फौज और मौज दोनों अलग-अलग शब्द हैं। दोनों के अलग मायने हैं लेकिन पंजाब की सियासत ने दोनों शब्दों को एक प्लेटफार्म पर ला खड़ा किया है। हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव खत्म हुए और कांग्रेस की लुटिया डूब गई। इस लुटिया के पालनहार अमरिंदर सिंह आजकल सिर्फ करारी हार ही नहीं बल्कि अपनी पार्टी के नेताओं की बेरुखी भी झेल रहे हैं। कारण है उनका वो रवैया जिसके सिर हार का दोष मढ़ा जा रहा है। अमरिंदर सिंह की उस फौज पर गुस्सा उतर रहा है जिससे अमरिंदर सिंह पिछले दो सालों से घिरे हुए थे। दो साल इसलिए क्योंकि पिछली शिकस्त से लेकर दो साल पहले तक अमरिंदर सिंह का पंजाब में कुछ अतापता नहीं था। 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान प्रकट जरूर हुए थे लेकिन अपने बेटे और पार्टी की हार के बाद फिर गायब हो गए। जब वापस आए भी तो उनके आसपास चंद....
हाल ही में हिसार लोकसभा चुनाव के नतीजे आए हैं। इन नतीजों पर देशभर की नज़र थी क्योंकि अन्ना और उनकी टीम ने इसी चुनाव में जनता को कांग्रेस के खिलाफ वोट करने का खुल्लम खुल्ला अभियान चलाया था और कांग्रेस ने भी अन्ना की इस अभियान के खिलाफ अपनी मुहिम छेड़ी हुई थी। कुल मिलाकर हरियाणा से बाहर हिसार का चुनाव टीम अन्ना और कांग्रेस के बीच लड़ाई का केंद्र बन कर रह गया था। जब नतीजे आए तो वाकई वही हुआ जैसा कि टीम अन्ना चाहती थी। कांग्रेस चुनाव बहुत बुरी तरह से हार गई यहां तक कि कांग्रेस प्रत्याशी की ज़मानत तक जब्त हो गई। इस चुनाव को हरियाणा जनहित कांग्रेस और बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार कुलदीप बिश्नोई ने जीत लिया। दूसरे नंबर पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के बेटे अजय चौटाला रहे। ऊपर लिखे ज्ञान को पढ़कर यह नतीजे बड़े आसान लगते हैं....
वागले की दुनिया यह नाम 1988 में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले उस सीरियल का है जिसे यादकर आज भी मध्यवर्गीय उस भारतीय की तस्वीर आंखों के सामने उतर आती है जो कभी महंगाई तो कभी भ्रष्टाचार से लड़ता-मरता जिये जा रहा है। मशहूर लेखक और कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण द्वारा लिखे इस सीरियल का मुख्या किरदार था 'श्रीनिवास वागले'। एक सरकारी ऑफिस में काम करने वाला बाबु 'मिस्टर वागले', दो बच्चों का बाप मिस्टर वागले, घर और बच्चों को संभालने वाली हाउस वाइफ राधिका का पति 'मिस्टर वागले'...! ज़ाहिर है 'सास बहु', आनंदी, अक्षरा और रागिनी की मौजूदा टीवी की दुनिया में वागले की दुनिया याद दिलवाने के लिए ऊपर दिया ज्ञान ज़रूरी था। 1988 में मैं महज़ आठ साल का था। इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री की गद्दी पर थे। पंजाब में आतंकवाद चरम पर था, इस आतंकवाद का खौफ पंजाब की राजधानी....
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सर्वोच्च न्यायालय ने एक बड़ी रहत क्या दी कि मौजूदा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व उनके बेटे सुखबीर बादल समेत पूरे शिरोमणि अकाली दल के मुंह पर चुप्पी छा गई। सर्वोच्च न्यायलय की संवैधानिक पीठ ने पंजाब विधानसभा के उस फैसले को गलत ठहरा दिया है जिसकी वजह से अमरिंदर सिंह की विधानसभा से सदस्यता खत्म कर दी गई थी। सर्वोच्च न्यायलय ने पंजाब विधानसभा की इस कार्रवाई को बदले की कार्रवाई बताया। यह वाकया था 3 सितम्बर 2008 का। तबसे अमरिंदर अदालतों के चक्कर लगा रहे थे। दलील थी कि पंजाब विधानसभा में बहुमत का सुख भोग रहे अकालियों और बीजेपी ने षड्यंत्र के तहत विधानसभा के कंधे पर बंदूख रख कर उन्हें विधानसभा से बाहर कर दिया। इसे असंवैधानिक करार दिया गया था। अमरिंदर पर यह आरोप है कि मुख्यमन्त्री रहते हुए अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की 32.5 एकड़ ज़मीन अवैध....
एक हाई प्रोफाइल बच्चे की छुट्टी अचानक कैंसिल हो गई! बच्चा छुट्टी कैंसिल होने से बहुत परेशान था। परेशान इतना कि जाते-जाते अपनी मां को एक ऐसी चिट्ठी लिख कर गया कि पत्थर दिल इंसान का दिल भी पसीज जाए। कहानी शुरू करने से पहले चिट्ठी के कुछ अंश भी जरूर पढ़ लें- \"मां ये मीडिया वाले मुझे यहां जीने नहीं देंगे। इस लिए मैं वापस जेल जा रहा हूं। न जाने अब मैं दुबारा आपको कब देखूंगा!\" ये गले को रुंध देने वाले शब्द किसी और के नहीं बल्कि जेसिका लाल के हत्यारे मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ वशिष्ठ की उस चिट्ठी के हैं जो मनु ने अपनी छुट्टी, माफ कीजिए, पेरोल के बीच में जेल जाने से पहले लिखी। मनु ने ये चिट्ठी अपनी मां को लिखी है उसी बीमार मां को जिस के लिए वो जेल से दो महीने के लिए बाहर आया था। लेकिन सुकून की....
पंजाब के लोग बहुत मेहनती है, पंजाब के लोगो में खूब कुव्वत है मेहनत करने की, वो पंजाब पर पड़े हज़ारों करोड़ रुपयों का क़र्ज़ भी शायद कुछ इसी मेहनत से उतार देंगे... यह शेरो शायरी पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने पंजाब पर बकाया क़र्ज़ की नजाकत को बयान करते-करते सुना दी। यह शायद भारत के ज्यादातर लोगों को पता न हो की देश के सबसे संपन्न प्रदेश पर साठ हज़ार करोड़ रुपयों का क़र्ज़ है जिसके सालाना छह हजार करोड़ रुपये सूद भी पंजाब सरकार अदा नहीं कर पा रही है। हाल यह है कि अगले वित्त वर्ष के बजट को पेश करने के लिए राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाली ग्रांट पर निगाहें लगाए बैठी है। वैसे पंजाब के लोगों के ऐशो आराम की बेफिक्र जिन्दगी और इन्हें लग्जरी गाड़ियों में घूमते देख कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि 3 करोड़ से ज्यादा....
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का इन दिनों कुछ अता-पता नहीं है। यह आलम तब से है जब से पाकिस्तानी पत्रकार अरुसा आलम भारत आई हैं। कैप्टन की दोस्त अरुसा पिछले हफ्ते ही अटारी बॉर्डर से सड़क के रास्ते भारत में दाखिल हुईं और सीधा दिल्ली निकल गईं। तभी से कैप्टन साहब का भी कुछ अता-पता नहीं है। अमरिंदर के बेहद नजदीकी सूत्रों की मानें तो कैप्टन साहब अपनी दोस्त अरुसा के साथ हिमाचल की हसीन वादियों में निकल गए हैं। शायद सोलन में अपने डोची फार्म पर या फिर मनाली में। अटकलें यह भी हैं कि अमरिंदर अरुसा के साथ दिल्ली में अपने किसी गुप्त ठिकाने पर हैं। खैर अरुसा के भारत में आते ही कांग्रेस पार्टी ने खतरे की घंटी बजा दी। खासतौर से कांग्रेस की आलाकमान अरुसा के भारत आने से काफी खफा हैं। खबर तो यहां तक है कि कांग्रेस हाईकमान ने....









