैदान से खुद जारी कर देगें? कुछ बोलना है, क्या बोलना है, इस पर किसी का नियंत्रण नहीं रह गया है। दरअसल अन्ना ईमानदार हैं, उनकी ताकत भी यही ईमानदारी है। अब ये तो जरूरी नहीं है ना कि ईमानदार आदमी समझदार भी होगा। बस समझदारी से काम ना लेना यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है। अब देखिए सड़क पर उतरने वाली भीड़ को अन्ना अपना समर्थक मानते हैं, उन्हें लगता है कि उनकी आवाज पर ये भीड़ सड़क पर आ जाती है, पर ऐसा है नहीं। दरअसल इस भीड़ का दुश्मन नंबर एक कौन है? आप बता सकते हैं? चलिए मैं बताया हूं। इस सवाल का सिर्फ एक जवाब....
आमतौर पर मैं अपने फैसले लेने में सक्षम में हूं। ऐसा मसला जो सीधे मुझसे या मेरे परिवार से जुड़ा हो, उस मामले में मैं कोशिश करता हूं कि अपनी राय पर कायम रहूं। व्यक्तिगत मामलों में मित्रों से राय मांगकर उन्हें परेशान करना कभी मेरी आदत नहीं रही, लेकिन इस बार मैं बहुत उलझन में हूं, सच में मुझे इस वक्त आपकी सलाह ही मुश्किल से उबार सकती है। कुछ दिन पहले मैं आस्था चैनल पर श्रीमद् भागवत की कथा सुन रहा था, उस दौरान स्वामी जी ने एक प्रसंग सुनाया और कहा कि मैं देखता हूं कि लोग व्यक्तिगत मामलों में भी दूसरों की सलाह लेते हैं। ये निशानी है कमजोर और अस्थिर दिमाग के लोगों की। स्वामी जी की सलाह थी कि अपने फैसले खुद लें, वो अच्छा हो या खराब। अगर आपने गलत फैसला ले भी लिया तो अगली बार ऐसी गलती नहीं करेंगे। जान....
अटपटा लग रहा है ना आपको। ये क्या बात है, कोई भिखारियों का अंबानी भी है? चौंकिए बिल्कुल मत, मैं आपको बताता हूं, भिखारियों का अंबानी है और आज मैं आपकी इससे मुलाकात भी कराऊंगा। मैं बताता हूं कि इस अंबानी की सिर्फ एक ही जगह नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में इसका ठिकाना है और ये ठिकाने हासिल करने में इसे 35 साल लग गए। दरअसल पिछले दिनों मैं दिल्ली में कनॉट प्लेस से कुछ जरूरी काम निपटाने के बाद लौट रहा था। एक चौराहे के करीब से गुजरने के दौरान कार का एक पहिया पंचर हो गया। कार को साइड में लगाकर मैं नीचे उतरा। वैसे तो मैं चाहता तो खुद ही चक्का बदल सकता था, लेकिन मैने देखा कि गाडी़ में कोई टूल्स ही नहीं हैं, फिर तो एक ही चारा बचता है कि किसी मिस्त्री को यहीं बुलाया जाए। बहरहाल मैंने फोन कर मिस्त्री....
हां! पहली नजर में आपको ये बात अटपटी लग सकती है कि भगवान की शरण में भगवान.. इसके मायने क्या हैं। मैं बताता हूं, एक हैं सत्य साईं जिन्होंने खुद को भगवान बताया और दूसरे सचिन तेंदुलकर जिन्हें लोग क्रिकेट का भगवान कहते हैं। दोनों में फर्क है, एक को लोग भगवान नहीं मानते और दूसरा खुद को भगवान नहीं मानता। एक ने कहा कि वो 96 साल तक जिंदा रहेंगे पर इसके पहले ही उन्हें शरीर छोड़ना पड़ा, दूसरे को लोग सोचते थे उन्हें 21 साल के पहले क्रिक्रेट छोड़ना पड़ सकता है, पर वो आज भी बल्ला घुमा रहे हैं। हां, दोनों भगवान में एक समानता है, दोनों ने अपने 'खेल' से देश और दुनिया में करोड़ों प्रशंसक जरूर बनाए हैं। सत्य साईं अब हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन वो एक ऐसी शख्सियत बन चुके हैं कि उनके न रहने पर भी उनके बारे में चर्चा....
जी हां, अब सड़े गले सरकारी तंत्र से बदबू आने लगी है। अगर हम भ्रष्ट्राचार पर नजर डालें तो देश में इसकी शुरुआत कब हुई इसका अंदाजा ही लगाना मुश्किल है। नेता, अफसर जिसे जब और जहां मौका मिला वो हाथ साफ करने से पीछे नहीं रहा। हम कह सकते हैं कि आज इस गोरखधंधे में किसी का दामन बेदाग नहीं है। यहां तक की मीडिया का भी। देश की हालत ये हो गई है कि लोगों ने भ्रष्टाचार को कानून मान लिया और उसका पालन करने में लगे हैं। आप हैरान हो सकते हैं लेकिन सच ये है कि आज भी अगर लोग किसी काम से अफसर या नेता से मिलने जाते हैं और नेता ने बात सुनने के बाद कहा कि ठीक है आप जाएं, काम हो जाएगा तो लोगों को भरोसा ही नहीं होता है कि उनका काम हो जाएगा क्योंकि नेता ने पैसे की बात तो....
सचिन आप महान हैं, वर्ल्ड कप में आपका प्रदर्शन बेमिसाल रहा है। आपके इस योगदान को देशवासी कभी नहीं भूल सकते। आपको भारत रत्न मिलना ही चाहिए, आपको अब तक के 21 साल के क्रिकेट कैरियर में भरपूर मौका मिला और आपने किसी को निराश भी नहीं किया। लेकिन अब सवाल है कि आखिर कब तक, जवाब यही है सचिन अब बस...। वैसे तो आपके पास इतना समय था कि इस वर्ल्डकप में ही आप अपने शतकों के शतक को पूरा कर लेते, लेकिन आप नहीं कर पाए। वर्ल्ड कप हाथ में थामना आपका सबसे बड़ा सपना था, वो पूरा हो गया। अब दूसरों को मौका दीजिए। 121 करोड़ की आबादी वाले इस देश में नए सचिन की तलाश करने और नया सचिन बनाने में अपना योगदान दीजिए। 4 करोड़ की आबादी वाले देश ऑस्ट्रेलिया और दो करोड़ की आबादी वाले श्रीलंका से हमें नसीहत लेने की जरूरत है। जहां....
टीम इंडिया बधाई हो, धोनी सेना की जय, सचिन की जय, युवराज, गंभीर, सहवाग, जहीर आपकी भी जय हो। मेरा मानना है कि क्रिकेट का खेल एक टीम अफर्ट है और हमारी टीम ने 'शानदार जीत' हासिल की। चलिए आपको आपत्ति है तो 'शानदार' हटा देते हैं लेकिन जीत तो हासिल की है ना। वर्ल्ड कप तो हमारे खिलाड़ियों के हाथ में ही है। इस जीत की खुशी पूरा देश मना रहा है, और वो खबरिया चैनल भी इस टीम की वाहवाही करने में पीछे नहीं हैं, जो दिन भर पानी पी पी कर टीम और धोनी की कप्तानी को कोसते रहे। चलिए थोड़ा पीछे चलते हैं। टीम चुने जाने के बाद सबसे पहले आलोचना ये हुई कि इसमें एक ही विकेट कीपर है धोनी और धोनी को कुछ हो गया तो क्या होगा ? दूसरा सवाल उठाया गया पीयूष चावला क्यों हैं इस टीम में? टीम में दोस्ती....









