करीबन 2 महीने हो गए 'गुरुजी' को गए हुए। मैंने उनसे सितार तो नहीं सीखा लेकिन पंडित रविशंकर को मैं और उनके कुछ और करीबी लोग गुरुजी ही बुलाते थे, हैं, और रहेंगे। मेरे लिए ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी के जाने के बाद भी मैं अब तक उनकी उपस्थिति को महसूस कर पा रही हूं। 2001 से मैं उनको जानती हूं और पिछले 12 साल में न जाने कितनी बार उनके हाथ को पकड़कर उनके साथ-साथ चली हूं। उन हाथों की सिलवटें, गर्माहट, खुशबू और प्यार भरा स्पर्श शायद सारी ज़िंदगी भूल नहीं पाऊंगी। सारी दुनिया पंडित रविशंकर को उनके संगीत के लिए याद करेगी लेकिन मुझ जैसे कुछ लोगों के लिए तो वो एक बेशकीमती खज़ाना छोड़ गए हैं। उनके साथ बिताए बेहद खास और यादगार पलों का खज़ाना। डायनिंग टेबल पर बैठकर उनके साथ खाना खाते वक्त की बातचीत, कितने भाव से वो खाना खाते....
एक और मॉडल की खुदकुशी...एक खूबसूरत औरत की मौत...एक सिलेब्रिटी की मौत...ग्लैमर की दुनिया से जुड़े लोगों की मौत भी सुर्खियों में रहती है। बहुत कुछ होता है कहने सुनने को। मीडिया के लिए ढेर सारा मसाला भी। खुदकुशी की वजहों पर जमकर चर्चा होती है। मॉडल के दोस्त, तमाम पेज 3 चेहरे कुछ न कुछ कहने सामने आ जाते हैं जिन लोगों से शायद कई साल में उसकी बातचीत भी नहीं हुई होगी वो भी अचानक उसके करीबी बन जाते हैं और जो शायद बेहद 'करीब' थे वो अचानक अजनबी हो जाते हैं या महज़ 'अच्छे दोस्त' । मॉडल के करियर की ही तरह उसकी मौत की खबर भी धीरे-धीरे गुमनामी के अंधेरे में खो जाती है। नफीसा और विवेका को अब तभी याद किया जाएगा जब एक और मॉडल खुदकुशी कर लेगी। और तब एक बार फिर शुरू होंगी वही बातें कि ग्लैमर की दुनिया में कितना....
वो चल फिर नहीं सकती, न जाने कितनी बीमारियां हैं उसको। जिंदगी भी बस कुछ ही दिनों की होगी उसके पास, अगर जल्द ही कोई चमत्कार न हुआ तो। लेकिन उसके पास एक ऐसी चीज है जिसके लिए शायद हर कोई सारी उम्र तरसता है। उसके पास सच्चा प्यार है। मैं बात कर रही हूं निवेदिता और उसके पति पंकज की। जब पंकज ने निवेदिता को पहली बार देखा था तभी उससे प्यार कर बैठा था। निवेदिता उस वक्त भी ठीक से चल नहीं पाती थी। उसका अपना परिवार तक उसका साथ छोड़ चुका था। पर पंकज ताउम्र उसके साथ बिताना चाहता था.....लेकिन क्यों? इसका जवाब पंकज के पास भी नहीं है। बस इतना सच है कि निवेदिता के साथ जीने के लिए पंकज ने अपने परिवार तक से रिश्ता तोड़ लिया। लेकिन कुदरत ने उन दोनों प्रेमियों पर जुल्म कम नहीं किए या यूं कहिए....
अपने एयर कंडीशन्ड ऑफिस की कांच की बंद खिड़की से आज झांक कर बाहर देखा..तो अचानक दिल बैठ सा गया। एक पल के लिए अपना सारा बचपन आंखो के सामने घूम गया। खिड़की से देखा आज सर्दी की नर्म धूप खिली हुई है जिसे देख तो पा रही हूं...महसूस नहीं कर सकती। इस धूप ने सालों पहले के रिश्तो की गर्माहट याद दिला दी। एक छोटा सा शहर झांसी...झांसी में एक छोटी सी कॉलोनी में एक छोटा सा घर था हमारा। क़ॉलोनी में एक छत थी जो किसी एक की नहीं, सबकी थी। सर्दी की दोपहर, खाना छत पर ही खाया जाता था। हर तरफ चटाई बिछी हुई, मां और पड़ोस की आंटिया। कोई संतरे छील कर हमें खिला रहा है तो कोई अमरूद। हम बच्चे अपनी मस्ती मे डूबे हुए। कभी गुट्टे खेलते थे तो कभी मां के हाथ से छीन कर, स्वेटर की एक आधा सिलाई....
'जिंदगी लाइव' का दूसरा सीज़न शुरू हो रहा है। पिछले एक साल में ये शो एक शो न रहकर हम सबकी ज़िंदगी का एक हिस्सा बन गया। अगर मैं ये कहूं कि 'ज़िंदगी लाइव' की वजह से हमने एक साल में जितना देखा, सुना, समझा और सीखा उतना अब तक की हम सबकी जिंदगी में नहीं हुआ था तो ये कतई अतिश्योक्ति नहीं होगी। पढ़ें:यही तो है सच्चा प्यार... मैंने अपने एपिसोड प्रोड्यूसर्स को अपने एपिसोड से जुड़े लोगों के लिए रोते हुए देखा है...उनके लिए दुआएं मांगते देखा है...उनके परिवारों का हिस्सा बनते हुए देखा है। हम इस शो पर सिर्फ काम नहीं करते, दिन-रात उसको जीते हैं, तभी ऐसे वाकये होते हैं जो खुद हमें भी चौंका देते हैं। पढ़ें:सर्दी की नर्म धूप और.... मेरी एपिसोड प्रोड्यूसर नीतू एक बार तोहफे में देने के लिए भगवान शंकर की मूर्ति....









