बेंगलुरू के बाद 'किस्सा कर्नाटक का' का अगला पड़ाव था ऐतिहासिक मैसूर। कावेरी नदी पर छिड़ी किचकिच आखिर किस हद तक इन चुनावों में मुद्दा है, हम टटोलना चाहते थे। वैसे अगर आप इस रूट पर सफर कर रहे हों तो बेंगलुरू से 30 किलोमीटर आगे बिरडी में छोटे से शिवादर्शिनी ढाबे में गरमागरम तट्टे इडली यानी प्लेट जैसे दिखने वाली इडली का नाश्ते में लुत्फ उठाना ना भूलें। वो आपको कहीं और नहीं मिलने वाली। हमें भी दोस्तों ने सुझाव दिया था। और इतना ही कह सकती हूं कि बेहद सही सुझाव था। छोटे कारोबारियों की कौन सुनेगा? बिरडी से 15 किलोमीटर आगे रामनगर के सरकारी मलबरी ककून बाजार में कारोबारी नाराज दिखे। उनकी शिकायत थी कि सरकार सिर्फ बड़े कारोबारियों से रेशम लेती है। सिल्क बोर्ड अगर इन लोगों से ककून (कच्चे रेशम का कोवा) के साथ-साथ रेशम भी खरीदे तो भला हो। नहीं तो....
अप्रैल के पहले हफ्ते में बेंगलुरू में विमान के उतरने के साथ ही मेरे चेहरे पर एक मुस्कुराहट खिली। ख्याल आया कि चलो कम से कम दो दिन के लिए दिल्ली की 34 डिग्री की गर्मी से कुछ राहत तो मिलेगी। तभी केबिन में घोषणा की गई-बाहर का तापमान 38 डिग्री है...दिल बैठ सा गया। एयरपोर्ट से बाहर निकली तो लगा कि सूरज खींच के थप्पड़ लगा रहा हो। मेरे कैमरामैन और मैं परेशान थे कि ये इस शहर को हुआ क्या है। आखिर बैंगलोरियन्स को सबसे ज्यादा गुमान होता है सालभर यहां के मौसम के सुहाने मिज़ाज का। लेकिन इस आईटी सिटी की आबोहवा बदल सी गई है। और ये हर किसी के लिए चिंता का विषय है, साथ ही कहीं ना कहीं एक चुनावी मुद्दा भी। मुंह चिढ़ाता ट्रैफिक और कूड़ा किस्सा कर्नाटक का के पहले पड़ाव में दक्षिण भारत के इस चकाचौंध वाले लुभावने....
पत्रकारों के लिए कुछ मुद्दे जिनको वो खास फॉलो करते हैं काफी बार अडिक्टिव बन जाते हैं। मसलन बिहार-यूपी की राजनीति हो, क्रिकेट का करिश्मा, पाकिस्तान और चीन की कूटनीति या फिर कश्मीर का मसला। 25 सितंबर को जब से गृह मंत्री चिदंबरम साहब ने कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक के बाद आठ सूत्रीय कार्यक्रम का एलान किया और कहा कि केंद्र के वार्ताकार नियुक्त होंगे तबसे कश्मीर के हालात पर नज़र बनाए रखने वाले हम तमाम पत्रकारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज़ हो गईं। जहां दो पत्रकार मिले, एक ही सवाल- आखिर कौन होंगे वार्ताकार। थियरीज़ बनने लगीं, सबके सूत्र अलग-अलग नामों को उछालने लगे। पहले लगा शायद चीफ इंफर्मेशन कमिश्नर और कश्मीर में लंबा वक्त गुजार चुके वरिष्ठ कश्मीरी नौकरशाह वजाहत हबीबुल्लाह, जम्मू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसेलर रह चुके और जेएनयू में प्रोफेसर अमिताभ मट्टू जैसे नाम शामिल होगें। फिर हम सभी ने इन अटकलों को....
चौदहवीं लोकसभा के आखिरी संसद सत्र को खत्म होने में महज़ 24 घंटे से कम ही बाकी थे। संसद परिसर में भटकते हुए मैंने सोचा क्यों न सफेद कुर्ते में जगमगाते नेताओं से पूछा जाए- वही सवाल जो हम पत्रकार आमतौर पर पूछना पसंद करते हैं -कैसा महसूस कर रहे हैं, क्या धड़कनें तेज़ हैं या आंखें नम? भई ज़रूरी तो नहीं कि जिस बैंच को छोड़ ये सितारे सत्ता की महापंचायत से बाहर जा रहे हैं, उस पर दोबारा विराजमान हों। सोच ही रही थी कि सुप्रिया सुले पर नज़र आ गईं। कम उम्र हैं तो क्या हुआ, शरद पवार की कन्या हैं। राजनीति में ये विरासत अपने आप में अनुभव है। फिर भी लगा, हो सकता है थोड़ी चिंता में हों। सो पूछ डाला और जल्द गलत साबित हुए। तपाक से बोलीं - आई एम नाट नर्वस, रादर इट इज टाइम नाउ टू गो फोर द किल। ....









