प्रबल प्रताप सिंह
Friday , March 06, 2009

पाक मीडिया की...जय हो


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तीन मार्च को लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर आतंकी हमले ने सबको दहला दिया। खासतौर से बेहतरीन क्रिकेट खेलने वाले मुल्क पाकिस्तान और करोड़ों क्रिकेट प्रेमी पाकिस्तानियों के लिए ये वारदात एक ग्रहण थी जिसने क्रिकेट के जरिए दुनियाभर में अपनी छवि सुधारने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को करीब-करीब ग्रस लिया। इस हमले के बाद इस बात में कोई शक नहीं रहा कि पाकिस्तान न केवल क्रिकेट के लिए असुरक्षित है बल्कि खुद पाकिस्तानियों के लिए भी सिरदर्द बन चुका है। हालांकि इस वारदात का एक अलग पहलू भी है और वो है वहां के मीडिया में इस घटना की कवरेज। पाकिस्तानी मीडिया ने जिस तरह से इसे कवर किया उसकी मिसाल शायद दूसरी नहीं मिलेगी। और सरकार ने उसे रोका नहीं। 3 मार्च को श्रीलंकाई काफिले पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के टीवी चैनलों ने इस खबर को जोर-शोर से दिखाना शुरू कर दिया। जैस-जैसे....

Friday , October 03, 2008

मीडिया के मास्टरमाइंड


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इन दिनों एक अजीबो-गरीब किस्म की रिपोर्टिंग देखने को मिल रही है और इसकी शुरुआत हुई एक अखबार में किसी रिपोर्टर की एक एनालिटिकल रिपोर्ट से। रिपोर्टर ने बड़ी मेहनत करके रिपोर्ट तैयार की कि हाल के सालों में हुए सिलसिलेवार धमाकों के सिलसिले में दिल्ली,मुंबई,राजस्थान औऱ उत्तर प्रदेश पुलिस ने जो भी गिरफ्तारियां की है उन सबके मास्टरमाइंड अलग-अलग थे। ये रिपोर्ट छपी बाटला हाउस में हुए एनकाउंटर और कुछ गिरफ्तारियों के बाद। मकसद ये बताना था पुलिस जांच गड़बड़ है और इसके पीछे मंशा ये बताना भी हो सकती है कि राज्यों की पुलिस जानबूझ कर एक समुदाय विषेश के लोगों का टारगेट कर रही है। मुझे नहीं मालूम इस रिपोर्टर का सोर्स क्या था। क्या दिल्ली पुलिस कमिश्नर के खिलाफ अफसरों की एक लॉबी ने पूरी जांच पर सवाल खड़ा करने की मंशा से ऐसे किया या फिर किसी और ने उस रिपोर्टर....

Wednesday, October 01, 2008

क्या सही रिपोर्ट करना गलत है?


8 IBNKhabar

मैं हाल में वाराणसी गया था और जब वापस लौट रहा था तो एक सज्जन से रेलवे स्टेशन पर बातचीत शुरू हुई और सिलसिला बहस में बदल गया। आरोपों की झड़ी लग गई कि मीडिया भी गैर जिम्मेदार है और बायस्ड है। अपना काम ठीक से नहीं कर रही। मैंने उन शख्स की बातों पर इसलिए ध्यान देना शुरू किया क्योंकि मुझे भी लगा कि शायद नेशनल मीडिया भी गैरजिम्मेदारी हो रहा है। उस शख्स के आरोप मुझे ऐसे लगे जैसे कि किसी ने खुद मुझ पर आरोप लगा दिए हों। परेशान होना लाजिमी भी था क्योंकि गुजरात के दंगों में नेशनल मीडिया की भूमिका की काफी सराहना होने के बाद शायद पहला मौका है जब नेशनल मीडिया पर ऐसे सवाल उठाए जा रहे थे और वो भी एक ऐसे वाकए पर जिसमें दिल्ली पुलिस ने एक एनकाउंटर में दो लोगों को मार गिराया औऱ दावा किया कि....

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