वैसे तो महाराष्ट्र की राजनीति ने कई ऐसे बदलाव की बयार को छुआ है जो अप्रत्याशित थी और अकाल्पनिक थी। यानी जो कल्पना के परे थे और किसी ने सोचा नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। 60 के दशक में जब यशवंतराव चव्हाण को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त महाराष्ट्र का पहला मुख्यमंत्री बनने के दो साल के भीतर ही दिल्ली में बुला लिया तो कई राजनीतिक पंडितों ने इसे चव्हाण की राजनीतिक हत्या तक करार दे दिया था। भारत-चीन सीमा विवाद बढ़ने के बाद 1962 में तात्कालीन रक्षामंत्री कृष्णा मेनन को इस्तीफा देना पड़ा और पंडित नेहरू ने यशवंतराव को केन्द्र में रक्षामंत्री बना दिया लेकिन जब 1966 में वे केन्द्र में गृहमंत्री बने तो ये लगा कि उनका निर्णय सही था। महाराष्ट्र की राजनीति को हिला देनी वाली दूसरी बड़ी घटना तब घटी जब 1978 में यशवंतराव चव्हाण ने कर्नाटक के दिग्गज कांग्रेसी देवराज यूआरएस....
मुंबई में गुलाबी ठंड पड़ रही है। जिसका मजा लेने सैलानी इसी सीजन में मुंबई आते हैं। अक्टूबर से फरवरी के बीच मुंबई में जो मजा होता है वो शायद ही देश के किसी और शहर या इलाके में मिले लेकिन इस सीजन में मुंबई में जिस शख्स के आने पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो है कांग्रेस के चिन्ताकारक,बीजेपी के आस के पंछी, माया-मुलायम-लालू के पट्टीदार और खासकर दिग्गी राजा के सपनों में रोज रात को दस्तक देने वाले अन्ना हजारे! अन्ना तो वैसे खुद महाराष्ट्र के हैं और मुंबई की धरती पर पहले भी कई बार आ चुके हैं लेकिन इस बार जो अन्ना का मुंबई दौरा है वो काफी चर्चा में है। हर गली-नुक्कड़ या मुंबई की भाषा में कहें तो हर नाके पर अन्ना की ही चर्चा जोरों से चल रही है। मेरा पेशा ही पत्रकारिता का है और दिल से मैं एक कवि....
मुंबई में मिड डे के क्राइम इन्वेस्टिगेटिंग एडिटर ज्योतिर्मय डे की हत्या को एक सप्ताह बीत चुका है लेकिन मुंबई पुलिस अभी भी पानी में लठ चलाने का ही काम करती नजर आ रही है। मुंबई पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच की दिशा कहां जा रही है ये तो पता नहीं लेकिन जांच करने का तरीका देखकर साफ कहा जा सकता है कि इतने संकट में मुंबई पुलिस की साख कभी नहीं रही जितनी की जे डे हत्याकांड की जांच में नजर आ रही है। पूरे शहर के 12 जोन के डीसीपी,40 एसीपी,50 से ज्यादा सीनियर इन्सपेक्टर,खुद पुलिस कमिश्नर अरूप पटनायक,दो ज्वाइन्ट सीपी और सूबे के गृह मंत्री तक जे डे के हत्यारों को अपने-अपने तरीके से पकड़ने में व्यस्त नजर आ रहे हैं। पवई पुलिस स्टेशन में सुबह 7 बजे से रात 1 बजे तक लाल-पीली बत्तियों की गाड़ियों का आना जाना लगातार जारी है। कभी कहा....
2 मई की सुबह थी, सुबह 7 बजे से ही ये खबर उड़ रही थी कि ओसामा बिन लादेन मारा गया लेकिन किसी चैनल पर कन्फर्मेशन नहीं थी। धीरे-धीरे ये खबर आग की तरह सभी जगह फैल गई कि ओसामा मारा गया। करीब 9 बजे थे, मैंने देखा घर के बाहर कुछ लोग कसाब और दाऊद के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। ये नारेबाजी क्यों चल रही है ये समझता कि इसके पहले ही पुलिस आ गई और प्रदर्शकारी भाग लिए। किसी के हाथ में कसाब के खिलाफ लिखे नारों के कार्डबोर्ड थे तो किसी के हाथ में काली पट्टी और सूंघने की कोशिश करता कि इतने में खबर आई कि ओसामा बिन लादेन पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा व्हाइट हाउस से पूरी दुनिया को संदेश दे रहे थे। वो बता रहे थे कि कैसे अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद शहर के अंदर घुसकर ओसामा को मार गिराया। खबर....
एक सुबह मुझे अचानक मैंगलोर विमान दुर्घटना की याद आ गई। ऐसा लगा मानो कोई मुझे अंदर से झकझोर रहा हो। मेरे रोंगटे खड़े हो गए। नहा-धोकर मैं पूजा करने चला गया। मैंगलोर प्लेन हादसे का एक-एक दृश्य मेरी आंखों के सामने घूमने लगा। अभी 22 जून को ही मैंगलोर विमान हादसे को एक महीना हुआ था। शायद मुझे लगता है कि ये घटना मेरे रिपोर्टिंग जीवन से बेहद गहरे तक जुड़ गई है। शायद इसलिए क्योंकि ये ऐसी पहली लाइव कवरेज थी जिसे करते वक्त मेरा दिल अंदर से रो रहा था। मुझे पता है कि वे आंखें आज भी गीली होंगी जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया है। हालांकि देश में हुए कई विमान हादसों में ये हादसा भी एक था लेकिन इतना भयावह मंजर शायद ही देश में पहले कभी किसी ने देखा हो। वो घटना जिसमें 158 लोगों की बेहद दर्दनाक मौत हुई। सभी शव....
अभी कुछ दिन पहले कि ही बात है। मैं मुंबई में चर्चगेट से अंधेरी जाने वाली 9.15 की लोकल ट्रेन में बैठा था। रात को शूट खत्म करके मैं घर जा रहा था। भीड़ कम थी इसलिए सीट बड़ी आसानी से मिल गई थी। मेरे दाहिनी तरफ भिन्डी बाजार के कुछ लड़के बैठे थे जो खालिस मुंबईया भाषा में बातचीत कर रहे थे। मुंबई में ऐसे लड़कों को टपोरी कहा जाता है और सभ्य लोग इनसे दूर रहने की ही कोशिश करते हैं। इन लड़को के हंसी-मजाक का सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक लोअर परेल रेलवे स्टेशन पर कमला मिल्स में काम करने वाले ऑफिस के 4 बंदे हमारे सामने वाली सीट पर आकर नहीं बैठे। टाई और सूट-बूट में आए इन लड़कों की मुद्रा बेहद गंभीर थी। शायद किसी खास विषय पर ये ऑफिस से स्टेशन तक बात करते हुए आ रहे थे। लोकल लोअर....
22 अक्टूबर की सुबह 6 बजे थे, मैं बाल ठाकरे के बंगले के सामने खड़ा था। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने वाले थे-सिर्फ दो घन्टे बचे थे। 8 बजे से रुझान आने का दौर शुरू हो होने जा रहा था। मैं लाइव देने के लिए तमाम आंकड़े जमा कर ही रहा था कि शिवसेना के एक बड़े नेता का मेरे मोबाइल पर एसएमएस आया - 'विजय आमचीच होणार-साहेबांच आदेश आलय...आजचा सामना वाचा- आम्हाला 160 सीट येतंय'- मराठी भाषा में इस एसएमएस का मतलब था -जीत हमारी ही होगी, साहेब का आदेश आया है, आज का 'सामना' अखबार पढ़ो, हमें कुल 160 सीटें मिल रही हैं- शिवसेना के इस नेता का इतना आत्मविश्वास देखकर मैं खुद चौंक गया। वह भी ऐसे समय में जब राज ठाकरे फेक्टर के चलते कोई भी एक्जिट पोल शिवसेना बीजेपी को 110 से 120 से ज्यादा सीटें देने को तैयार न था। मैं....
मुंबई माया नगरी है...यहां बॉलीवुड है, अंडरवर्ल्ड है, क्राइम है, स्लम है, शेयर बाजार की उठापठक है और साथ ही बाहरी लोगों को भाग जाने का नारा देने वाले नेता भी हैं लेकिन सबसे ज्यादा मुंबई जिस खासियत के लिए जानी जाती है वो है यहां कि फिल्म नगरी और फिल्मी सितारे। मुंबई में फिल्मी सितारों की चकाचौंध है, इस चकाचौंध को देखने रोजाना देश-विदेश से लोग मुंबई आते हैं। फिल्म सिटी, फिल्मिस्तान और फिल्मालया स्टूडियो के बाहर घंटों लोग अपने फेवरेट स्टार की झलक पाने का इंतजार करते हैं। अमिताभ बच्चन हों या शाहरुख खान या फिर सलमान खान जिस भी सितारों के बंगले या घर, मुंबई के ऑटो-टेक्सी वालों को सब पता हैं। वो इन सिनेमा प्रेमियों को ले-लेकर दिनभर घूमते रहते हैं। मकसद बस अपने सितारे की एक झलक पाना होता है। इसमें कई बार मुंबई पुलिस को तब इन फिल्मी सितारों के घर पर....
26/11...मैं हर रोज की तरह शूट पर था। इस विचार में कि आज शाम को बढ़िया नॉनवेज खाना खाऊंगा। बुधवार का दिन था और मैं बुध, शुक्र, रवि और कभी कभार सोमवार को ही नॉनवेज खाता हूं क्योंकि मैंने दिनभर कुछ खाया नहीं था। लगातार एनकाउंन्टर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा के टेरर लिंक की स्टोरी करने और मालेगांव धमाके की इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी करने में व्यस्त था। ये महज संयोग ही था कि उस दिन दोपहर 3 बजे के बाद से निशाद भी मेरे साथ लगातार था। निशाद सेशन कोर्ट में मालेगांव धमाके के आरोपियों की पेशी की कवरेज में था और मैं सेशन कोर्ट की ओबी पर ही वाय.पी. सिंह की बाइट-पीटीसी और डीजी ए. एन. राय के हलफनामे की कॉपी के विजुअल्स भेजने गया था। शाम के 6 बजे थे। हमें फोन आया कि मालेगांव मामले में एटीएस की बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेन्स है। हमने मुंबई असाइनमेंट पर बैठे नरेंद्र....









