जो 40 साल में नहीं हुआ, वह चार घंटे में हो गया। तेलंगाना अलग राज्य बनेगा। आंध्र प्रदेश विधान सभा को प्रस्ताव लाने के लिए कहा गया है। इतना दम ठोक कर तेलंगाना बनाने की बात आज तक किसी सरकार ने नहीं की। उस वक़्त भी नहीं जब 1969 में पहली बार तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन ने इतना ज़ोर पकड़ा कि 350 से ज़्यादा लोगों को अलग राज्य का सपना देखते हुए हुए जान देनी पड़ी। लेकिन 9 दिसम्बर 2009 को शाम 7 बजे से रात 11 बजे के बीच सिर्फ़ चार घंटे में ऐसा क्या हुआ कि रात 11.30 बजे गृह मंत्री चिदम्बरम को कहना पड़ा कि तेलंगाना राज्य बनेगा। 9 दिसम्बर को कांग्रेस कोर कमेटी की उन तीन बैठकों में आखिर क्या हुआ कि आज़ाद भारत के इतिहास के सबसे विवादित बंटवारे के बीज ने जन्म ले लिया है। विवादित बंटवारा इसलिए कहना सटीक है क्योंकि आने....
मनमोहन सिंह की जीत के बाद राजनैतिक पंडितों के अपने-अपने आंकलन होंगे। ये कांग्रेस सरकार के काम की जीत है। ये राहुल गांधी के करिश्मे का कमाल है। ये क्षेत्रीय दलों से जनता की विरक्ति है। और भी न जाने क्या-क्या। लेकिन नतीजे आने के सिर्फ 12 घंटे बाद जो सबसे बेहतरीन आंकलन मैंने सुना, वह था एक आइसक्रीम वाले का- अरे साहब 'कचर-पचर' से मुक्ति मिल गई। चुनावी नतीजों की रात उस आइक्रीम वाले से यूं ही सवाल पूछ लिया था- क्या भाई! जानते हो अब इलेक्शन के बाद नया प्रधानमंत्री कौन होगा? एक सेकंड भी सोचे बिना उसका जवाब था- 'कचर-पचर' से आज़ादी मिल गई। जब उससे पूछा गया कि 'कचर-पचर' का मतलब? तो फिर दो टूक जवाब- अरे साहब, उन लोगों की छुट्टी हो गई जो बिना बात के चूं-चूं पीं-पीं करते रहते हैं। कचर-पचर। ये हिन्दी का न कोई शब्द है। ना ही मुहावरा। लेकिन....
चांद और फ़िज़ा ने समाज के एक हिस्से को हिलाकर रख दिया है। ये वो तबका है जो या तो प्यार करता है या फिर प्यार और रिश्ते पर यक़ीन करता है। विश्वास और अविश्वास की बहस प्यार और सेक्स की बहस बन गई है। क्या फ़िज़ा और चांद के बीच सच में प्यार था? या फिर सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण और कुछ पल के आनंद को दोनों ने प्यार का नाम दिया? सवाल में ही कई जवाब छिपे हैं। ज़्यादा दूर मत जाइए- याद कीजिए वो प्रेस कॉफ़्रेंस। कम से कम चार टीवी चैनल पर फ़िज़ा उर्फ़ अनुराधा बाली अपने 'पति' चंद्रमोहन उर्फ़ चांद मोहम्मद के एसएमएस 'लाइव' दिखा रही थी। ये वो एसएमएस थे जब दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा था। एसएमएस में क्या था? यहां पर उसका ज़िक्र करना ज़रूरी नहीं है। लेकिन हर एसएमएस के खुलासे के साथ एक ही सवाल बार-बार उठ रहा....









