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अनंत विजय
Wednesday, February 08, 2012

विचार का फासीवाद


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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में विवादास्पद लेखक सलमान रश्दी को वहां आने से रोकने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को रुकवाने में सफलता हासिल करने के बाद कट्टरपंथियों और कठमुल्लों के हौसले बुलंद हैं। राजस्थान की कांग्रेस सरकार के घुटने टेकने के बाद अब बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी चंद कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए। कोलकाता पुस्तक मेले में तस्लीमा नसरीन की विवादास्पद किताब निर्बासन के सातवें खंड का लोकार्पण करने की इजाजत नहीं दी गई। तस्लीमा के कोलकाता जाने पर प्रगतिशील वामपंथी सरकार ने पहले से ही पाबंदी लगाई हुई थी जिसे क्रांतिकारी नेता ममता बनर्जी ने भी जारी रहने दिया। तस्लीमा की अनुपस्थिति में कोलकाता पुस्तक मेले में विमोचन को रोकना हैरान करने वाला है। दरअसल ये कट्टरपंथ का एक ऐसा वायरस है जो हमारे देश में तेजी से फैलता जा रहा है। समय रहते अगर बौद्धिक समाज ने इस पर लगाम लगाने की कोशिश नहीं की तो....

Monday , September 05, 2011

लोक से दूर लेखक


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बचपन से सुनता था कि उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद कहा करते थे कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। एक और बात सुनता था कि साहित्य राजनीति के पीछे नहीं बल्कि समाज के आगे चलनेवाली मशाल है। मैं इसे सुनकर यह सोचता था कि अगर साहित्य मशाल है तो साहित्यकार उस मशाल की लौ को लगातार जलाए रखने का काम करते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का दिल्ली में ऐतिहासिक अनशन खत्म हो गया है। अब तमाम तरीके से लोग उस जन उभार और आंदोलन को मिले व्यापक जनसमर्थन का आकलन कर रहे हैं। यह वो वक्त था जब साहित्य और साहित्यकारों के सामने यह चुनौती थी कि वो साबित करे कि राजनीति के पीछे चलनेवाली मशाल नहीं है। लेकिन अन्ना के आंदोलन के दौरान कमोबेश साहित्यकारों का जो ठंडा या विरोध का रुख रहा उससे घनघोर निराशा हुई। हंस के संपादक और दलित विमर्श के पुरोधा राजेन्द्र यादव....

Monday , August 15, 2011

मंजिल से भटका सफर


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आज देश आजादी का जश्न भले ही मना रहा हो लेकिन देश की जनता के बीच अपनी इस आजादी को लेकर एक संदेह, एक आशंका, एक रोष पैदा हो गया है। इस संदेह की वजह यह है कि पूरे देश में इस वक्त भ्रष्टाचार का बोलबाला है। समाज के सबसे निचले स्तर से लेकर देश के शीर्ष स्तर को भ्रष्टाचार की विषबेल ने जकड़ लिया है। चाहे वो पौने दो लाख करोड़ का टेलीकॉम घोटाला हो, सत्तर हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला हो, हजारों करोड़ का अंतरिक्ष घोटाला हो, चाहे देश के शहीदों के परिवारों को मिलने वाले घर का आदर्श घोटाला हो या फिर आईपीएल घोटाला। आज जिधर नजर दौड़ाइये, घोटाले उधर ही मुंह बाए खड़े हैं। सारे घोटालों के केंद्र में या यों कहें कि हर भ्रष्टाचार की धुरी या तो कोई कांग्रेस का नेता है या फिर कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार को समर्थन....

Thursday , December 30, 2010

बिनायक पर विलाप क्यों


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छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने मानवाधिकार कार्यकर्ता और पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के उपाध्यक्ष बिनायक सेन को राजद्रोह के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई है। बिनायक सेन को यह सजा कट्टर नक्सलियों के साथ संबंध रखने और उनको सहयोग देने के आरोप साबित होने के बाद सुनाई गई है। अदालत द्वारा बिनायक सेन को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर के मुट्ठी भर चुनिंदा वामपंथी लेखक बुद्धिजीवी आंदोलित हो उठे हैं। उन्हें लगता है कि न्यायपालिका ने बिनायक सेन को सजा सुनाकर बेहद गलत किया है और उसने राज्य की दमनकारी नीतियों का साथ दिया है। उन्हें यह भी लगता है कि यह विरोध की आवाज को कुचलने की एक साजिश है। बिनायक सेन को हुए सजा के खिलाफ वामपंथी छात्र संगठन से जुड़े विद्यार्थी और नक्सलियों के हमदर्द दर्जनों बुद्विजीवी दिल्ली के जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए और जमकर नारेबाजी की। बेहद उत्तेजक और....

Thursday , December 23, 2010

‘लीक’ ने उतारा मुखौटा


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इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ तत्व ऐसे हैं, जिनको लश्कर-ए-तोयबा का समर्थन हासिल है। लेकिन ज्यादा बडा़ खतरा कट्टरपंथी हिंदू संगठनों का हो सकता है। ये संगठन मुस्लिम समुदाय में धार्मिक तनाव और राजनीतिक कट्टरता पैदा करते हैं। ये कथित बातें कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर को 20 जुलाई 2009 को कहीं। दरअसल ये कथित बातचीत रोमर और राहुल के बीच तब हुई जब अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत आई हुई थीं और प्रधानमंत्री ने उनके सम्मान में दावत दी थी। उस दावत में जब रोमर ने राहुल से लश्कर की गतिविधियों और भारत पर आसन्न खतरे के बारे में पूछा तब राहुल गांधी ने उनसे यह बातें कही थीं। दोनों के बीच की बातचीत भारत अमेरिका डिप्लोमैटिक संदेशों में दर्ज है। जिसका खुलासा विकिलीक्स ने किया है। जाहिर सी बात है कि इस....

Tuesday , November 23, 2010

सिद्धांत पर भारी सत्ता लोलुपता


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एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ का टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला और उसके पहले हजारों करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला और मुंबई के आदर्श सोसाइटी घोटालों के शोरगुल के बीच सुदूर दक्षिण के राज्य कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा पर भी जमीन के घोटाले के संगीन इल्जाम लगे हैं। दरअसल यह पहली बार हो रहा है कि देश के दूसरे सबसे बड़े राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के किसी मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के इतने संगीन आरोप लगे हों। हो सकता है कि इस घोटाले के बाद येदुरप्पा को राहत मिल जाए और वो कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने रहें। लेकिन अगर हम पार्टी विद अ डिफरेंस का दावा करनेवाली भारतीय जनता पार्टी में घट रही राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण करें तो इस पार्टी के सिद्धांतों और कार्यकलाप में कई अहम बदलाव रेखांकित किए जा सकते हैं। दो साल पहले बनी कर्नाटक की सरकार पर आए दिन स्थायित्व पर खतरा मंडराता रहता है। मुख्यमंत्री येदुरप्पा....

Tuesday , November 09, 2010

फासीवाद का सिद्धांत


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चीन से एक दिल दहला देनेवाली खबर आई है। कानून का जबरदस्ती और कड़ाई से पालन करवाने की कई खबरें चीन से आती ही रहती हैं लेकिन अभी जो खबर बाहर निकल कर आई है वो एक विकसित राष्ट्र और शासन करनेवाली पार्टी की विचारधारा पर कलंक की तरह है। चीन के पूर्वी तट के पास सीमिंग में एक छत्तीस वर्षीय महिला ने एक बच्चे के रहते दूसरी संतान को जन्म देने का इरादा किया और गर्भवती हो गई। जब उसका गर्भ आठ महीने का हो गया तो सरकारी अधिकारियों को इस बात का पता चला। इस जानकारी के बाद तकरीबन दो दर्जन सरकारी चीनी अधिकारियों ने उस महिला के घर पर धावा बोल दिया। आठ माह की गर्भवती पर सरकारी अधिकारियों ने लात-घूंसों की बरसात कर दी। उसके दोनों हाथ पीछे बांधकर उसके सिर को दीवार से टकराया और पेट पर कई प्रहार किए ताकि गर्भपात हो जाए। जब....

Saturday , October 30, 2010

अरुंधति का अलाप और देश का सवाल


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एक किताब लिखकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल कर लेने वाली लेखिका अरुंधति राय, जिन्हें वन बुक वंडर कह सकते हैं, जबरदस्त रूप से प्रचारप्रिय हैं। प्रचार और चर्चा में बने रहने की कला में महारत हासिल कर लेने वाली अरुंधति ने इस बार देश की राजधानी को चुना। एक सेमिनार में अरुंधति ने कह डाला कि कश्मीर को भूखे-नंगे भारत से आजादी चाहिए। सैयद अली शाह गिलानी और कई अल्ट्रा लेफ्ट नेताओं की मौजूदगी से उत्साहित अरुंधति और आगे चली गईं और भारत को खोखला सुपरपॉवर तक बता डाला। दरअसल यह बयान भी एक सोची-समझी रणनीति के तहत दिया दिया गया है ताकि प्रचुर प्रचार हासिल हो सके। कश्मीर पर अरुंधति के इस बयान को कुछ लोग देशद्रोह कह रहे हैं, तो कई इसे भारतीय लोकतंत्र की ताकत और अभिव्यक्ति की आजादी बता रहे हैं। लेकिन अरुंधति के इस बयान को अभिव्यक्ति की आजादी करार देने वाले यह भूल जाते हैं....

Wednesday, October 06, 2010

मतभेद से मजबूत लोकतंत्र


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हाल के दिनों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार के कामकाज के तरीकों की आलोचना की है या यों कह सकते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने सरकार की कई नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं या कई मसलों पर पार्टी की राय सरकार से बिल्कुल अलग है। मनमोहन सिंह कहते हैं कि नक्सली इस देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है और उनसे सख्ती से निबटने की जरूरत है। लेकिन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की राय उनसे इतर है। सोनिया गांधी किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ हैं लेकिन नक्सल समस्या को मानवीय ढंग से देखने और इसकी जड़ तक जाने की वकालत करती हैं। अपनी पार्टी के मुख पत्र कांग्रेस संदेश में सोनिया गांधी ने कहा कि नक्सल समस्या को विकास के आईने में देखने की जरूरत है। समाज के सबसे निचले तबके विकास योजनाओं का कर्यान्वयन नहीं होने से ये समस्या बढ़ी है। सोनिया गांधी ने....

Friday , September 24, 2010

संवैधानिक संस्था की साख पर बट्टा


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एक बार फिर देश में एक संवैधानिक पद पर हुई नियुक्ति विवादों के घेरे में आ गई है। मुख्य सतर्कता आयुक्त के पद पर भारत सरकार के दूरसंचार सचिव की नियुक्ति लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के विरोध को दरकिनार करते हुए कर दी गई। मुख्य सतर्कता आयुक्त का चुनाव प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी करती है जिसमें प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता होते हैं। अब तक परंपरा यह रही है कि आम सहमति के आधार पर ही मुख्य सतर्कता आयुक्त का चयन होता है लेकिन इस बार लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की आपत्तियों को धता बताते हुए दूरसंचार सचिव पी जे थॉमस के नाम पर मुहर लगा दी गई। आम सहमति की परंपरा इसलिए बनाई गई थी ताकि इस संवैधानिक संस्था में शासक दल और विपक्षी दल दोनों का विश्वास बना रहे। उसकी जांच....

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