मकबूल फ़िदा हुसैन को कतर की नागरिकता दिये जाने पर एक बार फिर से उन्हें खोने का ऐहसास हो रहा। लेकिन राजनीति की बिसात पर हुसैन बस मोहरा बन कर रह जाते हैं। आज सेक्युलरिज़म की दुहाई देने वाले चुप हैं। ये वही लोग हैं जिन्होने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सरकारी दस्तावेजों के विशाल डम्पिंग ग्राउंड में दफन कर दिया है। ये हिम्मत कौन दिखाएगा कि उस रिपोर्ट को बाहर निकाल कर, उसे झाड़ पोंछ कर उसपर सिरे से अमल किया जाए। हुसैन से अलग जस्टिस सच्चर ने जो देश की अक़लियत के विकास का एक्स-रे निकाला उसमें देश की सेक्युलर छवि तार-तार दिखी। सेक्युलरवाद की दुहाई देने वाला ये समाज अक्सर कट्टरवादी हो-हल्ला करने वालों के सामने घुटने टेकता देखा गया। सरकारी तंत्र भी नपुंसक बन जाता है। यदि ऐसा न होता तो हुसैन को दुबई जाकर न बसना पड़ता। महाराष्ट्र के पंढरपुर की धरती पर वो....
पिछले साल अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने काहिरा के अपने भाषण में इस्लामिक देशों और अमरीका के बीच नया सफा लिखने का वादा किया था। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत हुआ था। अफगानिस्तान से फौज हटाना और ग्वातांनामो बे में कैदियों के टार्चर कैंपों को बंद करने का फैसला भी इस्लामिक उम्मे में ओबामा की दूरदर्शिता को लेकर विश्वास जगाता है। लेकिन इतने साल का तनाव जिसे कुछ समाजशास्त्रियों ने क्लैश ऑफ सिविलाइज़ेशन तक कह डाला इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा ये असंभव है। लेकिन कुछ चीज़ें जो असंभव नहीं है वो करण जौहर ने बड़े ही पाक-साफ अंदाज़ में अपनी फिल्म माई नेम इज़ ख़ान ( मैं एपीग्लोटिस से बोलते हुए लिख रहा हूं) में बता दी हैं। अब फिल्म ठाकरे देखें या नहीं अमरीकी राष्ट्रपति को ये फिल्म दिखानी होगी। खासकर उस सीन के लिये जब रिज़वान खान नये-निर्वाचित राष्ट्रपति से आखिरकार मिलने में....
ठाकरे जी, आप को ब्रेकिंग न्यूज दे दें। आप तो माई नेम इज खान देखने नहीं गए। लेकिन महाशिवरात्रि के दिन जो दर्शक आपके 'शिवसैनिकों' का घेरा तोड़कर मल्टीप्लेक्सेज में फिल्म देखने गया उसने फिल्म देखते देखते ताली पीटी। आप पूछेंगे कि इसमे कौन सी नई बात है। अपने हीरो को देखकर तो दर्शक ताली और सीटी बजाता ही है। लेकिन फिल्म देख रहे हमारे साथी ने अलग रिपोर्ट दी। सोचा आप को भी कन्वे कर दूं। मेरे साथी ने बताया कि फिल्म के इंटरवेल में दर्शकों ने तालियां पीटीं। और वो इसलिये कि उन्हें ये एहसास हुआ कि उन्होंने क्या अचीव किया है। उन्हें एहसास हुआ कि कैसे आपके तालिबानी हुक्म की धज्जियां उड़ाते, आपकी लुम्पेन वानर सेना को ठेंगा दिखाते हुए, अपने इंडियननेस पर भरोसा रखते हुए, आपकी स्यूडो भारतीयता बेनकाब करते हुए, उन्होंने वो कर दिखाया जो आप कतई रोकना चाहते थे। पब्लिक की नब्ज पहचानने....
शाहरुख खान के सवालों का जवाब हर उस शख्स को देना होगा जिसने संविधान की मूलभूत भावनाओं को हाज़िर-नाज़िर जान कर शपथ खायी है। जवाब उनसे भी चाहिये जो संविधान की भावनाओं से पूरी तरह भटक चुके हैं। देश की जनता को कुछ सवालों के जवाब चाहिये। बाल ठाकरे - महाराष्ट्र की पैरेलल 'सरकार' क्या ये सही नहीं कि विधानसभा में हारने के बाद आप का हाल वही हो गया है कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे? महाराष्ट्र के स्कूलों के छात्र सरकारी स्कूल छोड़कर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की ओर भाग रहे। इसमें भी क्या गैर-मराठियों की कोई साजिश है? क्या आपके नाती-पोते अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नहीं पढ़े हैं? शिवाजी महाराज नें मुसलमानों नहीं एक क्रूर सम्राट के खिलाफ जंग छेड़ी। आप क्रूरता से भोली-भाली जनता के बीच दहशत फैलाकर क्या शिवाजी का अपमान नहीं कर रहे? कानून को धता बता....
अब सदी का महानायक गुजरात का चेहरा होगा। टूरिस्टों को गुजरात की ओर आकर्षित करने के लिये अमिताभ बच्चन अब मोदी के ब्रैंड अम्बैसेडर होंगे। इसके बाबत अमिताभ बच्चन ने मोदी का निमंत्रण स्वीकार करते हुये उन्हें चिट्ठी लिख का हामी भर दी है। अब गुजरात के दो चेहरे होंगे। नरेन्द्र मोदी और अमिताभ बच्चन। दरअसल ये डील तो उसी दिन पक्की हो गई थी जिस दिन अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म 'पा' के प्रमोशन के लिये गुजरात पहुंचे और नरेन्द्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट के लिये फिल्म 'पा' की स्पेशल स्क्रीनिंग की। उस दिन 'पा' और गुजरात के हिंदुवादी 'पा' मोदी की झप्पियां डालते हुये तस्वीर देखकर यूं लगा कुंभ के मेले में बिछड़े भाई सालों बाद मिले हों। अपनी प्रोडक्ट की पब्लिसिटी करने का सबको हक है खासकर तब जब फिल्म का प्रोड्यूसर अपना बेटा ही हो। लेकिन अमिताभ बच्चन नरेन्द्र मोदी के आभामंडल से इतनी जल्दी....
उनके साथ ब्लैक कैट रक्षक क्या कम थे कि मायावती ने अपनी मूर्तियों की सुरक्षा के लिये भी \'रक्षक\' ढूंढ़ने की ठान ली। स्पेशल जोन सिक्योरिटी फोर्स बिल विधानसभा में पेश हो चुका है। बीएसपी का दोनों सदनों में बहुमत है। इसलिये बिल आसानी से पास भी हो जायेगा। सदन में बिल पर चर्चा तो बस फॉर्मेलिटी भर है। बिल के दायरे में 13 मॉल एवेन्यू भी है जहां मायावती खुद रहती हैं। मूर्तियों में जान फूंक दी जाये तो वो भगवान का दर्जा पा लेती हैं। लेकिन माया तो खुद देवी हैं जिनके एक इशारे पर पूरा सरकारी तंत्र उनकी और उनकी मूर्तियों की सेवा में दिन-रात एक कर सकता है। उनका रक्षक बन सकता है। ये स्पेशल फोर्स बनी तो अब तक के किसी भी क्रांतिकारी दलित नेता का दलितों के उत्थान के लिये सबसे महत्वपूर्ण योगदान होगा। मान्यवर कांशीराम भी अपने जीवनकाल में ये नहीं कर....
विशाल भारद्वाज की जल्द रिलीज होने वाली नई फिल्म 'इश्कियां' में पाकिस्तान के मशहूर सूफी गायक मरहूम नुसरत फतेह अली खान के भतीजे राहत फतेह अली खां का गाया गाना इस समय हिंदुस्तान के फिल्म संगीत प्रेमियों का नेश्नल ऐंथम हो गया है। गुलज़ार के लिखे इस गीत 'दिल तो बच्चा है' को गाकर राहत ने बच्चे, बूढ़े़ सब के दिलों में अपनी जगह बना ली है। संगीत प्रेमियों में राहत कोई नया नाम नहीं हैं। इससे पहले भी वो कई हिंदी फिल्मी हिट गाने गा चुके हैं। राहत पाकिस्तानी हैं और जब वो अपनी आवाज़ का जादू बिखेरते हैं तो सारा हिंदुस्तान उसे सुनता है। राहत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की फरीदा खानम हों या नुसरत, मेहंदी हसन हो या गुलाम अली, पाकिस्तान का रॉक बैंड जुनून हो या नये युवा गायक आतिफ असलम। भारत ने पाकिस्तानी टैलेंट की हमेशा कद्र की और सर आंखों पर बिठाया। अमन का....
अमर सिंह कहते हैं, मैं समाजवादी बनूंगा मुलायमवादी नहीं। मुलायम के नाम से इतनी बेरुखी। वो तो आपके नेताजी हैं। आप उनके राइट हैंड, लेफ्ट हैंड, उनकी नाक, नाक के बाल, कान, उनकी लाज, उनकी साख, उनके धन, उनकी सम्पदा दिल, दिमाग, मन, मस्तिष्क, उनके सैफई सब कुछ थे। मुलायम तो केवल नाम के मुलायम सिंह यादव रह गये थे असली समाजवादी तो आप थे। पार्टी की साइकिल तो आप ही थे। जिसके आगे अमिताभ और जया बच्चन थे, पीछे कैरियर पर संजय दत्त थे, हैंडल पर जया प्रदा भाभी थीं, अनिल अंबानी की घंटी थी। पीछे मडगार्ड में गोदरेज की लाइट। आप खुद साइकिल की चेन, उसका पहिया और उसके पहिये में डलने वाले मोबिल ऑयल। वो अलग बात है कि साइकिल मुलायमवादी अमर सिंह की समाजवादी पार्टी का बस चुनाव निशान थी। बाकी तो आप तो कभी एसयूवी से नीचे चले नहीं। नेताजी को भी उसकी खूब सवारी....
टीवी न्यूज चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज अब ध्यान नहीं खींचती। लेकिन शुक्रवार को तिरुनेलवेल्ली शहर से जो ब्रेकिंग न्यूज के साथ विजुअल चले उसने दिल दहला दिया। खून में सना एक वर्दीदार पुलिसकर्मी सड़क पर पड़ा था। वो तड़प रहा था। बार-बार उठने की कोशिश कर रहा था। हाथ के इशारे से आने-जाने वालों से मदद की गुहार कर रहा था। मगर उसकी मदद को कोई नहीं आगे आया। उसी सड़क से मंत्री के कार का काफिला गुजरा, भीड़ ने तमाशा देखा मगर उस पुलिसकर्मी की मदद को कोई हाथ आगे नहीं बढ़ा। उस पुलिसवाले को बदमाशों ने बम मार कर लहू-लुहान कर दिया था। उसके शरीर के अंग में गहरे घाव हो चुके थे। एक बार तो हिम्मत करके उसने बैठने की कोशिश की मगर हिम्मत जवाब दे गयी। वो फिर सड़क पर गिरा मानो बिजली का तार टूट के गिरा हो। उस विजुअल को देखकर शरीर में करंट....
क्या ये महज़ इत्तेफाक है या कुदरत का अजीबोगरीब करिश्मा कि जिस दिन समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह दुबई से मुलायम सिंह को इस्तीफा फैक्स कर रहे थे और मीडिया को फोन पर ब्रेकिंग न्यूज दे रहे थे उसी दिन उनके भाई-समान दोस्त अमिताभ बच्चन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से झप्पियां डाल रहे थे। क्या इन दोनों वारदातों में कोई तार जुड़ता है। पिछले दिनों बीमार अमर सिंह जब दुबई में अपना इलाज करा रहे थे तो उनका दुख-दर्द बांटने बस दोस्त अमिताभ बच्चन ही उनके साथ थे। समाजवादी परिवार से उनकी खैर-खबर लेने कोई नहीं पहुंचा। अमर सिंह ने ये बात दिल पर ले ली। और फाइनली पार्टी के सभी पदों से अपना इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक हल्कों में उनके पार्टी छोड़ने पर कयास लग रहे। सुगबुगाहट है कि वो कहीं कांग्रेस में शामिल तो नहीं हो रहे। वो तो उनकी सबसे पुरानी फैमिली है। डीएनए....




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