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जनक दवे
Thursday , May 06, 2010

‘फर्जी मुठभेड़’ की फांस


0IBNKhabar Google Buzz

गुजरात में फर्जी मुठभेड़ मामलों में एक के बाद एक आईपीएस अधिकारियों की गिरफ्तारी से पूरे महकमे में हड़कंप सा मच गया है। आईपीएस अधिकारियों का मोराल डाउन होता जा रहा है। दबी आवाज में ही सही आईपीएस कह रहे हैं, 'जो भी हो रहा है वह गलत है'। उनका तर्क थोड़ा राजनेताओं जैसा है। कहते हैं कि बाकी के राज्यों में भी तो आए दिन मुठभेड़ होती है। उसमें उत्तर प्रदेश तो सबसे आगे है। वहां क्यों कोई आवाज नहीं उठती? क्यों कोई जांच नहीं होती? शायद वो थोड़ा इमोश्नल होकर सोचते हैं। बाकी के राज्यों में मुठभेड़ में मरने वाले बदमाश मुख्यमंत्री को मारने भी तो नहीं आते। सवाल मंशा और नीयत का है। सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन मामले की पहली रिपोर्ट के बाद कहा था कि अधिकारियों ने पद, प्रतिष्ठा और प्रमोशन के लिए इन मुठभेड़ों को अंजाम दिया। हालांकि अब मामला सीबीआई के हाथों में....

Thursday , May 06, 2010

‘फर्जी मुठभेड़’ की फांस


3IBNKhabar Google Buzz

गुजरात में फर्जी मुठभेड़ मामलों में एक के बाद एक आईपीएस अधिकारियों की गिरफ्तारी से पूरे महकमे में हड़कंप सा मच गया है। आईपीएस अधिकारियों का मोराल डाउन होता जा रहा है। दबी आवाज में ही सही आईपीएस कह रहे हैं, 'जो भी हो रहा है वह गलत है'। उनका तर्क थोड़ा राजनेताओं जैसा है। कहते हैं कि बाकी के राज्यों में भी तो आए दिन मुठभेड़ होती है। उसमें उत्तर प्रदेश तो सबसे आगे है। वहां क्यों कोई आवाज नहीं उठती? क्यों कोई जांच नहीं होती? शायद वो थोड़ा इमोश्नल होकर सोचते हैं। बाकी के राज्यों में मुठभेड़ में मरने वाले बदमाश मुख्यमंत्री को मारने भी तो नहीं आते। सवाल मंशा और नीयत का है। सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन मामले की पहली रिपोर्ट के बाद कहा था कि अधिकारियों ने पद, प्रतिष्ठा और प्रमोशन के लिए इन मुठभेड़ों को अंजाम दिया। हालांकि अब मामला सीबीआई के हाथों में....

Wednesday, April 21, 2010

भाईसाहब, आईपीएल विवाद की जड़ कहां है?


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इंडियन प्रीमियर लीग, इंडियन पैसा लीग या फिर इंडियन पॉलिटिकल लीग...आप इसे कुछ भी कह लें पर एक के बाद एक आईपीएल के जो राज सामने आ रहे हैं वो काफी दिलचस्प हैं। आलम तो यह है कि आईपीएल के सेमीफाइनल-फाइनल का रोमांच खत्म होता जा रहा है और सबको मोदी-थरूर का क्या होगा यह चिंता ज्यादा सता रही है। थरूर तो अपने पद से गए अब क्या मोदी भी जायेंगे? यही सवाल और तर्क वितर्क इन दिनों सुनाई पड़ते हैं। अब बात मुद्दे की....सबका सवाल यह होगा कि आखिर यह मामला उठा कहां से? यह जानना काफी दिलचस्प है। साहब गुजरात के राजनीतिक गलियारों में इस पर विशेष चर्चा है। गुजरात क्रिकेट असोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों में चर्चा थोड़ी तार्किक लगती है। तर्क यह लगाया जा रहा है कि पूरे विवाद की जड़ अगर कहीं है तो वह है गुजरात। यहां तक की सीधे-सीधे कहते हैं कि यह....

Monday , September 21, 2009

ये उपचुनाव नतीजे क्या बताते हैं?


6IBNKhabar Google Buzz

14 सितम्बर की सुबह... गुजरात की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर में रोज के मुकाबले हलचल ज्यादा थी। उपचुनावों के आने वाले नतीजों के चलते हलचल के साथ वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में थोड़ी घबराहट भी थी। जैसे-जैसे घड़ी आगे बढ़ रही थी वैसे ही कार्यकर्ताओं की बेचैनी और बढ़ रही थी। दस बजे के आसपास थोड़ा स्पष्ट होने लगा की बीजेपी का घोड़ा रेस में आगे चल रहा है। वो भी एक नहीं पांच-पांच सीटों पर। यह रुझान जितने बीजेपी कार्यकर्ताओं और उनके नेताओं के लिए चौंकाने वाले थे उससे कई गुना ज्यादा कांग्रेस के लिए थे। चूंकि जसदन,देहगाम,दांता और चोटिला सीटों पर यह ट्रेंड बीजेपी के लिए कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के बराबर था। थोड़े समय बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा ही दी। मसलन सौराष्ट्र(सोरठ) की चार सीटें इस बार बीजेपी के खाते में आईं....

Monday , September 21, 2009

ये उपचुनाव नतीजे क्या बताते हैं?


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14 सितम्बर की सुबह... गुजरात की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर में रोज के मुकाबले हलचल ज्यादा थी। उपचुनावों के आने वाले नतीजों के चलते हलचल के साथ वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में थोड़ी घबराहट भी थी। जैसे-जैसे घड़ी आगे बढ़ रही थी वैसे ही कार्यकर्ताओं की बेचैनी और बढ़ रही थी। दस बजे के आसपास थोड़ा स्पष्ट होने लगा की बीजेपी का घोड़ा रेस में आगे चल रहा है। वो भी एक नहीं पांच-पांच सीटों पर। यह रुझान जितने बीजेपी कार्यकर्ताओं और उनके नेताओं के लिए चौंकाने वाले थे उससे कई गुना ज्यादा कांग्रेस के लिए थे। चूंकि जसदन,देहगाम,दांता और चोटिला सीटों पर यह ट्रेंड बीजेपी के लिए कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के बराबर था। थोड़े समय बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा ही दी। मसलन सौराष्ट्र(सोरठ) की चार सीटें इस बार बीजेपी के खाते में आईं....

Monday , May 18, 2009

मोदी जीतकर भी हारे....


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दरअसल इसबार के चुनाव नतीजे राजनीतिक पार्टियां तो छोड़िए आम लोगों की उम्मीदों से भी विपरीत आए। खासकर बीजेपी के लिए सबसे चौंकानेवाले नतीजे रहे। उस जमीं पर जहां पार्टी से ज्यादा मोदी की तूती बोलती है। नतीजों की अब समीक्षा होगी। हार के ठीकरा फोड़ने के लिए मोहरे तलाशे जाएंगे। समय-समय पर हरे जख्म भर जाते हैं। कुछ समय बाद वापस उसी रफ़्तार से बीजेपी राजनीतिक पटरी पर दौड़ने लगेगी। समीक्षा के नाम पर एनडीए की करारी हार के साथ बीजेपी के उन राज्यों को भी जोड़ा जा रहा है जिन राज्यों के मुखिया के विकास के कामों को चुनावी प्रचार का मुद्दा बनाया गया और वहीं बीजेपी कुछ खास नहीं कर पाई। उसमें गुजरात भी एक है। गुजरात यानी मोदी....गुजरात के नतीजे मोदी के गणित से बिलकुल विपरीत रहे। अबतक यह होता आया था की मोदी ने जो गणित पार्टी के आला नेताओं को गिनाए वो....

Thursday , April 30, 2009

मोदी बोले-आखिरी मुलाकात है....


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दोस्तो, मेरी आपसे यह आखिरी मुलाकात है। न जाने दोबारा आपसे मुलाकात हो पाए या नहीं। दरअसल चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सुरेंद्रनगर संसदीय क्षेत्र में मोदी ने इसी बयान से पब्लिक रैली को संबोधित किया। मोदी ने अपने भाषण में अचानक आखिरी मुलाकात की बात कहकर लोगों को सन्न कर दिया। लोग शुरू में समझ नहीं पाए कि मोदी यह क्या कह रहे हैं। मोदी धीरे-धीरे बात लोगों के सामने रखते गए। मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने गुजरात दंगों को लेकर उन्हें जेल भेजने की साजिश बनाई है। 3 महीने के भीतर ही केंद्र सरकार मुझे गिरफ्तार करवा सकती है। दोस्तो, गुजरात के स्वाभिमान के लिए मैं बलि चढ़ने को तैयार हूं। जेल क्या गुजरात के लोगों के लिए मुझे फांसी पर भी चढ़ाया जाए तो गम नहीं। मैं पुनर्जन्म लेकर आपकी दोबारा सेवा करना चाहता हूं। मोदी ने जो भावनात्मक दांव खेला उसका असर....

Monday , April 06, 2009

मोदी ऐसे तो न थे…


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एनडीए के प्रधानमंत्री इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवाणी के लिए यह चुनाव जितने अहम हैं उतने ही अहम उनके राजनीतिक चेले और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी हैं। एक लिहाज से कहें तो आडवाणी के साथ-साथ मोदी की इज्जत भी दांव पर लगी हुई है। तभी तो मोदी जी ने अबतक की उनकी इमेज की परवाह किये बिना दागियों को टिकट देकर बीजेपी की चाल,चरित्र और चेहरे की विचारधारा की धज्जियां उड़ा दी हैं। बाकी के राज्यों के मुकाबले कम से कम गुजरात में दागियों को टिकट देने में पार्टियां परहेज करती थीं। इस बार मोदी जी को न जाने क्या हुआ कि ज्यादातर उन्हें टिकट दिया गया जो कहीं न कहीं किसी आपराधिक मामलें में लिप्त रहे हैं। पता नहीं विपक्षी कांग्रेस जो गुजरात में कमजोर है वो इसे मुद्दा बनाती है या नहीं। कांग्रेस के लिए दिक्कत भी यह है कि वो मुद्दों....

Friday , March 06, 2009

मोदी बलवान नहीं हम कमजोर हैं...


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कहने को हम सब एक हैं पर एक दुसरे को कोसने का कभी कोई मौका नहीं छोड़ते। मैं गलती कर रहा हूं वो देख रहे हैं बावजूद नहीं बताते की मैं गलती कर रहा हूं चूंकि उनको मेरी गलतियों से फायदा मिलने वाला है। यह बातें मेरी नहीं गुजरात कांग्रेस के नेताओं की हैं। अपने आप में सबसे बड़ा सवाल यह है की गुजरात कांग्रेस क्यों मजबूत नहीं हो पा रही। इस पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से बात हो रही थी। उनके मुताबिक मजबूत तब हो सके जब सब एक दिशा में सोच रहे हों। यहां पर तो हर कोई अपनी दुकान चलाता है। ऐसा चल रहा है तभी कांग्रेस के नेताओं की बड़ी पहचान नहीं है। इसी के चलते ही जितने चुनाव हुए उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने नैतिकता के तौर पर इस्तीफा दे दिया या फिर नए व्यक्ति को प्रमुख बना दिया बिना यह देखे....

Thursday , February 19, 2009

सर मेरा कुछ कर दीजिए........


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गुजरात बीजेपी में मोदी की तूती बोलती है। यहां के बीजेपी नेताओं के राजनीतिक करियर की स्टेयरिंग मोदी के हाथों में है। इसलिए उनकी मर्जी के बिना यहां के नेता कोई कदम नहीं उठा सकते। ऐसे में वो सब लोग उनको खुश करने में लगे है जिन्हें लोकसभा का टिकट चाहिए। 2008 में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी को वाजपेयी और आडवाणी के कद के नेता के तौर पर देखा गया। फ़िर तो क्या था जो छवि बनी उसे मोदी और निखारते गए। इतना कम था कि नागपुर बैठक में उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात और महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया। मोदी ने \'नो-रिपीट\' थ्योरी का जो हथकंडा पिछले विधानसभा चुनावों में अपनाया था वही वो लोकसभा चुनाव में अपनाने जा रहे हैं। जिसने वर्तमान सांसदों की नींद हराम कर दी है। हर एक सांसद अपने आपको बेहतर उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की....

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